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'पैसे दो, पत्नी ले जाओ...', झांसी में प्राइवेट बैंक की गुंडागर्दी, किश्त न चुकाने पर महिला को बनाया बंधक, पति से की अनोखी डिमांड

उत्तर प्रदेश के झांसी में बैंकवालों की गुंडागर्दी देखने को मिली. यहां लोन की रकम वसूलने के लिए प्राइवेट बैंक ने तो हद ही पार कर दी. एक प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस बैंक ने महिला को लोन की किश्त न चुकाने पर कथित तौर पर 5 घंटे तक बंधक बनाकर बैठाए रखा. पति से कहा- किश्त दो, पत्नी को ले जाओ.

'पैसे दो, पत्नी ले जाओ...', झांसी में प्राइवेट बैंक की गुंडागर्दी, किश्त न चुकाने पर महिला को बनाया बंधक, पति से की अनोखी डिमांड
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उत्तर प्रदेश के झांसी ज़िले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस बैंक की वसूली टीम ने मानवीय मर्यादाओं की सभी हदें पार कर दीं. आरोप है कि बैंक द्वारा महिला को लोन की किश्त न चुकाने पर लगभग 5 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और उसके पति से कहा गया, "किश्त दो, पत्नी को ले जाओ."

महिला ने प्राइवेट बैंक से लिया था लोन

यह मामला झांसी के एक ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहाँ महिला ने अपने घरेलू खर्च और आत्मनिर्भरता के लिए एक प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस बैंक से लोन लिया था. आर्थिक तंगी के कारण समय पर किश्त न चुकाने पर बैंक की रिकवरी टीम घर आ धमकी. न सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि महिला को कथित रूप से जबरन बैंक कार्यालय लाया गया और वहीं बंधक बनाकर बैठा दिया गया.

परिजनों का आरोप है कि महिला को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और जब पति बैंक पहुँचा, तो स्टाफ ने कहा कि बिना रकम चुकाए वह उसे वापस नहीं ले जा सकता. इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी रोष है.

चौंकाने वाले आरोप

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पीड़िता पूजा वर्मा ने कोतवाली मोंठ में दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसने 40,000 रुपये का लोन लिया था. अब तक वह 11 किश्तें जमा कर चुकी है, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में केवल 8 किश्तें ही दिखाई जा रही हैं. महिला का आरोप है कि 

बैंक एजेंट कौशल और धर्मेंद्र ने उसकी तीन किश्तें हड़प लीं. महिला का कहना है कि मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ निवासी बैंक सीओ संजय यादव सोमवार को उनके घर पहुंचा और धमकी भरे अंदाज़ में रकम मांगने लगा. मना करने पर पति-पत्नी को जबरन बैंक लाकर घंटों बैठा दिया गया. 

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, बैंक प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

मानवाधिकारों का उल्लंघन

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इस घटना ने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कार्यशैली और वसूली प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या लोन वसूली के नाम पर किसी महिला को इस तरह बंधक बनाना कानूनन सही है? ऐसे मामलों में मानवाधिकार आयोग और बैंकिंग नियामक संस्थाओं को सख्त हस्तक्षेप करना चाहिए.

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