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ED की टीम क्यों पहुँची झारखंड के एक कबाड़ी के घर? घंटों तक हुई छानबीन

सुबह-सुबह झारखंड के साहिबगंज में एक साधारण कबाड़ी के घर अचानक पहुँच गई ED की टीम. इलाके में हड़कंप मच गया, लोग समझ ही नहीं पाए कि आखिर कबाड़ के कारोबारी पर प्रवर्तन निदेशालय की नज़र क्यों गई. घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद भी रहस्य बना हुआ है कि इस छोटे व्यापारी का नाम करोड़ों के GST घोटाले से कैसे जुड़ गया.

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झारखंड के साहिबगंज जिले में एक आम-सी दिखने वाले कबाड़ी, संतोष कुमार गुप्ता उर्फ़ बबलू के घर पर ED की टीम ने अचानक दबिश दी, जो करीब आठ घंटे तक जारी रही. यह छापेमारी सुबह साढ़े सात बजे शुरू हुई और शाम तक जारी रही—जिसने वहां के माहौल को पूरी तरह बदल कर रख दिया.

ED की चार सदस्यीय टीम ने कबाड़ी के घर, कार्यालय और आसपास के इलाके में दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संदिग्ध सामग्री की तलाशी ली, जबकि CRPF जवान घर के बाहर तैनात थे. 

कौन है यह कबाड़ीवाला?

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साहिबगंज जिले का निवासी संतोष कुमार गुप्ता उर्फ बबलू स्थानीय स्तर पर कबाड़ का कारोबार करता है. आमतौर पर लोग उसे एक साधारण कबाड़ी के रूप में जानते थे, जिसकी रोज़ी-रोटी पुराने सामान और लोहे-स्टील की खरीदी-बिक्री से चलती थी. लेकिन अचानक वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रडार पर आ गया.
कहा जा रहा है कि उसका नाम नकली GST इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में उभर कर आया, जिससे जुड़े कागज़ात और लेन-देन की जांच अब उसके ठिकानों तक पहुंच गई है.

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सुबह-सुबह पहुंची ED की टीम

गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे ED की चार सदस्यीय टीम CRPF के सुरक्षा घेरे के साथ संतोष गुप्ता के घर पहुँची. इलाके के लोगों को शुरुआत में यह समझ नहीं आया कि आखिर इतनी बड़ी सुरक्षा व्यवस्था क्यों की गई है. धीरे-धीरे खबर फैली कि मामला ED की छापेमारी का है.
जांच अधिकारी घर में दाखिल हुए और घंटों तक दस्तावेज़, लेन-देन के रिकॉर्ड, कंप्यूटर और डिजिटल उपकरण खंगालते रहे. बीच-बीच में एक युवक को पूछताछ के लिए ले जाया गया और वापस लाया गया.

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GST घोटाले से जुड़े तार

यह मामला सीधे तौर पर 750 करोड़ रुपये के GST फर्जीवाड़े से जुड़ा है. इसमें पहले भी स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल की गिरफ्तारी हो चुकी है. ED को शक है कि संतोष गुप्ता जैसे कबाड़ी कारोबारियों के नाम और उनके लेन-देन को भी इस बड़े घोटाले में इस्तेमाल किया गया. यही वजह है कि गहन जांच अब साहिबगंज तक पहुँच गई.

इलाके के लोग हैरान

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स्थानीय लोगों के लिए यह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था. लोग दूर-दराज से देखने पहुंचे कि आखिर कबाड़ी के छोटे से घर पर क्यों लगी है इतनी बड़ी छापेमारी. एक पड़ोसी ने कहा—“हम तो इन्हें एक साधारण कबाड़ी ही मानते थे, कभी नहीं सोचा था कि ED इनके घर तक आ जाएगी.” यह वाकया बताता है कि आर्थिक अपराधों की जड़ें कितनी गहरी हो सकती हैं और कैसे एक मामूली दिखने वाला व्यक्ति भी किसी बड़े रैकेट का हिस्सा हो सकता है.

छापेमारी के पीछे की असल कहानी 

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इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि ED को GST घोटाले में कबाड़ी की भूमिका पर विश्वसनीय सुबूत मिले होंगे. लेकिन यह निरीक्षण सिर्फ एक जांच ही नहीं था, यह उस आम आदमी के लिए भी एक संदेश था, कि कानून किसी भी गैरकानूनी काम करने वालो को नहीं छोड़ता. स्थानीयों ने बताया कि इस तलाशी के दौरान किसी से बदतमीज़ी नहीं की गई, बल्कि शांतिपूर्वक काम को अंजाम दिया गया. यह कार्रवाई कानून व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक कदम था.

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