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खून बहाने की धमकी देने वाले बिलावल भुट्टो को पता चली अपनी औकात, जल संकट बढ़ा तो दुनिया के सामने गिड़गिड़ाए
संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में चाइना सेंट्रल टेलीविज़न को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि सिंधु जल विवाद, आतंकवाद और कश्मीर पर ठोस बातचीत करने की ज़रूरत है. इसके अलावा, बिलावल ने यह भी कहा कि भारत ने अवैध तरीक़े से जल प्रहार कर नया मोर्चा खोला है.
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पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मोदी सरकार द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले पर भारत को गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी के सुर अब बदल गए हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में चाइना सेंट्रल टेलीविज़न को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि सिंधु जल विवाद, आतंकवाद और कश्मीर पर ठोस बातचीत करने की ज़रूरत है. इसके अलावा, बिलावल ने यह भी कहा कि भारत ने अवैध तरीक़े से जल प्रहार कर नया मोर्चा खोला है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बिलावल ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक स्थायी युद्धविराम ही असली जीत मानी जाएगी. बिलावल का कहने का मतलब है कि यह सवाल पूछना बहुत आसान है कि कौन जीता, लेकिन देखना यह दिलचस्प है कि देश की सरकार और मीडिया अपने लोगों से झूठ बोल रही है. बता दें कि बिलावल का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पहले ही भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान और उसके अधिकृत कश्मीर के 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है. भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है. हालाँकि, इसके बाद दोनों देशों के बीच हुए सैन्य संघर्ष पर 10 मई से विराम लग गया है.
शांति की कल्पना कर रहे भुट्टो
बिलावल भुट्टो, जो कभी दरिया में ख़ून बहाने की बात करते थे, अब शांति की बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर भारत और पाकिस्तान दोनों पक्ष बातचीत शुरू करें तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी. शांति के लिए बातचीत और कूटनीति ही रास्ता है. फिलहाल पाकिस्तान बातचीत चाहता है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों के बीच सीज़फायर कराने में अहम भूमिका निभाई है, तो स्थायी शांति में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है.
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बताते चलें कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने बैसरन घाटी में 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद भारत सरकार ने सबसे पहले पाकिस्तान के खिलाफ पाँच कड़े फैसले लिए थे, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला भी शामिल था. इस फैसले से पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया और भारत को गीदड़भभकी देने लगा. इसके बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की कार्रवाई की थी.