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महाराष्ट्र में दही हांडी उत्सव के दौरान अलग-अलग जगह हुए हादसों में दो लोगों की मौत, 200 से ज्यादा लोग घायल, BMC ने की पूरे मामले की पुष्टि

महाराष्ट्र में हर साल गणेश चतुर्थी की तरह ही जन्माष्टमी के मौके पर धूम-धाम से मुंबई में जगह-जगह पर दही हांडी उत्सव का आयोजन किया जाता है. हालांकि इस बार का यह उत्सव कई परिवारों को दुख दे गया. दरअसल दही हांडी उत्सव में अलग-अलग जगह हुए हादसों में दो लोगों की मौत हो गई वहीं 200 से अधिक लोग घायल हो गए. BMC ने पूरे मामले की पुष्टि की है.

Image: IANS
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देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव धूमधाम से मनाया गया. मथुरा और वृंदावन से लेकर देश के कोने-कोने में मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया, और रात 12 बजे श्रीकृष्ण की भव्य आरती के साथ उनका जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. हालांकि, महाराष्ट्र में जन्माष्टमी पर हुए दही हांडी उत्सव के दौरान अलग-अलग हादसों में बड़ी दुर्घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई और करीब 200 से अधिक घायल हो गए. 

दही हांडी बांधते वक्त दो लोगों की हुई मौत
महाराष्ट्र के मानखुर्द में एक व्यक्ति की दही हांडी बांधते हुए मौत हो गई, जिसकी पहचान जगमोहन शिवकिरण चौधरी के रूप में हुई है. वह दही हांडी बांधते समय पहली मंजिल से गिरकर अपनी जान गंवा बैठे. उन्हें तुरंत शताब्दी गोवंडी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित किया गया. वहीं, दूसरी घटना में 14 वर्षीय युवक की मृत्यु हो गई.

BMC ने देर रात तक की थी 210 लोगों के घायल होने की पुष्टि
बीएमसी और सरकारी अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार रात 12:30 बजे तक 210 व्यक्तियों के घायल होने की सूचना मिली, जिनमें से 68 का इलाज चल रहा है और 142 को डिस्चार्ज कर दिया गया. सेंट्रल मुंबई के अस्पतालों में 91 घायल दर्ज किए गए, जिनमें से 60 का इलाज जारी है और 31 को छुट्टी दे दी गई. जबकि पूर्वी उपनगरों में 45 और पश्चिमी उपनगरों में 74 लोग घायल हुए. अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार, घायल लोगों का डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी है. संभवत रविवार-सोमवार तक सभी गोविंदाओं को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी.

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बता दें कि हर साल जन्माष्टमी के मौके पर मुंबई में जगह-जगह पर दही हांडी उत्सव का आयोजन किया जाता है. जिसमें भारी संख्या में गोविंदा हिस्सा लेते हैं. यह भगवान कृष्ण की बाल्यावस्था से जुड़ा हुआ है. भगवान कृष्ण को माखन बहुत प्रिय था. बाल लीलाओं में कृष्ण अपनी मंडली के साथ सारा माखन चट कर जाते थे. इसी वजह से कृष्ण को माखन चोर कहकर भी बुलाया जाता है. दही हांडी का कार्यक्रम मुरलीधर की इसी लीला को समर्पित है.

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