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इस सीट के लिए योगी ने उतारी मंत्रियों की फौज, जल्द होंगे चुनाव

Ayodhya में करारी हार के बाद BJP मिल्कीपुर उपचुनाव में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. पार्टी ने अभी से यहां अपनी तैयारी तेज़ कर दी है और मिल्कीपुर में मंत्रियों की फ़ौज उतार दी.

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यूपी का अयोध्या जिला जो राम मंदिर को लेकर देश ही नहीं दुनियाभर की सुर्खियों में छाया रहा। अयोध्या से देशभर में बीजेपी ने सनातन का परचम लहराया। हिंदू धर्म ध्वजा की गूंज दुनिया के कोने-कोने तक पहुंची। धूमधाम से रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन कर बीजेपी ने जन-जन तक सनातन का संदेश दिया। भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद बीजेपी आश्वस्त थी कि वह इसके ज़रिए अयोध्या तो क्या पूरे देश का दिल जीतने में कामयाब रही। लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को सबसे बड़ा झटका इसी अयोध्या सीट पर दिया।

अयोध्या में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद तो बीजेपी की साख पर ही सवाल खड़े हो गए और इस हार से वह अभी तक नहीं उबर पाई। इसीलिए अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। बीजेपी ने इस सीट पर जीत के लिए अभी से तैयारी तेज़ कर दी है। मिल्कीपुर सीट बीजेपी के लिए साख का सवाल है। वह किसी भी हाल में इसको हाथ से नहीं जाने देगी।

मिल्कीपुर में चुनाव का ऐलान कब ?

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20 नवंबर को महाराष्ट्र और झारखंड में चुनावों के साथ साथ यूपी की 9 सीटों पर भी चुनाव हुए थे। इन 9 सीटों में मीरापुर, कुंदरकी, ग़ाज़ियाबाद, खैर, करहल, सीसामऊ, फूलपुर, कटेहरी, और मझवां सीट शामिल थी। इसी समय मिल्कीपुर सीट पर भी चुनाव होना था। लेकिन वह टाल दिया गया। अब माना जा रहा है कि दिल्ली में विधानसभा चुनावों के ऐलान के साथ मिल्कीपुर सीट पर भी चुनाव का ऐलान हो सकता है। हो सकता है दिल्ली में चुनाव के साथ ही मिल्कीपुर में भी चुनाव हो।

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दरअसल, मिल्कीपुर से सपा के अवधेश प्रसाद विधायक थे लोकसभा चुनाव में सांसदी का टिकट मिला और उनको जीत मिली। जिसके बाद मिल्कीपुर सीट ख़ाली हो गई और अब मिल्कीपुर चुनाव में जीत के लिए बीजेपी पुरज़ोर कोशिशों में जुटी हुई है। पार्टी बूथ से लेकर संगठन स्तर तक रणनीति को धार दे रही है। माना जा रहा है मिल्कीपुर उपचुनाव के लिए BJP कुंदरकी सीट वाला मॉडल अपना रही है इसीलिये योगी ने अपने 6 मंत्रियों को काम पर लगा दिया है। BUMPER- क्या है BJP का कुंदरकी मॉडल ?

कुंदरकी सीट पर क़रीब 65% मुस्लिम वोटर हैं और चुनाव में 11 मुस्लिम उम्मीदवारों के आगे बीजेपी का एक हिंदू उम्मीदवार मैदान में था। ऐसे में इस सीट पर बीजेपी की जीत किसी चमत्कार की तरह तो थी ही लेकिन चमत्कार के पीछे बीजेपी की एक मज़बूत रणनीति भी रही। BJP उम्मीदवार राजवीर ने मुस्लिम इलाक़ों में घर घर जाकर वोट मांगे। हर घर के वोटर्स पर बीजेपी की पैनी नज़र रही। ख़ुद योगी आदित्यनाथ यहां चुनाव प्रचार करने पहुंचे बाइट- योगी आदित्यनाथ, CM, UP

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 इन 6 मंत्रियों पर जातीय समीकरण की ज़िम्मेदारी ?

कुंदरकी की तरह ही मिल्कीपुर में भी बीजेपी की नजर हर घर के वोटों पर है। संगठन के सदस्य घर घर जा रहे हैं। लोगों की सूची तैयार हो रही है। जातीय समीकरण पर भी बीजेपी का पूरा फ़ोकस है। इस बार मिल्कीपुर में समाजवादी पार्टी के PDA के नारे के आगे बीजेपी अपने राष्ट्रवाद और हिंदुत्ववादियों के मुद्दे को मज़बूती से रखने की कोशिश में है। इसके लिए योगी ने अपने 6 मंत्री अयोध्या में उतार दिए हैं। इनमें जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव, राज्य मंत्री सतीश शर्मा, चिकित्सा मंत्री मंयकेश्वर सिंह और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही शामिल हैं। इन सभी को अयोध्या में अहम ज़िम्मेदारी दी गई है। मिल्कीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव में ये जातीय आधार पर अहम भूमिका में हैं। वहीं, बीजेपी के संभावित उम्मीदवार की बात करें बाबा गोरखनाथ इस सीट पर प्रबल दावेदार है।

PDA मॉडल के साथ अखिलेश भी तैयार !

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BJP के साथ साथ समाजवादी पार्टी के लिए भी मिल्कीपुर सीट साख औेर नाक का सवाल है। बीजेपी लहर और राम मंदिर आयोजन के बीच सपा ने अयोध्या सीट बीजेपी से छिनी थी। ऐसे में मिल्कीपुर जीत से सपा अपनी छवि बरकरार रखना चाहेगी। लोकसभा चुनाव की तरह ही सपा मिल्कीपुर में भी अपने PDA यानी पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक मॉडल को ही अपनाएगी। वहीं, सपा के उम्मीदवार की बात करें तो अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद यहां से चुनाव लड़ेंगे। पार्टी पहले ही अजीत के नाम का ऐलान कर चुकी है BUMPER- मिल्कीपुर में क्यों टला चुनाव ? दरअसल अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर बाकी सीटों पर हुए उपचुनाव के साथ चुनाव इसलिए नहीं हो पाया था क्योंकि मिल्कीपुर से बीजेपी के पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ ने 2022 चुनाव के नतीजे आने के बाद सपा विधायक अवधेश प्रसाद के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी। जिसमें उनके खिलाफ चुनाव में ग़लत दस्तावेज पेश करने का आरोप लगाया था। मामले की सुनवाई चल रही थी। हालांकि अब गोरखनाथ ने याचिका वापस ले ली। जिसके बाद मिल्कीपुर में उपचुनाव का रास्ता साफ़ हो गया और कभी भी ऐलान हो सकता है…बहरहाल मिल्कीपुर सीट पर चुनाव दिलचस्प होने वाला है बस इंतज़ार है तो तारीख़ का। देखने वाली बात होगी कि यहां सपा का PDA फ़ॉर्मूला चलेगा या BJP का राष्ट्रवाद।

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