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एम लोकेश के बाद कौन हैं नोएडा प्राधिकरण के नए CEO कृष्णा करुणेश? गोरखपुर से क्या है वास्ता, जानें

कृष्णा करुणेश की गिनती UP के तेज तर्रार ऑफिसर में होती है. उनकी छवि सख्त प्रशासनिक और फील्ड में सक्रिय लेने वाले अधिकारी की है.

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IAS Officer Krishna Karunesh: इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले के बाद नोएडा प्राधिकरण के CEO एम लोकेश को पद से हटा दिया गया था. अब प्राधिकरण के नए CEO के तौर कृष्ण करुणेश ने कार्यभार संभाला है. इससे पहले कृष्णा करुणेश नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (SEO) के पद पर काबिज थे. 

IAS अधिकारी कृष्णा करुणेश को नोएडा प्राधिकरण के CEO का पदभार ऐसे समय में दिया गया है. जब इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले को लेकर प्राधिकरण की कड़ी आलोचना हो रही है. प्राधिकरण की लापरवाही पर CM योगी ने नाराजगी जताई और तत्कालीन CEO एम लोकेश को पद से हटा दिया. 

कौन हैं कृष्णा करुणेश? 

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कृष्णा करुणेश 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं. उनकी गिनती UP के तेज तर्रार ऑफिसर में होती है. उनकी छवि सख्त प्रशासनिक और फील्ड में सक्रिय लेने वाले अधिकारी की है. कृष्ण करुणेश मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं. ट्रेनिंग के बाद कृष्णा करुणेश की पहली तैनाती अयोध्या में हुई थी. इसके बाद साल 2013 में उन्होंने कुशीनगर ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट का पदभार संभाला. यहां एक साल बाद उनका तबादला हो गया और गाजियाबाद में बतौर ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट कार्यभार संभाला. कृष्ण करुणेश गाजियाबाद के सीडीएओ, हापुड़ और बलरामपुर और गोरखपुर के DM भी रहे. साल 2022 में ही उन्हें गोरखपुर का DM बनाया गया था. कृष्णा करुणेश की पढ़ाई की बात करें तो उनके पास MA के साथ-साथ LLB भी किया है. 

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क्या है इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामला? 

16 जनवरी की देर रात इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से ग्रेटर नोएडा घर लौट रहे थे. घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के कारण सेक्टर-150 के टी-प्वाइंट पर कार अनियंत्रित हुई. कार नाले की दीवार तोड़कर निर्माणाधीन मॉल के पानी भरे बेसमेंट में गिरी. कार गिरते ही युवराज ने बाहर निकलने की कोशिश की. फिर 12.20 बजे के आस-पास पिता को कॉल किया. फोन उठाते ही उसने पिता को बोला पापा, मैं नाले में गिर गया हूं, मैं मरना नहीं चाहता हूं. मुझे बचा लीजिए. नाला सोसाइटी से महज 200 मीटर ही दूर था. पिता दौड़े-दौडे पहुंचे, करीब आधे घंटे तक बेटे को ढूंढा. पिता की आवाज सुनकर बेटा भी चिल्लाया. कार पानी में थी और बेटा उसकी छत पर लेटा हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे डूब रहा था. वो लगातार मोबाइल की लाइट को जला और बुझा रहा था, ताकि किनारे पर खड़े पिता जान सकें कि वो जिंदा है. 

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इसके बाद डायल-112 पर फोन किया गया. वहां कई लोग थे लेकिन किसी ने युवराज को बाहर निकालने में मदद नहीं की. इस दौरान लोग वीडियो बनाते रहे. जबकि पिता बेटे को बचाने की गुहार लगाता रहा. वहीं, पुलिस और दमकल की गाड़ी भी पहुंच चुकी थी. रस्सी फेंककर बचाने की कोशिश की गई, लेकिन रस्सी युवराज तक पहुंची ही नहीं. किसी ने भी पानी में उतरने की जहमत नहीं की. पिता के मुताबिक, पुलिस अधिकारी कह रहे थे कि पानी बहुत ठंडा है, कैसे जाएं. कोई कह रहा था कि साइट में नीचे सरिया हो सकती हैं. जहां पूरा प्रशाशनिक अमला खड़ा था वहां एक डिलीवरी बॉय ने हिम्मत दिखाई और उस गड्डे में कूद गया क्योंकि इसके अंदर की मानवता शायद जिंदा थी. हालांकि युवराज की जान बच ना सका. बाद में क्रेन मंगवाई गई वो भी युवराज तक नहीं पहुंच सकी. करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद युवराज को बाहर निकाला गया, लेकिन जिंदा नहीं मुर्दा. 

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इस घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण की उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही ने कई सवाल खड़े कर दिए थे. खुद CM योगी ने मामले में संज्ञान लिया और CEO को पद से हटाया गया. इसके साथ ही मामले की हाईलेवल जांच के लिए मेरठ जोन के ADG भानू भास्कर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय SIT भी गठित की गई. 

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