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'अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें...', यूक्रेन में सैनिक भेजने के यूरोप के मंसूबों पर पुतिन की सख्त चेतावनी, कहा- कोई भी आया तो बचेगा नहीं

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि शांति समझौते से पहले यदि कोई विदेशी सैनिक यूक्रेन में तैनात होता है तो उसे रूस की सेना वैध निशाना मानेगी. व्लादिवोस्तोक में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने शांति बलों की तैनाती के विचार को खारिज करते हुए कहा कि रूस किसी अंतिम समझौते का सम्मान करेगा, लेकिन युद्ध के दौरान विदेशी सैनिकों की मौजूदगी स्वरिकर नही की जाएगी.

Vladimir Putin (File Photo)
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा बयान दिया जिसने पूरे यूरोप और वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी. पुतिन ने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी भी विदेशी सैनिक को शांति समझौते से पहले यूक्रेन में तैनात किया गया तो उन्हें रूस की सेना 'वैध निशाना' मानेगी. यह बयान उस समय आया है जब यूरोपीय देशों के नेता यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर संयुक्त प्रयासों की बात कर रहे हैं.

पुतिन ने दी सीधी चेतावनी 

व्लादिवोस्तोक में आयोजित ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने कहा, “अगर यूक्रेन में कोई भी सैनिक आता है, खासकर ऐसे समय में जब लड़ाई अपने चरम पर है, तो हम उन्हें वैध लक्ष्य मानेंगे." उन्होंने शांति बलों की तैनाती की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया और दोहराया कि रूस किसी अंतिम शांति समझौते का सम्मान करेगा।. लेकिन जब तक युद्ध जारी है, तब तक किसी भी विदेशी सैनिक की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का प्रस्ताव

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दरअसल, पुतिन की यह प्रतिक्रिया फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बयान के बाद आई है. मैक्रों ने पेरिस में हुई 35 देशों की बैठक के बाद कहा था कि यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 26 देशों ने सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता जताई है. उन्होंने बताया कि ये सैनिक युद्धविराम या किसी शांति समझौते के बाद 'रिअश्योरेंस फोर्स' यानी भरोसा दिलाने वाले बल के रूप में तैनात किए जाएंगे. यानी यूरोपीय देश यह संकेत दे रहे थे कि युद्ध समाप्त होने के बाद वे यूक्रेन में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं. लेकिन पुतिन का बयान यह साफ करता है कि रूस इस विचार को पूरी तरह खारिज करता है और किसी भी प्रकार की विदेशी सैन्य उपस्थिति को अस्वीकार्य मानता है.

रूस की क्या है मुख्य मांग?

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रूस लगातार कहता आया है कि नाटो या किसी भी अंतरराष्ट्रीय शांति बल की मौजूदगी उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है. पुतिन ने जोर देकर कहा कि शांति समझौते की स्थिति में रूस और यूक्रेन दोनों की सुरक्षा गारंटी बेहद जरूरी होगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूस अपनी सीमाओं और सैन्य हितों को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं करेगा. इस बयान से यह साफ होता है कि रूस यूक्रेन युद्ध में किसी बाहरी हस्तक्षेप को युद्ध विस्तार की सीधी कोशिश मानता है. यही कारण है कि पुतिन ने बेहद आक्रामक अंदाज में विदेशी सैनिकों को 'वैध निशाना' कहकर चेतावनी दी.

रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि

इस पूरे विवाद को समझने के लिए युद्ध की पृष्ठभूमि पर नजर डालना जरूरी है. फरवरी 2014 में रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद डोनबास क्षेत्र में रूस समर्थक विद्रोहियों और यूक्रेनी सेना के बीच लगातार झड़पें होती रहीं. इसी तरह 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला किया. इसे रूस की .विशेष सैन्य कार्रवाई' कहा गया लेकिन वास्तव में यह व्यापक युद्ध साबित हुआ. पिछले लगभग साढ़े तीन साल में हजारों लोग मारे गए और लाखों विस्थापित हुए. यूरोप और अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य व आर्थिक मदद दी, जबकि रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए. ऐसे में इस युद्ध ने सिर्फ पूर्वी यूरोप ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है. ऊर्जा संकट, अनाज आपूर्ति की समस्या और रक्षा खर्च में बढ़ोतरी इसके बड़े परिणाम हैं.

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कैसी है युद्ध की वर्तमान स्थिति 

अब जबकि यूक्रेन पश्चिमी देशों से लगातार हथियार और मदद प्राप्त कर रहा है, रूस किसी भी अतिरिक्त हस्तक्षेप को सीधी चुनौती मानता है. पुतिन का यह कहना कि 'विदेशी सैनिक वैध निशाने होंगे' इस बात का संकेत है कि रूस न केवल लड़ाई जारी रखने को तैयार है बल्कि यूरोप के देशों को भी कड़ा संदेश देना चाहता है. वहीं यूरोपीय नेता यह मानते हैं कि यूक्रेन की सुरक्षा के बिना यूरोप की स्थिरता असंभव है. यही वजह है कि वे शांति मिशन की चर्चा कर रहे हैं. लेकिन रूस की असहमति इस संभावना को बेहद कठिन बना देती है.

वैश्विक राजनीति पर असर

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पुतिन का बयान सिर्फ यूक्रेन के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है. यदि युद्ध के बीच विदेशी सैनिक भेजे जाते हैं तो यह टकराव सीधे नाटो और रूस को आमने-सामने ला सकता है. ऐसा होने पर यह युद्ध सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संघर्ष में बदल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल किसी भी तरह का शांति समझौता आसान नहीं है. रूस अपनी मांगों पर अड़ा है और यूक्रेन अपनी संप्रभुता को किसी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं है. पश्चिमी देश भी पीछे हटने की स्थिति में नहीं दिख रहे. ऐसे में हालात और जटिल हो सकते हैं.

बताते चलें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह बयान यूरोप और पूरी दुनिया के लिए गहरी चेतावनी है. यह केवल यूक्रेन की जंग तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाला मोड़ साबित हो सकता है. विदेशी सैनिकों की मौजूदगी अगर युद्ध के बीच होती है तो यह सीधा टकराव खतरनाक रूप ले सकता है.

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फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले महीनों में रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता कितनी आगे बढ़ती है. लेकिन इतना तय है कि पुतिन का यह बयान दुनिया को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या यह युद्ध थमेगा या और फैल जाएगा.

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