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ट्रंप की धमकी से डरे खामेनेई अंडरग्राउंड शेल्टर में छिपे, तीसरे बेटे को सौंपी ईरान की कमान; मिडिल ईस्ट में बढ़ी अमेरिकी सैन्य हलचल

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच बड़े टकराव की आशंका गहराती दिख रही है. संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को देखते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को तेहरान के एक अंडरग्राउंड शेल्टर में शिफ्ट किया गया है.

Ali Khamenei (File Photo)
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मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को तेहरान में एक विशेष अंडरग्राउंड शेल्टर में शिफ्ट कर दिया गया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका को बेहद गंभीर माना जा रहा है.

अंडरग्राउंड हुए खामेनेई

ईरान सरकार के करीबी दो सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों ने अमेरिकी हमले की संभावना को वास्तविक खतरे के रूप में आंका है. इसी के बाद खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्हें भूमिगत ठिकाने में ले जाने का फैसला किया गया. रिपोर्ट्स के अनुसार खामेनेई ने अपने एक बेटे को कार्यकारी कमान भी सौंप दी है, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान नेतृत्व किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है.

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खामेनेई के तीसरे बेटे संभाल रहे कमान 

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ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह अंडरग्राउंड सुविधा बेहद मजबूत और अत्यधिक सुरक्षित है. इसमें कई आपस में जुड़े सुरंगनुमा रास्ते हैं, जिससे किसी भी हमले की स्थिति में सुरक्षित आवाजाही संभव हो सके. सूत्रों का कहना है कि खामेनेई के तीसरे बेटे मसूद खामेनेई फिलहाल सुप्रीम लीडर कार्यालय के दैनिक संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. वही सरकार की कार्यकारी शाखाओं और सुरक्षा तंत्र के बीच मुख्य संपर्क सूत्र बने हुए हैं.

अमेरिका ने तेज की सैन्य तैयारी

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दूसरी ओर अमेरिका ने भी मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को तेज कर दिया है. अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली USS Abraham Lincoln Carrier Strike Group इस समय हिंद महासागर में तैनात है. जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्ट्राइक ग्रुप अरब सागर या फारस की खाड़ी तक पहुंच सकता है. इस समूह में USS Spruance, USS Frank E. Petersen Jr. और USS Michael Murphy जैसे अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो किसी भी बड़े सैन्य अभियान में अहम भूमिका निभा सकते हैं. एयर पावर की बात करें तो यह स्ट्राइक ग्रुप बेहद मजबूत माना जा रहा है. इसमें F-35C स्टील्थ फाइटर जेट्स और F/A-18E सुपर हॉर्नेट जैसे घातक विमान शामिल हैं. इसके अलावा अमेरिका ने F-15E Strike Eagles और ब्रिटेन ने अपने Typhoon फाइटर जेट्स भी क्षेत्र में तैनात किए हैं. यह तैनाती साफ तौर पर शक्ति प्रदर्शन और रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है.

अमेरिका भी ईरान से सतर्क 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस सैन्य तैनाती को एहतियाती कदम बताया है. उनका कहना है कि इसका मकसद ईरान को किसी भी तरह के उकसावे से रोकना है. खासतौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आंतरिक प्रदर्शनों पर की जा रही कार्रवाई को लेकर अमेरिका की चिंता लगातार बढ़ती रही है. ट्रंप पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा तल्ख हो गए हैं.

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बताते चलें कि वहीं ईरान ने भी अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अगर अमेरिका ने कोई भी सैन्य हमला किया, चाहे वह सीमित ही क्यों न हो, तो उसे ऑल-आउट वॉर माना जाएगा. इसी वजह से ईरान ने अपनी सभी सुरक्षा और सैन्य इकाइयों को हाई अलर्ट पर रखा है. खामेनेई के अंडरग्राउंड शेल्टर में जाने की खबर को विशेषज्ञ बढ़ते खतरे और आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने के संकेत के तौर पर देख रहे हैं.

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