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अस्पतालों में AI का इस्तेमाल, कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण पर क्या असर?

हाल ही में जारी शोध में यह पाया गया कि चैटजीपीटी मरीजों के रिकॉर्ड को संभालने और कागज के उपयोग को कम करने में सक्षम है। इससे अस्पतालों की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है, लेकिन इसका ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।

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आज की दुनिया में कार्बन उत्सर्जन एक गंभीर चुनौती बन चुका है। स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्र, जहां हर दिन हजारों मरीजों का डेटा तैयार और संरक्षित किया जाता है, इसका समाधान ढूंढने के लिए तकनीक की ओर रुख कर रहे हैं। चैटजीपीटी और अन्य जनरेटिव एआई मॉडल इस दिशा में एक नई उम्मीद के तौर पर देखे जा रहे हैं। लेकिन क्या ये तकनीक वास्तव में अस्पतालों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकती है?
Chat GPT का अस्पतालों में उपयोग
ऑस्ट्रेलिया और यूके के शोधकर्ताओं ने इंटरनल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दिखाया कि चैटजीपीटी जैसे बड़े भाषा मॉडल (LLM) अस्पतालों में कागजी कार्यों को संभालने और मरीजों के रिकॉर्ड मैनेजमेंट में मदद कर सकते हैं।

डेटा मैनेजमेंट में विशेषज्ञता: चैटजीपीटी बड़े पैमाने पर डेटा को प्रोसेस और सारांशित कर सकता है।
कागज का कम उपयोग: इसका उपयोग डिजिटल रिकॉर्ड्स को संभालने के लिए किया जा सकता है, जिससे कागज की खपत कम होगी।
तेजी और सटीकता: स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों के लिए यह मॉडल तेजी से काम करता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है।

हालांकि, इस तकनीक के फायदे के साथ चुनौतियां भी हैं। चैटजीपीटी जैसे मॉडल बड़ी मात्रा में ऊर्जा खपत करते हैं, जो पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

ऊर्जा खपत: एक AI क्वेरी से उतनी बिजली खर्च होती है जितनी एक स्मार्टफोन को 11 बार चार्ज करने में लगती है।
पानी की खपत: AI डेटा सेंटर में हर बार 20 मिलीलीटर ताजे पानी का उपयोग होता है।
गूगल की तुलना में ज्यादा ऊर्जा: चैटजीपीटी गूगल की तुलना में 15 गुना अधिक ऊर्जा का उपयोग करता है।

AI सिस्टम के निर्माण और संचालन के लिए बड़ी मात्रा में दुर्लभ पृथ्वी धातुओं का खनन किया जाता है। यह खनन पर्यावरणीय असंतुलन को बढ़ावा देता है।

हार्डवेयर निर्माण का असर: चैटजीपीटी जैसे मॉडल के हार्डवेयर निर्माण में कार्बन उत्सर्जन दोगुना हो सकता है।
प्राकृतिक संसाधनों का दोहन: दुर्लभ धातुओं का अत्यधिक उपयोग पर्यावरणीय क्षति को बढ़ाता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि एआई का उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। छोटे प्रॉम्प्ट्स का इस्तेमाल, ऊर्जा-कुशल डेटा सेंटर, और AI के उपयोग को सीमित करके इसके पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सकता है। चैटजीपीटी और अन्य एआई मॉडल निश्चित रूप से अस्पतालों में प्रक्रियाओं को सुगम बनाने और कागजी कार्यों को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसके पर्यावरणीय प्रभाव को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए, हम इस तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए कर सकते हैं, साथ ही पर्यावरणीय क्षति को भी कम कर सकते हैं।

क्या आप सोचते हैं कि एआई मॉडल हमारे भविष्य के अस्पतालों में गेम-चेंजर साबित होंगे? अपनी राय जरूर बताएं।
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