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BRICS सम्मेलन की शुरूआत से पहले रूस एक बयान ने दुनिया में मचाया बवाल, भारत - चीन का हुआ ज़िक्र

अब शिखर सम्मेलन से पहले एक तरफ़ भारत से चीन का विवाद सुलझने की बात सामने आई वहीं दूसरी तरह BRICS की शुरूआत से पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रूस-भारत-चीन (RIC) तिकड़ी को लेकर बयान दिया है। उनका ये बयान काफ़ी अहम माना जा रहा है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स समिट में शिरकत करने के लिए रूस पहुंच गए हैं। उनका यह दौरा 2 दिन का है। PM मोदी पिछले 4 महीनों में दूसरी बार रूस के दौरे पर हैं।मोदी इससे पहले जुलाई में भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। अब शिखर सम्मेलन से पहले एक तरफ़ भारत से चीन का विवाद सुलझने की बात सामने आई वहीं दूसरी तरह BRICS की शुरूआत से पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रूस-भारत-चीन (RIC) तिकड़ी को लेकर बयान दिया है। उनका ये बयान काफ़ी अहम माना जा रहा है। दरअसल, लावरोव ने कहा कि पिछले कुछ सालों से ये देश औपचारिक तौर पर नहीं मिले हैं, लेकिन आज भी ये एक मजबूत संबंध रखते हैं।


पिछले कुछ सालों से ये देश औपचारिक तौर पर नहीं मिले हैं, लेकिन आज भी ये एक मजबूत संबंध रखते हैं। एक साल से अधिक समय से और वास्तव में कई दशकों से, वैश्विक विकास का केंद्र यूरो-अटलांटिक क्षेत्र से यूरेशिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की तरफ़ बढ़ रहा है। BRICS दुनिया की इकोनॉमी में चल रहे बदलावों का प्रतीक है आज दुनिया में नए आर्थिक केंद्र विकसित हो रहे हैं। इससे दुनिया पर फाइनेंसियल असर भी पड़ रहा है। BRICS अपने सदस्य देशों की जरूरतों को ध्यान में रखता है। दूसरे देश भी इसका सदस्य बनना चाहते हैं। यह एक ऐसा ग्रुप है जिसमें न तो एक देश आगे है और न ही दूसरों के पीछे हैBRICS का मकसद किसी से संघर्ष करना नहीं है। इसमें पश्चिमी देश शामिल नहीं हैं, इसका मतलब ये नहीं कि हम उनके विरोधी हैं। BRICS का मकसद अपनी ज्योग्राफी, साझा इतिहास और आस-पास होने का लाभ उठाना है


क्या है BRICS और ये कितना ताकतवर है?

BRICS संगठन अभी जिस रूप में है, इसके यहां तक पहुंचने का सफर तीन स्टेज में पूरा हुआ है।
पहली स्टेज - RIC यानी रूस, इंडिया और चीन- 1990 के दशक में ये तीनों देश मिलकर एक संगठन बनाते हैं। इस संगठन का नेतृत्व रूसी नेता येवगेनी प्रिमाकोव ने किया। तीनों देशों के साथ आने का मकसद दुनिया की फॉरेन पॉलिसी में अमेरिका के दबदबे को चुनौती देना था और साथ ही अपने संबंधों को नए सिरे से खड़ा करना था।
दूसरी स्टेज- BRIC यानी ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन- 2001 में इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने इन चारों देशों को इकोनॉमी के लिहाज से दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बताया था। इसके बाद 2009 में इन देशों ने साथ आकर संगठन बनाया, जिसे BRIC नाम दिया गया।
तीसरी स्टेज- BRICS यानी ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका- 2010 में अफ्रीका महाद्वीप को रिप्रेजेंट करने के लिए साउथ अफ्रीका को इस संगठन का हिस्सा बनाया गया। तब इस संगठन को अपना आखिरी रूप मिला और ये BRICS कहलाया।


आज EU को पछाड़ कर BRICS दुनिया का तीसरा ताकतवर आर्थिक संगठन बन गया है..इसी के साथ हाल ही में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ब्रिक्स के सदस्य बने हैं। बढ़ी हुई सदस्यता के साथ ब्रिक्स दुनिया की 45 % आबादी और 28 फीसदी अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन बन गया है..

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