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रोता-बिलखता पसीने से तर-बतर मिला मासूम... नोएडा के नामी स्कूल की बड़ी लापरवाही, 7 घंटे तक बस में बंद रहा UKG का छात्र

नोएडा के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां यूकेजी का एक बच्चा स्कूल बस में करीब 6–7 घंटे तक बंद रहा. सुबह बस में बैठने के बाद वह रास्ते में सो गया और ड्राइवर ने बस को 25 किलोमीटर दूर पार्किंग यार्ड में खड़ा कर दिया.

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दिल्ली से सटे नोएडा में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. मामला सेक्टर 44 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल का है, जहां कथित लापरवाही के चलते यूकेजी में पढ़ने वाला एक मासूम छात्र स्कूल बस में करीब 6 से 7 घंटे तक बंद रहा. गनीमत रही कि बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन इस घटना ने स्कूल परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कैसे हुई चूक?

जानकारी के मुताबिक गुरुवार सुबह बच्चे के माता-पिता ने उसे रोज की तरह बस में बैठाया. रास्ते में बच्चा सो गया. स्कूल पहुंचने पर अन्य बच्चों को उतार दिया गया, लेकिन सोते हुए बच्चे पर किसी की नजर नहीं पड़ी. इसके बाद ड्राइवर बस को स्कूल से करीब 25 किलोमीटर दूर पार्किंग यार्ड में ले जाकर खड़ा कर दिया. दोपहर में छुट्टी के समय जब मां बच्चे को लेने पहुंचीं तो वह बस में नहीं मिला. स्कूल से संपर्क करने पर बताया गया कि बच्चा स्कूल पहुंचा ही नहीं और कक्षा रजिस्टर में उसे अनुपस्थित दर्ज किया गया है. हैरानी की बात यह रही कि बस अटेंडेंस रजिस्टर में उसकी उपस्थिति दर्ज थी. यानी ट्रांसपोर्ट और स्कूल प्रशासन के रिकॉर्ड में बड़ा विरोधाभास सामने आया.

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घंटों की बेबसी और डर

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परिवार ने तुरंत खोजबीन शुरू की. कई कॉल और भागदौड़ के बाद बच्चा पार्किंग यार्ड में खड़ी बस के अंदर रोता हुआ मिला. सुबह से दोपहर तक वह भीषण गर्मी में अकेला बंद रहा. मां के मुताबिक बच्चा पसीने से भीगा हुआ था और लगातार रो रहा था. यह घटना नोएडा के थाना सेक्टर 39 क्षेत्र की है. राहत की बात यह है कि बच्चे के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई. लेकिन सवाल यह है कि यदि समय पर खोजबीन नहीं होती तो परिणाम कितना भयावह हो सकता था.

मां ने लिखा ओपन लेटर

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पीड़ित बच्चे की मां ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक ओपन लेटर लिखा. उन्होंने कहा कि सुबह उन्होंने खुद अपने बेटे अव्यान महाजन को बस में चढ़ते देखा और हर रोज की तरह घर लौट आईं. दोपहर में जब बच्चा नहीं मिला तो परिवार के होश उड़ गए. मां का आरोप है कि स्कूल की ओर से अनुपस्थिति की कोई सूचना नहीं दी गई. ट्रांसपोर्ट विभाग के किसी कर्मचारी ने यह जांचने की कोशिश नहीं की कि बच्चा बस से उतरा या नहीं. उन्होंने लिखा कि उन घंटों का डर और बेबसी शब्दों में बयान नहीं की जा सकती, जब यह पता ही न हो कि आपका बच्चा कहां है और किस हाल में है.

सिस्टम पर उठे सवाल

यह घटना केवल एक स्कूल या एक परिवार की नहीं है. यह पूरे स्कूल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए चेतावनी है. क्या बस ड्राइवर और अटेंडेंट बच्चों को उतारते समय अंतिम जांच नहीं करते. क्या स्कूल प्रशासन बस अटेंडेंस और क्लास अटेंडेंस का मिलान नहीं करता. जानकार मानते हैं कि हर स्कूल बस में जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी और बच्चों के उतरने की डिजिटल पुष्टि जैसी व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए. साथ ही हर रूट के बाद बस की फिजिकल चेकिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए.

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राहत के साथ गुस्सा भी

बच्चे के सुरक्षित मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस जरूर ली, लेकिन घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है. अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए.

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बताते चलें कि नोएडा की यह घटना एक बड़ा सबक है. स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट विभाग को समझना होगा कि जरा सी लापरवाही मासूम जिंदगी को खतरे में डाल सकती है. अब देखना होगा कि जिम्मेदारी तय होती है या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाता है.

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