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केजरीवाल का साथ पुराने साथियों ने क्यों छोड़ा? वजह जानकर हैरान रह जाएंगे
केजरीवाल ने वो सबकुछ किया जो उन्होंने एक वक्त कहा था कि नहीं करेंगे, अब चाहे वो कांग्रेस से गठबंधन करना हो, भ्रष्टाचारियों से हाथ मिलाकर उनके साथ चुनाव लड़ना हो, सिक्योरिटी लेनी हो, आलीशान घर में रहना हो, केजरीवाल ने जो जो वादे किए सब कुछ उसके उलट ही किया और यही वजह रही की धीरे-धीरे उनके राजनीतिक साथी अलग भी होते गए | हालांकि आज वो राजनीतिक साथी कहीं ना कहीं राजनीति में है या दूसरे काम कर रहे हैं, लेकिन यहां पर उनकी बात करना बेहद जरूरी हो जाता है, जिनसे एक वक्त केजरीवाल की खूब बनती थी, लेकिन वक्त का पहिया घूमा तो फिर दोनों के रास्ते अलग हो गए, जिसके बाद आम आदमी पार्टी मतलब सिर्फ अरविंद केजरीवाल रह गया |
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भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए अन्ना आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल आज खुद कटघरे में खड़े हैं और भ्रष्टाचार के आरोपों में तिहाड़ जेल के चक्कर लगा रहे हैं, अन्ना आंदोलन के वक्त जो सपना केजरीवाल ने देश को दिखाया था लगता है वो महज सपना ही रह गया है, क्यूंकि केजरीवाल का मुख्य उद्देश्य था देश को एक अलग तरह की राजनीति से चलाया जाए, लेकिन वक्त के साथ केजरीवाल भी पुरानी परिपाटी पर चल निकले और देश को बदलने का दम भरने वाले खुद बदल गए |
केजरीवाल ने वो सबकुछ किया जो उन्होंने एक वक्त कहा था कि नहीं करेंगे, अब चाहे वो कांग्रेस से गठबंधन करना हो, भ्रष्टाचारियों से हाथ मिलाकर उनके साथ चुनाव लड़ना हो, सिक्योरिटी लेनी हो, आलीशान घर में रहना हो, केजरीवाल ने जो जो वादे किए सब कुछ उसके उलट ही किया और यही वजह रही की धीरे-धीरे उनके राजनीतिक साथी अलग भी होते गए | हालांकि आज वो राजनीतिक साथी कहीं ना कहीं राजनीति में है या दूसरे काम कर रहे हैं, लेकिन यहां पर उनकी बात करना बेहद जरूरी हो जाता है, जिनसे एक वक्त केजरीवाल की खूब बनती थी, लेकिन वक्त का पहिया घूमा तो फिर दोनों के रास्ते अलग हो गए, जिसके बाद आम आदमी पार्टी मतलब सिर्फ अरविंद केजरीवाल रह गया |
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मौजूदा वक्त में शराब घोटाले में फंसे केजरीवाल, स्वाति मालीवाल मारपीट मामले के बाद और ज्यादा टेंशन में है | जो स्वाति मालीवाल अरविंद केजरीवाल का लंबे वक्त से साथ देती आ रही है, आज उन्हीं के खिलाफ पूरी आम आदमी पार्टी उतर गई है | क्योंकि केजरीवाल के करीबी विभव कुमार को बचाना है | ऐसे में आज स्वाति मालीवाल निराश और हताश है, हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है जब केजरीवाल का कोई करीबी इस तरीके से उनसे दूर जा रहा है | ऐसे तमाम नाम है जिन्होंने एक वक्त केजरीवाल का साथ आंख मूंद कर दिया | लेकिन जब आंख खुली और सच्चाई देखी तो फिर केजरीवाल का साथ छोड़कर अपना दूसरा रास्ता अपना लिया | तो चलिए आज आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही नाम जिन्होंने केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाकर उनसे दूर हो गए |
किरन बेदी
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आंदोलन जब अपने चरम पर था तो किरण बेदी उसका मुख्य चेहरा हुआ करती थी | केजरीवाल उन्हें अपनी बड़ी बहन बताया करते थे | लेकिन फिर पता नहीं ऐसा क्या हुआ की दोनों के रिश्ते में दरार आ गई और दोनों एक दूसरे के खिलाफ तल्ख बयान देते नजर आए |
शाजिया इल्मी
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पत्रकारिता से अन्ना आंदोलन में आई थीं, AAP का गठन हुआ तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रहीं, लेकिन पार्टी आलाकमान से नाखुश होकर उन्होंने 2014 में रास्ते अलग कर लिए | शाजिया ने केजरीवाल पर आतंरिक लोकतंत्र नहीं बनाने का आरोप लगाया, अभी शाजिया बीजेपी में हैं |
शांति भूषण
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पूर्व कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने सबसे पहले आम आदमी पार्टी को चंदा दिया था | उन्होंने एक करोड़ रुपए पार्टी को चंदा दिया था, लेकिन 2014 में आम आदमी पार्टी से उनका मोह भंग हो गया | केजरीवाल पर अनुभवहीन, दिल्ली विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारे में गड़बड़ी, पार्टी में मनमानी चलाने जैसे कई आरोप लगाकर वो पार्टी को छोड़ गए |
कपिल मिश्रा
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आप सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे, लेकिन मई 2017 में उनका मंत्रालय छीन लिया गया और निलंबित कर दिया | कपिल मिश्रा ने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री केजरीवाल को करोड़ रुपए रिश्वत लेते देखा है, जिसके बाद ये सब हुआ |
आशुतोष
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2014 में न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर पद से इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी से जुड़े, चांदनी चौक से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए | 2018 में निजी कारणों का हवाला देकर आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राजनीतिक विश्लेषक बन गए |
प्रशांत भूषण
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AAP पार्टी के थिंक टैंक का अहम हिस्सा रहे, कानूनी रूप से केजरीवाल का खूब साथ दिया | लेकिन 2015 में रिश्तों में दरार आ गई, प्रशांत भूषण ने केजरीवाल पर टिकट बंटवारों में मनमानी का आरोप लगाया | बस फिर क्या, प्रशांत भूषण को निलंबित कर दिया गया |
योगेंद्र यादव
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आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में अहम रोल निभाने वाले योगेंद्र यादव पार्टी के लिए चुनाव में अहम भूमिका निभा रहे थे | लेकिन उनपर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर आम आदमी पार्टी से निकाल दिया गया | फिलहाल वो 'स्वराज अभियान' का गठन करते किसानों के मुद्दे को उठा रहे हैं |
कुमार विश्वास
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कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी दोस्त थे, आम आदमी पार्टी के उदय में सबसे अहम योगदान रहा, अन्ना आंदोलन में कुमार विश्वास की आवाज ने दम भरा | लेकिन आज केजरीवाल और कुमार विश्वास में 36 का आंकड़ा है | कुमार विश्वास ने तमाम आरोप केजरीवाल पर लगाए, जो वक्त के साथ सामने भी दिख रहा है और यही वजह है कि दोनों के रास्ते अलग है | बाकी मौजूदा वक्त में कुमार विश्वास क्या कर रहे हैं यह पूरा देश और दुनिया देख रही है |
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ये तो कुछ चंद नाम है जो केजरीवाल से दूर हो गए, ये लिस्ट बड़ी लंबी है, जिसमें कई नाम है जो कि कभी केजरीवाल की ईमानदारी पर उनके साथ जुड़े थे, लेकिन वक्त के साथ उनपर गंभीर आरोप लगाते हुए उनसे किनारा कर लिया, वहीं केजरीवाल मौजूदा वक्त में तमाम आरोपों में घिरे हुए हैं और लगातार उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं |