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Axiom-4 Launch: लॉन्च पैड 39A फिर बना ऐतिहासिक उड़ान का साक्षी, शुभांशु शुक्ला ने जोड़ा गौरव का नया अध्याय

Axiom Mission-4 के तहत ड्रैगन कैप्सूल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए सफलतापूर्वक रवाना हो गया है. यह ऐतिहासिक लॉन्च नासा के प्रतिष्ठित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39A से भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे हुआ. 39A वही लॉन्च पैड है, जहां से साल 1969 में अपोलो 11 मिशन के तहत नील आर्मस्ट्रांग और उनके साथी चंद्रमा की ओर रवाना हुए थे. अब, इसी ऐतिहासिक स्थल से एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री की उड़ान भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कदमों की प्रतीक बन गई है.

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25 जून 2025 भारत के अंतरिक्ष इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है. भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को लेकर Axiom Mission-4 के तहत ड्रैगन कैप्सूल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए सफलतापूर्वक रवाना हो गया है. यह ऐतिहासिक लॉन्च नासा के प्रतिष्ठित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39A से भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे हुआ.

दरअसल, 39A वही लॉन्च पैड है, जहां से साल 1969 में अपोलो 11 मिशन के तहत नील आर्मस्ट्रांग और उनके साथी चंद्रमा की ओर रवाना हुए थे. अब, इसी ऐतिहासिक स्थल से एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री की उड़ान भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कदमों की प्रतीक बन गई है. Axiom-4 मिशन भारत के लिए न सिर्फ गौरव का पल है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है.

क्या है कैनेडी स्पेस सेंटर और लॉन्च पैड 39A?
कैनेडी स्पेस सेंटर अमेरिका के फ्लोरिडा के मेरिट द्वीप पर स्थित है. इसे साल 1962 में नासा के मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियानों के लिए स्थापित किया गया था. स्पेस सेंटर में दो प्रमुख लॉन्च पैड हैं 39A और 39B. इनमें से 39A को खास ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है. यहीं से अपोलो-11 मिशन लॉन्च हुआ था, जिसने मानव को पहली बार चंद्रमा पर पहुंचाया. इसके अलावा स्पेस शटल कार्यक्रम और अब स्पेसX के कई मिशनों का प्रक्षेपण भी यहीं से होता है. अब इसी लॉन्च पैड से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरे. यह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग की दिशा में भी एक बड़ा कदम है.

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इतिहास का पहला कदम, नील आर्मस्ट्रांग की चंद्रमा यात्रा
16 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन लॉन्च हुआ था. इस मिशन में नील आर्मस्ट्रांग, बज़ एल्ड्रिन और माइकल कॉलिन्स सवार थे. लॉन्च पैड 39A से उड़ान भरने के चार दिन बाद, नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पहला कदम रखकर इतिहास रच दिया. उन्होंने कहा था, "यह मेरे लिए एक छोटा कदम है, लेकिन मानवता के लिए एक बड़ी छलांग." इस पल ने पृथ्वी पर करोड़ों लोगों की सोच और सपनों की दिशा बदल दी.

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मिशन अपोलो यही से हुआ था लॉन्च
लॉन्च पैड 39A और 39B का निर्माण खासतौर पर अपोलो प्रोग्राम के लिए किया गया था. 1967 से 1973 के बीच सभी अपोलो मिशनों जो चंद्रमा की यात्रा के लिए बनाए गए थे. उनको यहीं से लॉन्च किया गया. इसके बाद, यहीं से अमेरिका का पहला अंतरिक्ष स्टेशन और अपोलो-सोयूज़ टेस्ट प्रोजेक्ट भी लॉन्च हुए, जिसमें पहली बार अमेरिका और सोवियत संघ ने साथ मिलकर अंतरिक्ष में मिशन चलाया.

स्पेस शटल कार्यक्रम 
1981 से 2011 तक, लॉन्च पैड 39 ने स्पेस शटल प्रोग्राम के तहत 135 से अधिक मिशनों की मेजबानी की. यहीं से डिस्कवरी, अटलांटिस, एंडेवर और चैलेंजर जैसे स्पेस शटल्स रवाना हुए. इस दौर ने अंतरिक्ष में मानव की उपस्थिति को स्थायी बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाई.

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निजी कंपनियों की नई उड़ान
2008 में, स्पेसएक्स ने लॉन्च पैड 39A को लीज पर लिया. इसके बाद इस स्थल को फाल्कन 9 और फाल्कन हेवी रॉकेट्स के लिए तैयार किया गया. आज यह लॉन्च पैड निजी अंतरिक्ष अभियानों और अंतरराष्ट्रीय मिशनों का प्रमुख केंद्र बन चुका है. Axiom Mission-4 भी इसी सिलसिले की अगली कड़ी है, जिसमें भारत की भागीदारी भी शामिल हो गई है.

क्यों खास है Ax-4 मिशन?
Axiom Space का यह चौथा मिशन है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुने गए अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं. इस मिशन में शुभांशु शुक्ला की भागीदारी भारत के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. आज जब शुभांशु इस ऐतिहासिक स्थल से अपनी यात्रा शुरू की है, तो यह पल भारत के लाखों लोगों के लिए गर्व का पल बना. भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे पर लॉन्च हुआ. खबर लिखे जाने तक ड्रैगन कैप्सूल 7000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से पहला एबॉर्ट मोड सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, चालक दल अब एबॉर्ट मोड 2 अल्फा में प्रवेश कर चुका है, जो उड़ान के इस चरण के लिए एक मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल है. फिलहाल सभी सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं. मिशन कक्षा की ओर अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है. 

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ISS पर करेंगे खास वैज्ञानिक प्रयोग
बताते चलें कि Axiom-4 मिशन में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ISRO का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उनके साथ NASA की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री डॉ. पैगी व्हिटसन, ESA के स्लावोज उज़्नान्स्की (पोलैंड) और हंगरी के टिबोर कापू शामिल हैं. यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए ऐतिहासिक है. ड्रैगन यान को ISS तक पहुंचने में करीब 28 घंटे लगेंगे. वहां 14 दिन के प्रवास के दौरान सभी अंतरिक्ष यात्री विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयोग करेंगे. शुभांशु शुक्ला भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और NASA के सहयोग से विकसित पोषण संबंधी प्रयोगों का संचालन करेंगे, जो भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.

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