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कभी भारत से पाकिस्तान को बचाने के लिए अमेरिका ने ईरान से मांगी थी मदद, अब उसी पर हमला कर घोंपा खंजर, क्या है 1971 युद्ध का किस्सा?

अमेरिका के डिसक्लासिफाइड स्टेट डिपार्मेंट दस्तावेजों के मुताबिक, साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान को बचाने के लिए ईरान से मदद मांगी थी. उस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर भीषण हवाई हमले किए थे. जिसके चलते पाकिस्तान का ईंधन भंडार पूरी तरीके से नष्ट हो चुका था. पाकिस्तान सेना ने उस वक्त अपने आप को अपंग मान लिया था, लेकिन अब उसी अमेरिका ने ईरान पर हमला कर खंजर घोपने का काम किया है. क्या है 1971 भारत- पाकिस्तान युद्ध के दौरान ईरान-अमेरिका के बातचीत की कहानी?

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22 जून को अमेरिका ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बम वर्षक हमले किए. इस हमले के बाद साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध का एक दिलचस्प मामला भी सामने आया. उस दौरान अमेरिका ने ईरान से भारत से चल रहे युद्ध के दौरान पाकिस्तान की मदद के लिए गुहार लगाई थी. वहीं वर्तमान में इजरायल से चल रहे युद्ध से पहले ईरान-अमेरिका के रिश्ते काफी मजबूत और सामान्य रहे हैं. ईरान की अमेरिका से परमाणु डील की भी चर्चा काफी करीब पहुंच चुकी थी, लेकिन इसी बीच इजरायल ने ईरान पर हमला कर उसके डील के अरमानों पर पानी फेर दिया. ईरान पर इजरायल और अमेरिका दोनों एक साथ मिलकर लगातार हमले कर रहे हैं. 

पाकिस्तान के लिए अमेरिका ने ईरान से की मदद की मांग 

एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के डिसक्लासिफाइड स्टेट डिपार्मेंट दस्तावेजों के हवाले से लिखा गया है कि साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान को बचाने के लिए ईरान से मदद मांगी थी. उस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर भीषण हवाई हमले किए थे. जिसके चलते पाकिस्तान का ईंधन भंडार पूरी तरीके से नष्ट हो चुका था. पाकिस्तान सेना ने भी अपने आप को अपंग मान लिया था. इन हालातों को देखते हुए 9 दिसंबर 1971 को वाशिंगटन में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर ने की थी.

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ईरान के तत्कालीन शासक ने पाक की मदद से कर दिया था इंकार 

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अमेरिकी अधिकारियों ने 8 दिसंबर 1971 को ईरान के तत्कालीन शासक शाह मोहम्मद रजा पहलवी से मुलाकात कर पाकिस्तान की मदद का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि वह भारत-सोवियत संघ के मद्देनजर प्रत्यक्ष रूप से सैन्य सहायता नहीं दे सकते हैं. बता दें कि उस युद्ध के दौरान हालात ऐसे बन गए थे कि सिर्फ 10 से 15 दिनों के अंदर ही पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना खत्म हो चुकी थी. वहीं पश्चिम क्षेत्र में भी स्थिति काफी नाजुक थी. 

जॉर्डन ने एफ-104 लड़ाकू विमान पाकिस्तान भेजे थे

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अमेरिकी अधिकारियों के आग्रह पर साल 1971 में ईरान के तत्कालीन शासक ने पाकिस्तान को किसी भी मदद से इनकार कर दिया था, हालांकि, वैकल्पिक प्रस्ताव के रूप में बतौर मदद के लिए एफ-104 लड़ाकू विमान पाकिस्तान भेजा था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते यह भी संभव नहीं हो पाया था. 

सिर्फ 10 से 15 दिनों में खत्म हो जाती पूरी पाक सेना 

पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना पूरी तरीके से कट चुकी थी. अमेरिकी अधिकारियों ने उस दौरान बताया था कि हालात ऐसे थे कि 10 से 15 दिन लड़ाई अगर और चलती, तो पूरी पाक सेना खत्म हो जाती. भारत से लंबे युद्ध में फंसने की वजह से पाकिस्तान की सेना और अर्थव्यवस्था दोनों पूरी तरीके से ढह जाते. 

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चीनी और अमेरिकी सैनिक को भी सीमा पर लगाने की थी योजना

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भारत पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने दो तरीके की रणनीति अपनाई थी. पहला यह था कि चीनी सेना को भारत की सीमा पर सक्रिय करना और दूसरा अमेरिकी सेना के 7वें बेड़े को बंगाल की खाड़ी में भेजना था. 

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