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बकरे की जगह शख्स ने दे डाली खुद की ही कुर्बानी, अल्लाह के नाम पर अपना गला रेता, शव के पास मिला सुसाइड नोट

यूपी के देवरिया जिले के गौरी बाजार के उद्योपुर गांव के रहने वाले 58 वर्षीय ईश मोहम्मद ईश उल अजहा ने बकरे की जगह खुद का ही गला रेत कर कुर्बानी दे दी.

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यूपी के देवरिया जिले से रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां शनिवार 7 जून को बकरीद के मौके पर एक अधेड़ उम्र के शख्स ने बकरे की जगह खुद का ही गला रेत कर कुर्बानी दे दी. गंभीर हालत में उसे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया. इस पूरे मामले को देखते ही आसपास के क्षेत्र में सनसनी फैल गई. मृतक युवक का नाम ईश मोहम्मद बताया जा रहा है. जिसकी उम्र 58 वर्ष थी.

बकरे की जगह युवक ने खुद की ही दे डाली कुर्बानी 

बता दें कि यूपी के देवरिया जिले के गौरी बाजार के उद्योपुर गांव के रहने वाले 58 वर्षीय ईश मोहम्मद ने बकरे की जगह खुद का ही गला रेत कर कुर्बानी दे दी. खबरों के मुताबिक, ईश मोहम्मद बकरीद वाले दिन सुबह सभी लोगों के साथ नमाज पढ़ने के लिए गए. नमाज पढ़ने के बाद वापसी के दौरान वह घर आने के बजाए बगल में स्थित एक झोपड़ी में चले गए. इस दौरान परिवार के लोगों को लगा की वह इबादत कर रहे हैं. इसलिए कोई भी उस दौरान वहां नहीं गया. लेकिन जब समय ज्यादा हो गया, तो परिवार के लोगों को संदेह हुआ. इसके बाद परिवार वाले जब गए तब उन्होंने देखा कि उनका गला रेता हुआ है और वह लहूलुहान स्थिति में नीचे गिरे पड़े थे. 

परिवार वालों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया 

ईश मोहम्मद की हालत को देखते हुए परिवार वाले सबसे पहले देवरिया के महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां से उन्हें गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया. वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. 

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पत्नी ने किया बड़ा खुलासा 

मृतक युवक की पत्नी हाजरा खातून ने बताया कि 'उनके पति अक्सर अंबेडकर नगर के किछौछा में मखदूम बाबा की मजार पर जाया करते थे. वह बाबा से काफी ज्यादा प्रभावित थे. इसी वजह से उन्होंने अपना गला रेत कर कुर्बानी दे दी.'

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'अल्लाह के रसूल के नाम पर दी कुर्बानी'

बता दें कि ईश मोहम्मद ने जहां खुद का गला रेत कर कुर्बानी दी है, वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है. इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि 'इंसान अपने बकरे को बेटे की तरह पालकर कुर्बानी देता है. वह भी जीव है. मैं खुद अपनी कुर्बानी अल्लाह रसूल के नाम पर दे रहा हूं. मेरी मिट्टी घबराकर मत करना, मेरा किसी ने कत्ल नहीं किया है. सुकून से मिट्टी देना, किसी से डरना नहीं. मेरा कब्र बांस के पास जो खूंटा है. उसी जगह पर होना चाहिए. मेरा जन्म 10 जनवरी 1966 को हुआ था.'

सीओ हरिराम यादव ने क्या कहा

इस मामले को लेकर नजदीकी थाने के सीओ हरिराम यादव ने कहा कि 'बकरीद के दिन एक युवक ने गला रेतकर हत्या की है. जिसकी सूचना हमें प्राप्त हुई है. परिजनों ने आंशका जताई है कि अंधविश्वास के चलते यह कदम उठाया गया है. फिलहाल मामले की जांच- पड़ताल चल रही है.'

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गांव में पसरा मातम हर कोई हैरान 

बकरीद के मौके पर जहां मुस्लिम समुदाय के लोग इस त्योहार को खुशी-खुशी मना रहे थे. हर कोई अजीज पशुओं की कुर्बानी देने में जुटा हुआ था. इस दौरान अंधविश्वास के चलते ईश मोहम्मद ने इतना बड़ा कदम उठा लिया कि किसी को भनक तक नहीं लगी. जिसने भी यह खबर सुनी हर कोई सन्न रह गया. परिवार के साथ-साथ पूरे उद्योपुर गांव और आसपास के इलाकों में मातम पसर गया. हर किसी की आंखों में आंसू था. 

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परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

बता दें कि ईश मोहम्मद अपने पीछे पत्नी हाजरा खातून 2 बेटियां नजमून व तजरुन के अलावा 3 बेटें अहमद फैज व ताज को छोड़कर चलें गए. पत्नी, बेटे और बेटियां सब फूट-फूट कर रो रहे थें. इनमें छोटा बेटा मुंबई में काम करता है, गांव में तीन कमरे वाला एक मकान है. इसमें दोनों बेटे परिवार के साथ रहते हैं. जिस झोपड़ी में ईश मोहम्मद ने कुर्बानी दी है. वहां बकरियां रहती हैं. जब यह घटना घटी, तो उस दौरान उनके दोनों बेटे ईद मनाने के लिए गांव में ही थे.

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