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योगी सरकार का बड़ा फैसला, कैंसर इलाज अब होगा आसान, प्रदेश के हर जिले में 100 बेड की सुविधा

UP Cancer Hospital: कैंसर का इलाज महंगा होने और बड़े शहरों तक सीमित रहने की वजह से मरीजों को काफी परेशानी होती है. इसे देखते हुए सरकार ने योजना बनाई है कि प्रदेश के हर हिस्से में चरणबद्ध तरीके से कैंसर के आधुनिक अस्पताल खोले जाएं, ताकि मरीजों को दूर न जाना पड़े और शुरुआती अवस्था में ही इलाज मिल सके.

Image Source: Social Media
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UP Cancer Hospital: उत्तर प्रदेश सरकार कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज को आम लोगों की पहुंच में लाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. अभी कैंसर का इलाज महंगा होने और बड़े शहरों तक सीमित रहने की वजह से मरीजों को काफी परेशानी होती है. इसे देखते हुए सरकार ने योजना बनाई है कि प्रदेश के हर हिस्से में चरणबद्ध तरीके से कैंसर के आधुनिक अस्पताल खोले जाएं, ताकि मरीजों को दूर न जाना पड़े और शुरुआती अवस्था में ही इलाज मिल सके.

18 मंडलों में बनेंगे टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर

लखनऊ स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान को इस पूरी योजना की नोडल एजेंसी बनाया गया है. यानी यह संस्थान पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी और मार्गदर्शन करेगा.
योजना के पहले चरण में प्रदेश के सभी 18 मंडलों में टर्शियरी (उच्च स्तरीय) कैंसर केयर सेंटर बनाए जाएंगे. कोशिश यह रहेगी कि जहां पहले से सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, वहीं की ऑन्कोलॉजी यूनिट को अपग्रेड करके सुपरस्पेशलिटी सेंटर बनाया जाए. इससे खर्च भी कम होगा और मरीजों को एक ही जगह जांच, इलाज और ऑपरेशन की सुविधा मिल सकेगी. जहां मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां नए कैंसर सुपरस्पेशलिटी सेंटर बनाए जाएंगे.

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हर जिले में 100 बेड का कैंसर अस्पताल

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दूसरे चरण में प्रदेश के हर जिले में 100-100 बेड का सेकंडरी (द्वितीयक) कैंसर अस्पताल बनाया जाएगा. इन अस्पतालों में कीमोथेरपी, रेडियोथेरपी और सामान्य सर्जरी की सुविधा होगी. इससे मरीजों को शुरुआती और मध्यम स्तर का इलाज अपने जिले में ही मिल सकेगा.
तीसरे स्तर पर जिला अस्पतालों में चार-चार बेड के डे-केयर सेंटर बनाए जाएंगे. यहां मरीजों को भर्ती कर दवाएं दी जाएंगी और जरूरत पड़ने पर बड़े सुपरस्पेशलिटी सेंटर के डॉक्टरों से सलाह लेकर इलाज आगे बढ़ाया जाएगा.

अत्याधुनिक मशीनों से होगा इलाज

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नए टर्शियरी सेंटरों में आधुनिक तकनीक की सभी जरूरी मशीनें लगाई जाएंगी. इनमें लीनियर एक्सलरेटर (कम रेडिएशन वाली रेडियोथेरपी के लिए), पीईटी स्कैन, साइबर नाइफ, इम्युनोथेरपी, मॉलिक्यूलर मेडिसिन और जेनेटिक टेस्टिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.
अस्पतालों को पीपीपी मॉडल (सरकार और निजी भागीदारी) के जरिए विकसित किया जाएगा, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके.

विशेषज्ञों की टीम करेगी निगरानी

इस योजना के लिए राज्य स्तर पर एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई है. इसमें संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं.
यह टीम यह भी शोध करेगी कि प्रदेश के किस क्षेत्र में कौन सा कैंसर ज्यादा फैल रहा है, ताकि उसी अनुसार सुविधाएं विकसित की जा सकें.

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किस इलाके में कौन सा कैंसर ज्यादा?

विशेषज्ञों के अनुसार, मैनपुरी और कानपुर क्षेत्र में मुंह (ओरल) कैंसर ज्यादा पाया जा रहा है. गंगा के मैदानी इलाकों में गॉलब्लैडर कैंसर तेजी से बढ़ रहा है. ग्रामीण महिलाओं में गर्भाशय के मुंह का कैंसर ज्यादा देखा जा रहा है, जबकि शहरी महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले अधिक हैं. इसके अलावा आहारनली (फूड पाइप) के कैंसर के मामले भी बढ़ रहे हैं. इसी डेटा के आधार पर सरकार इलाज और जांच की सुविधाएं मजबूत करेगी.

क्या होगा फायदा?

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उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के अनुसार, हर मंडल में एक कैंसर सुपरस्पेशलिटी सेंटर होगा. लखनऊ और कानपुर में पहले से कई बड़े संस्थान हैं, इसलिए अन्य जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी. जब हर जिले में 100 बेड का कैंसर अस्पताल होगा, तो बड़े संस्थानों पर दबाव कम होगा. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीजों की बीमारी शुरुआती चरण में ही पकड़ में आ जाएगी और समय पर इलाज शुरू हो सकेगा.

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