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'भारत के लोकतंत्र में ही ये संभव...', पाकिस्तानी मौलाना ने की हिंदुस्तान की जमकर तारीफ, हैरान कर देगी वजह, देखें VIDEO

पाकिस्तान के इस्लामिक स्कॉलर मौलाना मोहम्मद अली मिर्जा ने एक वायरल वीडियो में भारत के लोकतंत्र की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने भारत में हुई “Does God Exist” डिबेट का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी खुली बहस सिर्फ भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ही संभव है.

'भारत के लोकतंत्र में ही ये संभव...', पाकिस्तानी मौलाना ने की हिंदुस्तान की जमकर तारीफ, हैरान कर देगी वजह, देखें VIDEO
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पाकिस्तान के जाने-माने इस्लामिक स्कॉलर मौलाना मोहम्मद अली मिर्जा इन दिनों अपने बयानों को लेकर लगातार चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने सीधे पाकिस्तान की व्यवस्था और कानून पर सवाल खड़े करते हुए भारत के लोकतंत्र की खुलकर तारीफ की है. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को एक नई बहस के केंद्र में ले आया है.

मौलाना मोहम्मद अली मिर्जा ने क्या कहा?

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में मौलाना मोहम्मद अली मिर्जा भारत में विचारों की आजादी और खुले मंच पर होने वाली बहसों की सराहना करते नजर आ रहे हैं. उन्होंने हाल ही में भारत के कॉन्सटिट्यूशन हॉल में हुई 'Does God Exist' नाम की डिबेट का जिक्र किया. इस डिबेट में मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर और मुफ्ती शुमाइल नदवी आमने सामने थे. मौलाना का कहना है कि ऐसी खुली और स्वस्थ बहस केवल भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ही संभव है.

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पाकिस्तान में लग जातीं क़ानूनी धाराएं 

मौलाना मोहम्मद अली मिर्जा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर यही डिबेट पाकिस्तान में होती तो हालात बिल्कुल अलग होते. उनके मुताबिक, पाकिस्तान में इस तरह की चर्चा होने पर दोनों वक्ताओं पर तुरंत धार्मिक धाराएं लगा दी जातीं. उन्होंने कहा कि जावेद अख्तर पर खुदा की तौहीन का केस बन जाता और मुफ्ती शुमाइल नदवी पर अलग तरह के आरोप लगते. मौलाना ने सवाल उठाया कि आखिर यह कौन सा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान है, जहां सवाल पूछने और विचार रखने की इतनी भारी कीमत चुकानी पड़ती है.

क्या है धारा 295-A?

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इस बयान के साथ ही उन्होंने पाकिस्तान में कानूनों के दुरुपयोग पर भी गंभीर टिप्पणी की. खास तौर पर उन्होंने धारा 295-A और 295-C की ओर इशारा किया, जिन्हें लेकर पाकिस्तान में लंबे समय से विवाद होता रहा है. धारा 295-A के तहत किसी भी धर्म या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए कृत्य को अपराध माना जाता है. वहीं धारा 295-B और 295-C में पवित्र कुरान की बेअदबी या खुदा की तौहीन के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है, जिसमें लंबी कैद तक शामिल है. आलोचकों का मानना है कि इन कानूनों का कई बार गलत इस्तेमाल किया जाता है.

सोशल मीडिया पर आ रही तरह-तरह की प्रतिक्रिया 

मौलाना का यह वीडियो इंस्टाग्राम अकाउंट muslimvibes2812 से शेयर किया गया है. खबर लिखे जाने तक इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं और बड़ी संख्या में यूजर्स अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा कि इस डिबेट में कोई बुराई नहीं थी, बल्कि इससे सोचने का नया नजरिया मिलता है. दूसरे यूजर ने कहा कि भारत का लोकतंत्र सच में बहस और असहमति को जगह देता है. वहीं एक और यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि मौलाना साहब, ऐसी एक डिबेट आप भी अपने मुल्क में कराकर दिखाइए.

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बताते चलें कि मौलाना मोहम्मद अली मिर्जा का यह बयान न सिर्फ पाकिस्तान की सियासत पर सवाल खड़े करता है, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और अभिव्यक्ति की आजादी को भी मजबूती से सामने रखता है. यही वजह है कि यह वीडियो दोनों देशों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है.

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