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महंगाई का नया झटका, युद्ध का असर अब जेब पर! पेट्रोल के बाद स्मार्टफोन भी होंगे महंगे

Electric gadgets Price Increase: मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण अभी गैस-पेट्रोल को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ीं थी कि अब नए स्मार्टफोन्स से भी जुड़ी खबरें भी सामने आ रही हैं

महंगाई का नया झटका, युद्ध का असर अब जेब पर! पेट्रोल के बाद स्मार्टफोन भी होंगे महंगे
Image Source: Social Media
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Smartphones Price Increase: हम अक्सर सोचते हैं कि मिडिल ईस्ट में क्या हो रहा हैं, उससे हमारा क्या लेना -देना. लेकिन आज की दुनिया ऐसी हो गई हैं कि कहीं भी हलचल होती हैं, उसका सीधे असर हमारी रोजमर्या की चीजों पर पड़ता हैं, खासकर इलेक्ट्रॉनिक सामान पर. मोबाइल , लैपटॉप या कार खरीदते समय ये नहीं सोचते कि इनके पीछे कितनी लंबी सप्लाई चेन काम करती है. लेकिन सच ये है कि एक छोटा सा चिप बनाने के लिए भी दुनिया के अलग अलग हिस्सों से चीजे आती हैं. 

चिप बनाने में मिडिल ईस्ट क्यों है इतना अहम?

आपने सुना हो कि चिप बनाने वाली बड़ी फैक्ट्रियां अमेरिका या एशिया के कुछ देशों में होती हैं, लेकिन असल कहानी थोड़ी अलग है. चिप बनाने के लिए जरूरी कई कच्चे संसाधन मिडिल ईस्ट से आते हैं. जैसे हीलियम गैस, जो सुनने में साधारण लगती है, लेकिन चिप बनाने में इसका बहुत बड़ा रोल है. यह गैस मशीनों को ठंडा रखने और लेजर प्रोसेस में काम आती है. इसी तरह ब्रोमीन जैसे केमिकल और सल्फ्यूरिक एसिड भी जरूरी होते हैं, जो चिप की सफाई और पैकेजिंग में इस्तेमाल होते हैं. अगर इन चीज़ों की सप्लाई में ज़रा भी रुकावट आती है, तो पूरी चेन पर असर पड़ता है.

तनाव बढ़ा तो असर सीधा उत्पादन पर

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अगर किसी वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ जाता है, तो सबसे पहले इन कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित होती है.
फैक्ट्रियों को जरूरी सामान समय पर नहीं मिलेगा
उत्पादन धीमा पड़ सकता है
और जो बनेगा, वो महंगा पड़ेगा
यानी एक छोटी सी रुकावट धीरे-धीरे पूरी दुनिया में असर दिखाने लगती है.

महंगा तेल, महंगा प्रोडक्शन

एक और बड़ी बात जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वो है कच्चा तेल.चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों को भारी मात्रा में बिजली चाहिए होती है. जब तेल महंगा होता है, तो बिजली भी महंगी हो जाती है. इससे फैक्ट्री का खर्च बढ़ता है. ऊपर से माल ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) और बीमा का खर्च भी बढ़ जाता है. अब कंपनी ये बढ़ा हुआ खर्च खुद तो नहीं उठाएगी- आखिरकार इसका असर प्रोडक्ट की कीमत पर ही पड़ेगा.

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आम आदमी पर इसका क्या असर पड़ेगा?

अगर चिप महंगी होगी, तो उससे बनने वाले सामान भी महंगे हो जाएंगे.
स्मार्टफोन
लैपटॉप
टीवी
यहां तक कि कारें भी
क्योंकि आजकल हर चीज़ में चिप का इस्तेमाल होता है, चाहे वो छोटा गैजेट हो या बड़ी मशीन.

इस पूरी स्थिति में भारत के सामने दो रास्ते हैं, एक चुनौती का और दूसरा मौके का. चुनौती इसलिए क्योंकि अगर कच्चा माल महंगा होगा, तो यहां बन रही नई चिप इंडस्ट्री पर दबाव पड़ेगा. लेकिन मौका भी बड़ा है. अगर भारत सिर्फ चिप बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि उनसे जुड़े कच्चे माल और केमिकल्स का उत्पादन भी देश में शुरू करे, तो हम दूसरों पर कम निर्भर हो सकते हैं.

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