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भारत के भगोड़े मेहुल चोकसी को बड़ा झटका... बेल्जियम सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की, जल्द होगा प्रत्यर्पण

बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने मेहुल चोकसी की अपील खारिज कर दी है. इससे उसके भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है. अदालत ने एंटवर्प कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि भारत भेजे जाने पर चोकसी को यातना या दुर्व्यवहार का कोई खतरा नहीं है.

Source: X/ @anidigital
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भारत के सबसे चर्चित बैंक घोटाले मामलों में से एक में मंगलवार को एक बड़ी कानूनी सफलता सामने आई है. बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत कोर्ट ऑफ कैसेशन ने भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद भारत के लिए उसकी वापसी का रास्ता पहले से कहीं ज्यादा साफ हो गया है.

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

ब्रसेल्स में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील के 17 अक्टूबर के फैसले को सही ठहराया. इस फैसले में साफ कहा गया था कि चोकसी की यह दलील बिल्कुल निराधार है कि भारत भेजे जाने पर उसके साथ किसी तरह की यातना या दुर्व्यवहार हो सकता है. ब्रसेल्स के महाधिवक्ता हेनरी वेंडरलिंडेन ने ईमेल के जरिए पुष्टि की कि सर्वोच्च अदालत ने चोकसी की अपील ठुकरा दी है. इसलिए निचली अदालत का निर्णय ही प्रभावी रहेगा.

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भारत आने से बचना चाह रहा है मेहुल चोकसी 

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मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक में 13000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक है. भारत ने लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया हुआ था. एंटवर्प की अपीली अदालत ने भारत के इसी अनुरोध को लागू-योग्य बताया था, जिसके खिलाफ चोकसी लगातार कानूनी दांव-पेंच आजमा रहे थे. अदालत ने यह भी माना कि 29 नवंबर 2024 को एंटवर्प की चार सदस्यीय अभियोग कक्ष ने जिला अदालत के प्री-ट्रायल चैंबर के आदेशों को ठीक बताया था. इनमें मई 2018 और जून 2021 में मुंबई की विशेष अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को लागू-योग्य माना गया था और चोकसी के प्रत्यर्पण को हरी झंडी दी गई थी.

कोर्ट के फैसले के क्या हैं मायने?

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अब सवाल यह है कि एंटवर्प अदालत का फैसला आखिर क्यों सही माना गया. अक्टूबर में अदालत ने चोकसी की सभी मुख्य दलीलों को निराधार बताते हुए साफ किया था कि भारत में उसके खिलाफ राजनीतिक मुकदमे की कोई संभावना नहीं है. ना ही उसे किसी तरह की यातना दी जाने का जोखिम है. उसके अपहरण के दावे को भी अदालत ने बेबुनियाद पाया. चोकसी ने आरोप लगाया था कि 2021 में अण्टीगुआ और बारबूडा में उसका अपहरण भारत की मदद से कराया गया था. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरपोल की रिपोर्ट भी इस दावे की पुष्टि नहीं करती.

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बता दें कि अदालत का अंतिम फैसला यह रहा कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी और उसका कोई संवैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होगा. अब सर्वोच्च अदालत द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद चोकसी का भारत प्रत्यर्पण पहले से कहीं अधिक निकट दिखाई देता है. भारत की एजेंसियां इस फैसले को एक बड़ी कानूनी जीत के तौर पर देख रही हैं और अब आगे की औपचारिक प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है.

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