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चिनाब नदी का पानी रोकते ही सूखने लगा पाकिस्तान का गला, 24 शहरों में 3 करोड़ लोगों पर जल संकट का मंडराया बड़ा खतरा
पाकिस्तान जाने वाले चिनाब नदी के पानी का वाटर लेवल घटकर 2 फीट तक आ गया है. भारत सरकार द्वारा कई नदियों का पानी रोके जाने की वजह से पाकिस्तानियों का गला सूखना शुरू हो चुका है. सभी एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं.
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पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत पूरी तरीके से तैयार है. 7 मई को देश के करीब 244 जिलों में मॉक ड्रिल के जरिए युद्ध से बचने के सलाह दिए जाएंगे. इसके लिए सरकार ने सभी राज्यों को अपनी तरफ से सूचना जारी कर जिलों की लिस्ट भी घोषित कर दी है. आतंकी हमले के 24 घंटे बाद ही भारत लगातार पाकिस्तान को सबक सिखा रहा है. इनमें भारत का सबसे बड़ा फैसला सिंधु जल संधि को रद्द करना था. लेकिन सरकार ने अब चिनाब नदी का भी पानी रोक दिया है. सरकार ने सियाल और बगलिहार बांध के गेट को बंद कर दिया है. इस बीच खबर आई है कि भारत द्वारा लिए गए फैसले से पाकिस्तान का गला सूखना शुरू हो चुका है. हालात ऐसे बन गए हैं कि इस नदी से एक बूंद भी पानी पाकिस्तान नहीं पहुंच रहा है. पाकिस्तान में जल संकट का बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
पाकिस्तान का गला सूखा, सिर्फ 2 फीट बचा पानी
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पाकिस्तान जाने वाला चिनाब नदी के पानी का वाटर लेवल घटकर 2 फीट तक आ गया है. बीते दिनों पहाड़ों पर ज्यादा बारिश होने की वजह से पानी जमा हो गया था. जिसकी वजह से सालार के कई गेटों को खोल दिया गया था. लेकिन अब एक बार फिर से सरकार ने पाकिस्तान जाने वाले पानी पर पूरी तरीके से रोक लगा दी है. दूसरी तरफ रामबन के बगलिहार बांध का गेट बंद होने की वजह से चिनाब नदी का बहाव कम हो गया है. कई एक्सपर्ट्स ने बताया है कि पानी रोकने की वजह से कृषि और कई अन्य चीजें प्रभावित हो सकती हैं. इससे वहां के पर्यावरण पर भी असर पड़ेगा. कभी यहां का जलस्तर 25 से 30 फीट तक पहुंच जाता था. जो अब घटकर 2 फीट पर आ गया है. यहां पानी की कमी होने के कारण पथरीली जमीन और पत्थर साफ दिखाई दे रहे हैं.
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24 शहरों में 3 करोड़ लोग हुए प्रभावित
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चिनाब नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है. जिसकी वजह से इसका असर दिखना शुरू हो चुका है. भारत सरकार द्वारा पानी रोकने की वजह से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के 24 शहरों में 3 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं. यहां के लोगों को एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है. बता दें कि पाकिस्तान के फैसलाबाद और हाफिजाबाद के अधिकतर घनी आबादी वाले क्षेत्र इसी चिनाब नदी के पानी पर ही निर्भर हैं.
पाकिस्तान की फसले भी हो रहीं बर्बाद
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भारत ने पाकिस्तान की तरफ जाने वाली कई नदियों के पानी को पर रोक लगाई है. जिसके बाद पाकिस्तान में गहरा जल संकट का खतरा मंडरा रहा है. इसको लेकर इस्लामाबाद की सिंधु नदी अथॉरिटी ने गहरी चिंता जताई है कि "इससे पाकिस्तान की खरीफ फसल में 21 प्रतिशत की गिरावट आएगी. कई फसलों को भारी नुकसान होगा. उन्होंने चिंता जाहिर की है कि अगर भारत अपनी तरफ से नदियों पर कंट्रोल बनाए रखता है तो पाकिस्तान को पानी की ज्यादा कमी हो सकती है. हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से हर रोज पानी की मॉनिटरिंग की जा रही है."
अचानक से पानी छोड़ने पर बाढ़ का खतरा
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भारत सरकार ने अपनी नदियों से बहने वाले पानी पर जो प्रतिबंध लगा रखा है उस कारण पाकिस्तान के सामने दो बड़ी चुनौती है, इसमें फसल की बर्बादी और पानी रोकना है. पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने जिस पानी रोक रखा है उसे वह हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और बांधों के लिए इस्तेमाल कर रहा है. अगर उसने 4-5 दिन के बाद पानी छोड़ा भी तो नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ आने का भी खतरा है. अगर उसने यह काम बिना पूर्व चेतावनी के किया तो मामला और भी ज्यादा खराब हो सकता है. जानकारी के लिए बता दें कि पिछले दिनों भी भारत ने भारी बारिश की वजह से सालार नदी का पानी छोड़ा था. इसके बाद पाकिस्तान में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे. POK के कई निचले इलाकों में सरकार ने अलर्ट जारी किया गया था.
पाकिस्तान की 80 प्रतिशत खेती भारतीय नदियों पर निर्भर
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साल 1960 में सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच 6 नदियों के पानी को बांटने का समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत भारत को 3 पूर्वी नदियों में रावी, ब्यास और सतलुज का अधिकार मिला था. दूसरी तरफ पाकिस्तान को सिंधु, झेलम, चिनाब नदी के पानी का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई थी. पाकिस्तान को जिन नदियों का अधिकार मिला था. उसी जल से पाकिस्तान की 80% खेती होती है. एक तरीके से कहा जाए, तो पूरा पाकिस्तान इसी जल पर निर्भर है. लेकिन भारत ने इन तीनों नदियों के पानी पर रोक लगा दिया है. ऐसे में वहां की आर्थिक हालात बिगड़ेगी. पाकिस्तान इस जल का उपयोग डैम और हाइड्रो पावर बनाने में भी करता है. ऐसे में वहां की आर्थिक और औद्योगिक गतियों पर भी बड़ा असर पड़ेगा.