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बैंड-बाजों के साथ दुल्हे ही तरह निकाली 'बारात', स्कूल टीचर का ऐसा रिटायरमेंट देख दंग रह गए सब

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के धोबीवाड़ा गांव में प्राइमरी स्कूल टीजर मेघराज पराड़कर, जिन्होंने 38 सालों तक बच्चों को शिक्षा दी, गुरुवार को रिटायर हुए, ऐसे में गांवों के लोग, स्कूल स्टाफ़ और छात्रों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उन्हें विदाई दी. इस फेयरवेल समारोह का आयोजन किसी बारात से कम नहीं लग रहा था.

बैंड-बाजों के साथ दुल्हे ही तरह निकाली 'बारात', स्कूल टीचर का ऐसा रिटायरमेंट देख दंग रह गए सब
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फेयरवेल तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक शिक्षक का इतने दमदार तरीके से विदाई समारोह किया गया की हर कोई देखता ही रह गया. इस फेयरवेल में बैंड बाजा था,  रथ पर शिक्षक को बैठाया गया था, साथ ही कई लोग नाचते हुए दिखाई दिए. पहली नज़र में तो नजारा किसी बारात का लग रहा था, लेकिन ये नजारा किसी बारात का नहीं बल्कि एक टीचर की विदाई समारोह का का था. 

बारात से कम नहीं था फ़ेयरवेल समारोह

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के धोबीवाड़ा गांव में  प्राइमरी स्कूल टीजर मेघराज पराड़कर, जिन्होंने 38 सालों तक बच्चों को शिक्षा दी, गुरुवार को रिटायर हुए, ऐसे में गांवों के लोग, स्कूल स्टाफ़ और छात्रों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उन्हें विदाई दी. इस फेयरवेल समारोह का आयोजन किसी बारात से कम नहीं लग रहा था. 

बैंड-बाजों के साथ भव्य तरह से हुआ विदाई समारोह

प्राइमरी स्कूल टीज़र मेघराज को दुल्हे की तरह फूलों से सजे रथ पर बैठाया गया था, इस दौरान रथ पर उनके साथ उनकी बीवी और बेटे को भी बैठाया गया था, गाँव के लोगों ने बैंड-बाजों के साथ उन्हें पूरे गाँव में घुमाया और पूरे सम्मान के साथ उन्हें विदा किया. इस विदाई समारोह में गांव के लोग नाचते गाते चले रहे थे. साथ ही स्कूल के बच्चों और अन्य शिक्षकों ने भी फूलों की बारिश कर अपने टीज़र को शानदार तरह से अलविदा किया था. विदाई के दौरान टीज़र के गले में फूलों की मालाएं डाली गईं. 

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38 सालों तक एक ही गांव में पढ़ाया 

बता दें कि 1987 में 38 साल पहले मेघराज पराड़कर की धोबीवाड़ा गाँव के स्कूल में टीज़र के तौर पर पोस्टिंग हुई थी. आदिवासी अंचल तामिया में मौजूद इस स्कूल में कोई भी जाना नही चाहता था. लेकिन नौकरी की चाहत और बच्चों तक शिक्षा पहुंचने के चलते मेघराज ने यहां जॉइनिंग की थी. यहां पोस्टिंग होने के बाद मेधराज यहां पूरी तरह से रम गए. उन्होंने 38 सालों तक इसी स्कूल में शिक्षा दी और अब वो रिटायर भी यहीं से हुए हैं. 

‘मुझे खुशी है लोग आज मेरे सम्मान में जुटे हैं’

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इस फेयरवेल के दौरान कई छात्रों ने अपने टीज़र को गिफ्ट भी दिए. गांवों वालों और छात्रों से इतना प्यार पाके मेघराज पराड़कर काफी इमोशनल हो गए. उन्होंने अपनी विदाई समारोह में कहा, “मुझे बहुत खुशी है कि इतने लोग आज मेरे सम्मान में जुटे हैं. मैं यही चाहता हूं कि सभी माता-पिता अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें, क्योंकि बच्चों की उपस्थिति ही गांव के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है.”

‘मैं यहां आने के लिए तैयार रहूंगा’

मेघराज पराड़कर ने आगे कहा, “मैं सरकारी तौर पर रिटायर हो रहा हूं, लेकिन इस गांव से  नाता हमेशा रहेगा. गांव के हर व्यक्ति को अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने और स्कूल की मॉनिटरिंग करने का आह्वान कर रहा हूं. ताकि पढ़ाई अच्छी हो सके. जरूरत पड़ेगी तो मैं यहां आने के लिए तैयार रहूंगा."

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किसके नेतृत्व में हुआ था आयोजन

बताते चलें की इस कार्यक्रम का आयोजन जनपद सदस्य हरीश उईके के नेतृत्व में किया गया था. इस ख़ास मौके  पर गांव के लोगों के साथ-साथ छात्र-छात्राएं, स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे.

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