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बांग्लादेश की अक्ल ठिकाने आई... ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर हुआ निर्भर, खरीदेगा 1,80,000 टन डीजल

भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव के बावजूद बांग्लादेश ने भारत से डीजल आयात का फैसला लिया है. बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन 2026 के लिए नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से 1.80 लाख मीट्रिक टन डीजल खरीदेगा. इस आयात की अनुमानित लागत 14.62 अरब टका होगी.

बांग्लादेश की अक्ल ठिकाने आई... ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर हुआ निर्भर, खरीदेगा 1,80,000 टन डीजल
NRL Refinery
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भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हालात को लेकर काफी चर्चा है. अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ हुई हिंसक घटनाओं के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तल्खी देखने को मिल रही है. बावजूद इसके, ऊर्जा जरूरतों के मामले में बांग्लादेश की निर्भरता भारत पर बनी हुई है. ताजा घटनाक्रम इसी सच्चाई की पुष्टि करता है, जहां बांग्लादेश ने भारत से बड़ी मात्रा में डीजल आयात करने का फैसला लिया है.

कितना डीजल लेगा बांग्लादेश?

बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) ने भारत की सरकारी तेल कंपनी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) से 1 लाख 80 हजार मीट्रिक टन डीजल आयात करने का निर्णय लिया है. यह सौदा वर्ष 2026 के लिए तय किया गया है. इस आयात की कुल अनुमानित लागत करीब 14.62 अरब टका बताई जा रही है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार घट-बढ़ सकती है. यह फैसला 6 जनवरी को ढाका में हुई सरकारी खरीद सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने की.सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस डीजल आयात का जिम्मा पूरी तरह बीपीसी के पास होगा. भुगतान का एक हिस्सा बीपीसी अपने बजट से करेगी, जबकि बाकी रकम बैंक लोन के जरिए जुटाई जाएगी. आयात लागत नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) के साथ बातचीत के बाद तय की गई है. असम में स्थित यह रिफाइनरी ऑयल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी है और भारत की प्रमुख सरकारी रिफाइनरियों में गिनी जाती है.

कितने रक़म की हुई डील?

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इस सौदे की कुल वैल्यू 119.13 मिलियन डॉलर रखी गई है. यह कीमत 83.22 डॉलर प्रति बैरल की बेस रेट पर 5.50 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम के आधार पर तय की गई है. हालांकि अंतिम लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों पर निर्भर करेगी. बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन सलाहकार मुहम्मद फौजुल कबीर खान ने स्पष्ट किया कि यह आयात पिछले सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षरित 15 वर्षीय दीर्घकालिक समझौते के तहत किया जा रहा है.

बांग्लादेश कैसे पहुंचेगा डीजल  

डीजल की आपूर्ति का रास्ता भी खासा अहम है. नुमालीगढ़ रिफाइनरी से डीजल पहले सिलीगुड़ी पहुंचाया जाता है और वहां से भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश भेजा जाता है. यह पाइपलाइन वर्ष 2022-23 में चालू हुई थी. इसके शुरू होने से पहले डीजल की आपूर्ति रेलवे वैगनों के जरिए होती थी, जिसमें ज्यादा समय और खर्च लगता था. पाइपलाइन के जरिए अब परिवहन लागत में कमी आई है और सप्लाई भी ज्यादा तेज हो गई है. ऊर्जा जानकरों की माने तो यह पाइपलाइन दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग का मजबूत प्रतीक बन चुकी है. बांग्लादेश की सालाना डीजल मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है और भारत उसके लिए एक भरोसेमंद स्रोत बना हुआ है. राजनीतिक मतभेद, सीमा विवाद और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों के बावजूद ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार जारी रहना इस बात का संकेत है कि आर्थिक जरूरतें अक्सर राजनीतिक तनाव से ऊपर होती हैं.

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बताते चलें कि भारत से डीजल आयात का यह फैसला बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है. यह यह भी दिखाता है कि कूटनीतिक तनाव के दौर में भी दोनों देश व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर सहयोग बनाए रखने को मजबूर हैं. ऊर्जा के मोर्चे पर यह साझेदारी आने वाले समय में भी दोनों देशों के रिश्तों में एक स्थिर कड़ी बनी रह सकती है.

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