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इजरायल-ईरान में फंसा रहा अमेरिका, इधर जापान ने अपनी धरती पर पहली बार कर डाली मिसाइल की टेस्टिंग, उत्तर कोरिया और चीन है कारण?

जापान ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. इसने पहली बार अपने क्षेत्र में मिसाइल की टेस्टिंग की. यह टेस्टिंग होक्काइडो द्वीप के शिजुनाई एंटी-एयर फायरिंग रेंज में की गई. ये टाइप-88 सरफेस टू शिप पर अटैक करने वाली शॉर्ट डिस्टेंस मिसाइल है.

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इजरायल-ईरान का मामला अभी ढंग से सलटा भी नहीं था कि उधर जापान ने भी खेला कर दिया. अमेरिका इजरायल-ईरान में उलझा रहा और उधर 24 जून को ही जापान ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. इसने पहली बार अपने क्षेत्र में मिसाइल की टेस्टिंग की. यह टेस्टिंग होक्काइडो द्वीप के शिजुनाई एंटी-एयर फायरिंग रेंज में की गई. ये टाइप-88 सरफेस टू शिप पर अटैक करने वाली शॉर्ट डिस्टेंस मिसाइल है. जो जापान ने अपने को दुश्मनों से बचाने के लिए और चीन को घेरने के लिए टेस्ट की है.

कौन-सी है टाइप-88 मिसाइल
टाइप 88 सतह से जहाज तक मार करने वाली मिसाइल (SSM-1 ) एक ट्रक पर लगाई जाने वाली जहाज रोधी मिसाइल है. इसे साल 1980 के दशक के अंत में जापान की मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज ने बनाया था. पहले यह मिसाइल हवा में लॉन्च होती थी, बाद में इसे जहाज से लांच करने की जाने वाली टाइप 90 (SSM-1B) मिसाइल के रूप में विकसित किया गया. इसमें कम रीलोड समय, कम लाइफ-साइकल कोस्ट और 200 किमी की सीमा भी है.

सैन्य ताकत बढ़ाने में बड़ा कदम
जापान ने अपनी शांतिवादी नीति को छोड़कर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में ये बड़ा कदम उठाया है. शिज़ुओका प्रान्त के हिगाशी-फूजी प्रशिक्षण क्षेत्र में फूजी 2025 लाइव फायर अभ्यास हुआ. जापान ने HVGP हाइपरसोनिक मिसाइल और टाइप 12 सतह-से-जहाज मिसाइल का प्रदर्शन किया. एशियन मिलिट्री रिव्यू के अनुसार यह HVGP मिसाइल 2018 से विकास के दौर में थी. इसका पहला सफल परीक्षण 2024 में अमेरिका में हुआ. जापान ने ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स की पहली आर्टिलरी ब्रिगेड ने इस एक्सरसाइज में हिस्सा लिया. जिसमें करीब 300 सैनिक शामिल थे. सैनिकों ने होक्काइडो के दक्षिणी तट से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक मानवरहित नाव पर निशाना साधा. जापानी अधिकारियों ने बताया कि इस टेस्टिंग के परिणामों की जांच अभी जारी है.

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जापान ने रक्षा नीति बदली, डिफेंसिव से अटैकिंग का किया रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जापान की रक्षा नीति में बदलाव का संकेत देता है. जो अब डिफेंसिव से अटैकिंग रुख की ओर बढ़ रहा है. जापान की ये मिसाइल टेस्टिंग क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक ऐतिहासिक कदम है. आने वाले समय में जापान की सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय समीकरणों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है.

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