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चीन में जन्मदर गिरने से क्यों बंद हो गए 14,000 से अधिक किंडरगार्टन, बढ़ती बुजुर्ग आबादी का कारण क्या है?

चीन में जन्म दर में हो रही निरंतर गिरावट ने देश को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में ला खड़ा किया है। चीन, जो कभी अपनी जनसंख्या नीति के कारण चर्चा में रहा, अब तेजी से कम होती जन्म दर का सामना कर रहा है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि चीन में जन्म दर क्यों घट रही है, इसके क्या प्रभाव हो सकते हैं, और भारत व अन्य देशों की स्थिति क्या है?

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चीन में जन्म दर लगातार घट रही है, जो अब चीन के भविष्य के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। चीन में यह स्थिति न केवल सामाजिक बल्कि आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी चिंता का विषय बनी हुई है। 2021 में, चीन की जन्म दर प्रति 1000 व्यक्तियों पर केवल 7.52 रह गई, जो 1950 के दशक के बाद सबसे कम है। अब चीन में जन्म दर कितनी गिर चुकी है इस बात का अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं, कि चीन में कई किंडरगार्टन स्कूलों को बंद करना पड़ा।

जन्मदर गिरने से किंडरगार्टन पर असर

2023 की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, चीन में पिछले वर्ष लगभग 14,808 किंडरगार्टन बंद कर दिए गए, जिससे उनकी संख्या घटकर 2,74,400 हो गई। यह दूसरा वर्ष है जब चीन में किंडरगार्टन की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। ये गिरावट केवल संख्या में ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और स्थिरता पर भी असर डाल रही है। कई किंडरगार्टन मालिकों का मानना है कि बच्चों की कम संख्या के कारण वे अपने संस्थानों को आर्थिक रूप से संभालने में असमर्थ हैं। माता-पिता के द्वारा नए बच्चों को भेजने में रुचि न दिखाने के कारण, इन किंडरगार्टनों के पास छात्रों की कमी है। इसी कारण उन्हें मजबूर होकर अपने दरवाजे बंद करने पड़ रहे हैं। 

चीन में जन्म दर की कमी के कारण बच्चों की संख्या घट रही है, तो वहीं दूसरी ओर देश में बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, चीन में 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या में हर साल वृद्धि हो रही है, जिससे वृद्धाश्रमों की माँग भी बढ़ गई है। कई पूर्व किंडरगार्टनों को अब वृद्धाश्रम में बदल दिया जा रहा है। चीन के एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि देश के कई क्षेत्रों में किंडरगार्टन की जगह वृद्धाश्रम खोले जा रहे हैं, जिससे न केवल बुजुर्गों को एक सुरक्षित वातावरण मिल सके बल्कि उनके जीवन को भी बेहतर बनाया जा सके।

चीन की गिरती जन्म दर के कारण

चीन में 1979 में लागू की गई वन चाइल्ड पॉलिसी का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना था। हालांकि, इस नीति के चलते जन्म दर में लगातार गिरावट आई। 2016 में इस नीति को समाप्त कर दो बच्चों की अनुमति दी गई, लेकिन इसका वांछित असर नहीं पड़ा।

शिक्षा और करियर के प्रति बढ़ती जागरूकता ने लोगों को परिवार बढ़ाने से रोक रखा है। युवा चीनियों में आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत विकास की प्राथमिकता अधिक है, जिसके कारण वे देर से शादी करते हैं और बच्चों को जन्म देने से कतराते हैं।

चीन के शहरी क्षेत्रों में घर, स्वास्थ्य, और शिक्षा की बढ़ती कीमतों के कारण लोगों के लिए परिवार का खर्च उठाना कठिन हो गया है। इस स्थिति में बहुत से लोग बच्चों की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं।

चीन में महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं के अलावा करियर में आगे बढ़ रही हैं। करियर और परिवार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती के कारण कई महिलाएं मां बनने का निर्णय टाल रही हैं।

चीन में गिरती जन्म दर के प्रभाव

आर्थिक दबाव और श्रम संकट: घटती जन्म दर का मतलब है कि आने वाले वर्षों में कार्यबल की कमी होगी। श्रमशक्ति के कमी के कारण चीन की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और देश को उत्पादकता बनाए रखने के लिए विदेशी श्रमिकों पर निर्भर होना पड़ेगा।

वृद्ध जनसंख्या का बढ़ता अनुपात:  जन्म दर में गिरावट से वृद्धों की संख्या बढ़ती जा रही है। अधिक उम्र के लोग संसाधनों पर अधिक निर्भर होते हैं, जिसके चलते स्वास्थ्य देखभाल और पेंशन पर दबाव बढ़ेगा। इससे सामाजिक सेवाओं पर भी वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

अर्थव्यवस्था में धीमापन: घटती जनसंख्या के कारण उपभोक्ता मांग में कमी हो सकती है। इससे चीन की आंतरिक बाजार में स्थिरता में भी कमी आ सकती है, जो कि लंबे समय तक विकास के लिए नुकसानदायक है।

हालांकि चीन सरकार ने हाल के वर्षों में तीन बच्चों की नीति लागू की है, ताकि परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इसके अलावा, बच्चों की देखभाल के लिए आर्थिक मदद, माता-पिता की छुट्टियां, और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के प्रयास भी किए जा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों का असर तुरंत दिखाई नहीं देगा और इसके लिए एक लंबा समय लग सकता है।

भारत समेत दूसरे देशों का हाल

जन्म दर में गिरावट न केवल चीन में बल्कि जापान, दक्षिण कोरिया, और कई यूरोपीय देशों में भी देखने को मिल रही है। भारत में हालांकि अभी जन्म दर स्थिर है, लेकिन शहरीकरण, शिक्षा, और आर्थिक दबावों के कारण भारत भी निकट भविष्य में ऐसे प्रभावों का सामना कर सकता है।

चीन की घटती जन्म दर उसके लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। इस संकट से निपटने के लिए चीन को अपनी नीतियों में व्यापक बदलाव करना होगा और लोगों को परिवार बढ़ाने के लिए प्रेरित करना होगा। जन्म दर में कमी का प्रभाव न केवल चीन, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जाएगा। भारत और अन्य देश इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें अपने सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत बनाना होगा।
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