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CM Dhami ने खुद मिलाया जनता को फोन तो अधिकारियों में मचा हड़कंप !

CM Pushkar Singh Dhami ने CM Helpline 1905 की वर्चुअल समीक्षा बैठक की और इस दौरान उन्होंने जनता से उनकी समस्याओं को भी सुना तो वहीं जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाने के साथ ही उन्हें मामले में उचित कार्रवाई करने के आदेश भी दिये !

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देवभूमि उत्तराखंड की सत्ता संभाल रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिखने में भले ही बेहद सरल मिजाज के मुख्यमंत्री लगते हों, लेकिन जब वो कोई फैसला लेते हैं या कोई तगड़ा एक्शन लेते हैं, तो उसकी धमक देवभूमि तक ही नहीं, पूरे देश में सुनाई देती है। कुछ ऐसा ही एक बार फिर हुआ जब 19 मार्च को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की वर्चुअल समीक्षा बैठक ली।

दरअसल, उत्तराखंड के लोगों के लिए धामी सरकार ने सीएम हेल्पलाइन नंबर 1905 जारी किया है, जिससे लोग एक फोन कॉल के जरिये अपनी समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचा सके और जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान हो जाए। अब सबसे बड़ा सवाल ये था कि क्या सीएम हेल्पलाइन के जरिये आने वाली समस्याओं का सरकारी विभाग वाले समाधान भी करते हैं, या उनकी समस्याओं को हल्के में लेकर इग्नोर कर देते हैं। यही बात पता लगाने के लिए खुद सीएम धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की वर्चुअल समीक्षा बैठक की, और इस दौरान उन्होंने जनता से उनकी समस्याओं को भी सुना। तो वहीं जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाने के साथ ही उन्हें मामले में उचित कार्रवाई करने के आदेश भी दिए।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने समीक्षा बैठक के दौरान उत्तराखंड के पांच लोगों की समस्याएं सुनीं और तुरंत इसके समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिए।

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पहली समस्या: उत्तरकाशी की लक्ष्मी देवी ने सीएम को बताया कि उनके पिता शिक्षा विभाग में कार्यरत थे, उनके निधन के बाद मां को पेंशन मिलती है और वो पूरी तरह अपनी मां पर ही आश्रित हैं। इसीलिए पारिवारिक पेंशन के लिए नॉमिनी बनाए जाने के लिए सभी औपचारिकता पूरी कर अपर निदेशक पौड़ी कार्यवाही के लिए भेजा था, लेकिन मामला अभी तक लंबित था, जिस पर सीएम धामी ने शिक्षा विभाग को तीन दिन में लक्ष्मी देवी की समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया।

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दूसरी समस्या: रुद्रप्रयाग के रहने वाले जगदंबा प्रसाद नौटियाल की समस्या भी सीएम धामी ने सुनी। उन्होंने बताया कि मेडिकल के बिल के लिए आवेदन करने के बावजूद शिक्षा विभाग ने उन्हें पूरा भुगतान नहीं किया, यहां तक कि विभाग इसकी सूचना दिए जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। जिस पर सीएम धामी ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि इस मामले में जल्द परीक्षण कर समाधान किया जाए और जिम्मेदार अधिकारी को कारण बताओ नोटिस दिया जाए।

तीसरी समस्या: सीएम धामी के पास तीसरी समस्या नैनीताल जिले से आई, जब बहादुर सिंह बिष्ट नाम के एक शख्स ने बताया कि 31 दिसंबर 2023 को सहायक विकास अधिकारी के पद से उद्यान विभाग से रिटायर्ड होने के बाद अभी तक उन्हें 10 प्रतिशत GPF का पैसा नहीं मिल पाया है, जिस पर सीएम धामी ने उद्यान और वित्त विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बहादुर सिंह बिष्ट को GPF की बाकी राशि जल्द दी जाए, कार्मिकों को समय पर उनके अधिकार मिले, ये संबंधित विभागों का कर्तव्य है।

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चौथी समस्या: देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से भी सीएम धामी के पास एक समस्या आई, जब विराट नाम के शख्स ने बताया कि भू-माफिया अवैध खनन और पेड़ों का कटान कर रहा है, जिससे प्रकृति को नुकसान हो रहा है और अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिसकी शिकायत करने पर उन्हें धमकी भी मिल रही है। जिस पर सीएम धामी ने वन विभाग को इस मामले पर जल्द कार्रवाई करने और SSP देहरादून को धमकी देने वाले पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

पाँचवी समस्या: सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा बैठक ले रहे मुख्यमंत्री धामी के पास एक और कॉल बागेश्वर जिले से आई, जहां जगदीश कार्की नाम के एक शख्स ने सीएम धामी को बताया कि 2019 में उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना के तहत टेंट हाउस के लिए लोन लिया था, लेकिन उद्योग विभाग की ओर से अभी तक सब्सिडी नहीं दी गई, बैंक से लगातार किश्तें काटी जा रही हैं, जिस पर सीएम धामी ने बागेश्वर के डीएम को एक हफ्ते के अंदर जगदीश कार्की को सब्सिडी दिलवाने के निर्देश दिए।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जब सीएम हेल्पलाइन नंबर 1905 की समीक्षा बैठक ली, तो इस दौरान ताबड़तोड़ पांच लोगों की समस्याएं खुद सुनीं और मौके पर ही उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सख्त निर्देश भी दिए। तो वहीं विभाग के अधिकारियों को भी संदेश दे दिया कि जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेना ही होगा, क्योंकि जनता है, तभी सरकार है, और अगर जनता ही नाराज रही, तो सरकार को भी सत्ता से उखाड़ फेंकने की ताकत रखती है। यही वजह है कि सीएम धामी जनता की सेवा में कोई कोताही नहीं बरतना चाहते हैं, और समय-समय पर अधिकारियों के पेंच टाइट करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, और इस बार उन्होंने जिस तरह से खुद जनता की समस्या सुनकर अधिकारियों को फटकार लगाई।

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