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वियतनाम मॉडल पर काम करेगी उत्तराखंड सरकार, राज्य में लकड़ी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल

राज्य सरकार उत्तराखंड स्टेट वुड डेवलपमेंट काउंसिल का गठन करने जा रही है. इस काउंसिल का मकसद उत्तराखंड में लकड़ी उद्योग को मजबूत बनाना, किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है.

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उत्तराखंड सरकार अब अपनी हरियाली यानी ‘ग्रीन वेल्थ’ को आर्थिक ताकत में बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है. वियतनाम के सफल लकड़ी उद्योग मॉडल से प्रेरणा लेकर, राज्य सरकार उत्तराखंड स्टेट वुड डेवलपमेंट काउंसिल का गठन करने जा रही है. 

क्या है इसका उद्देश्य?

इस काउंसिल का मकसद उत्तराखंड में लकड़ी उद्योग को मजबूत बनाना, किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है.

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उत्तराखंड में क्यों है इसकी जरूरत?

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उत्तराखंड में 70 फीसदी वन क्षेत्र है, जिसमें संरक्षित क्षेत्र के अलावा सिविल सोयम में भी वनों की कोई कमी नहीं है. यही स्थिति उत्तराखंड में इस उद्योग की अपार संभावनाओं को बढ़ा रही है. राज्य का करीब 70% हिस्सा जंगलों से ढका हुआ है. यहां 341 लकड़ी आधारित उद्योग हैं: 310 आरा मिल, 30 प्लाईवुड यूनिट्स, और 1 पेपर इंडस्ट्री.  हर साल करीब 2.5 लाख घन मीटर लकड़ी का उत्पादन होता है, लेकिन जरूरत 4.5 लाख घन मीटर की है. यानी लकड़ी की भारी कमी है. 

वियतनाम का दौरा कर क्या सीखा?

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हाल ही में वन मंत्री सुबोध उनियाल और विभाग के अफसरों ने वियतनाम का दौरा किया.  वहां देखा गया कि वियतनाम ने संगठित एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी), क्लोन आधारित पौधारोपण, और एक्सपोर्ट नीति से अरबों डॉलर कमाए हैं. उत्तराखंड भी इस मॉडल को अपनी जलवायु और जमीन के अनुसार अपनाने की योजना बना रहा है. 

 काउंसिल क्या करेगी?

इस काउंसिल के ज़रिए कई नई योजनाएं शुरू होंगी. जिसमें काउंसिल का उद्देश्य डिजिटल ट्री प्लांटेशन रजिस्टर, ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम, क्लोन आधारित पेड़ लगाने की योजना, बांस की खेती को बढ़ावा देना और किसान और उद्योगों के बीच साझेदारी शामिल हैं. 

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किसानों को मिलेगा फायदा

इस काउंसिल के ज़रिए किसानों को काफी फायदा मिलेगा. उन्हें अच्छी क्वालिटी का पौधा मिलेगा, तकनीकी मदद व ट्रेनिंग मिलेगी, पेड़ों को काटने की अनुमति आसान होगी, साथ ही सीधे बाजार से जुड़ पाएंगे. 

उद्योगों को मिलेगा कच्चा माल

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इस काउंसिल के ज़रिए स्थानीय किसानों से लकड़ी मिलेगी ट्रांसपेरेंट और टिकाऊ (सस्टेनेबल) सप्लाई चेन बनेगी

पर्यावरण को फायदा

इस काउंसिल के ज़रिए ज्यादा पेड़ लगेंगे. मिट्टी का कटाव रुकेगा और कार्बन सोखने की क्षमता बढ़ेगी

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किसानों की आमदनी का नया जरिया

बता दें कियूकेलिप्टस, पॉपलर, बांस जैसी प्रजातियां तेजी से बढ़ती हैं और मुनाफा देती हैं. खेती के साथ-साथ पेड़ लगाना किसानों को लंबे समय तक कमाई देगा।

विभागों के बीच समन्वय

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यह काउंसिल वन विभाग, कृषि विभाग, उद्योग विभाग और वन निगम को एक साथ लाएगी. नीतियों से लेकर ट्रेनिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग और प्रोसेसिंग तक पूरा सिस्टम संभालेगी. 

हरियाली और उद्योग साथ-साथ

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति एग्रोफॉरेस्ट्री के लिए उपयुक्त है. पहाड़ों और मैदानों दोनों में ऐसी प्रजातियां हैं जो मिट्टी को बचाती हैं,जैव विविधता बढ़ाती हैं और  कार्बन सोखती हैं

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 लक्ष्य क्या है?

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अभी उत्तराखंड की लकड़ी आधारित अर्थव्यवस्था करीब ₹1,500 करोड़ की है. इस नई काउंसिल के जरिए इसे कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य है. उत्तराखंड स्टेट वुड डेवलपमेंट काउंसिल के गठन के साथ राज्य सरकार का उद्देश्य सिर्फ काष्ठ उद्योग को प्रोत्साहित करना ही नहीं, बल्कि इसे ग्रामीण विकास और हरित अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाना भी है.

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