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बच्चों के एडमिशन और आधार बनाने में अड़चन, 3.5 लाख पर असर; अब मैनुअल बर्थ सर्टिफिकेट मान्य नहीं, QR कोड वाला जरूरी

3.5 लाख बच्चों के दाखिले और आधार बनाने में परेशानी आ रही है क्योंकि मैनुअल बर्थ सर्टिफिकेट अब मान्य नहीं है. आधार और स्कूल एडमिशन के लिए अब QR कोड वाला बर्थ सर्टिफिकेट जरूरी है.

बच्चों के एडमिशन और आधार बनाने में अड़चन, 3.5 लाख पर असर; अब मैनुअल बर्थ सर्टिफिकेट मान्य नहीं, QR कोड वाला जरूरी
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छत्तीसगढ़ में करीब 3.5 लाख बच्चों के आधार कार्ड पर संकट मंडरा रहा है. आधार कार्ड के लिए अब केवल QR कोड वाले जन्म प्रमाण पत्र ही मान्य होंगे, जबकि पुराने दस्तावेजों पर बने आधार अब अमान्य हो सकते हैं. यह बदलाव केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान का हिस्सा है, लेकिन राज्य में लाखों परिवारों को परेशानी हो रही है. अभिभावक स्कूल एडमिशन, सरकारी योजनाओं और अन्य सेवाओं के लिए भागदौड़ कर रहे हैं. आइए जानते हैं इस मुद्दे की पूरी सच्चाई.

QR कोड क्यों जरूरी?

केंद्र सरकार ने हाल ही में आधार कार्ड जारी करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं. अब जन्म प्रमाण पत्र में QR कोड होना अनिवार्य है, जो जन्म विवरण को डिजिटल रूप से वेरीफाई करता है. छत्तीसगढ़ में 2024 से शुरू हुए इस नियम के तहत पुराने मैनुअल बर्थ सर्टिफिकेट अमान्य माने जा रहे हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले तीन सालों में बने 3.5 लाख से अधिक आधार कार्ड ऐसे हैं, जिनके आधार पर यह नया मानदंड लागू नहीं होता. इससे बच्चों को आधार रीजनरेशन के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है.

कौन हैं ये 3.5 लाख?

ये बच्चे मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों के हैं, जहां पुराने जन्म प्रमाण पत्र अभी भी प्रचलित हैं. रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे जिलों में सबसे ज्यादा प्रभावित परिवार हैं. एक सर्वे के मुताबिक, 70% से अधिक बच्चे 0-5 साल के हैं, जिनके आधार स्कूल एडमिशन और पोषण योजनाओं के लिए जरूरी हैं. अभिभावकों का कहना है कि वे नए सर्टिफिकेट बनवाने के लिए पंचायतों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन QR कोड जेनरेशन में देरी हो रही है. एक मां ने बताया, "हमारे गांव में अभी भी पुराना सिस्टम चलता है, अब बच्चे का आधार कैंसल हो गया तो आगे क्या होगा?"

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सरकारी कदम

छत्तीसगढ़ सरकार ने तत्काल कैंप लगाने का ऐलान किया है, जहां माता-पिता नए QR कोड वाले बर्थ सर्टिफिकेट बनवा सकेंगे. स्वास्थ्य विभाग और UIDAI के संयुक्त अभियान में 500 से अधिक सेंटर खोले गए हैं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, "यह बदलाव पारदर्शिता लाएगा, लेकिन हम अभिभावकों को राहत देंगे. " हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और जागरूकता की कमी से समस्या बढ़ सकती है. अगले महीने तक सभी प्रभावित आधार को अपडेट करने का लक्ष्य रखा गया है.

क्या हैं चुनौतियां?

अभिभावक न केवल समय और पैसे की बर्बादी का शिकार हो रहे हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. बिना आधार के स्कूलों में दाखिला मुश्किल हो गया है, और सरकारी सब्सिडी योजनाएं रुक गई हैं. एक NGO ने बताया कि आदिवासी इलाकों में 40% बच्चे इससे प्रभावित हैं. सरकार से पुराने दस्तावेजों को ट्रांजिशन पीरियड देने की मांग हो रही है. 

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डिजिटल इंडिया का दोहरा पहलू

यह संकट डिजिटल इंडिया की सफलता और चुनौतियों दोनों को दर्शाता है. एक तरफ QR कोड फर्जीवाड़े को रोकता है, वहीं दूसरी तरफ पुराने सिस्टम से जुड़े लोगों को परेशान कर रहा है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अभिभावक crsorgi.gov.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई करें. सरकार को चाहिए कि ट्रेनिंग कैंप बढ़ाए और हेल्पलाइन मजबूत करें. फिलहाल, लाखों परिवारों के लिए यह संकट जल्द खत्म होने की उम्मीद है.

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