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पाकिस्तान-स्वीट्जरलैंड से जुड़े आगरा धर्मांतरण के तार, 'लूडो' के जरिए बदलवाए गए धर्म… यूपी पुलिस ने किए चौंकाने वाले खुलासे

उत्तर प्रदेश के आगरा में चल रहे अवैध धर्मांतरण रैकेट के तार पाकिस्तान से जुड़े पाए गए है. मामले में चार और लोगों को गिरप्तार किया गया है. खबर है कि इस्लाम धर्म अपनाने के लिए ऑनलाइन गेम का इस्तेमाल किया जाता है.

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उत्तर प्रदेश के आगरा में चल रहे अवैध धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार पाकिस्तान से जुड़े पाए गए हैं. आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने इसे राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है. पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट के जरिए युवाओं को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था. जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह को पाकिस्तान के कुछ लोगों से मदद मिली, जो इस्लाम कबूल कराने के लिए ऑनलाइन माध्यमों से प्रभाव डाल रहे थे. यह मामला उस समय सामने आया जब आगरा से 33 और 18 साल की दो बहनों के लापता होने की जांच शुरू हुई. जांच के दौरान पिछले हफ्ते छह राज्यों से 10 लोगों की गिरफ्तारी की गई, जिससे इस संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ. चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले से जुड़ी एक महिला ने सोशल मीडिया पर AK-47 राइफल लिए हुए अपनी तस्वीर भी पोस्ट की थी, जिससे इस रैकेट के कट्टरपंथी प्रभाव की आशंका और गहराई से उठने लगी है. फिलहाल आगरा पुलिस और देश की कई खुफिया एजेंसियां मिलकर इस मामले की गहन जांच कर रही हैं.

ऑनलाइन गेम का इस्तेमाल कर होता था धर्मांतरण 
आगरा धर्मांतरण मामले की जांच आगे बढ़ने पर चार और लोगों को गिरफ़्तार किया गया. शनिवार को आगरा के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि कभी-कभी युवाओं को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए ऑनलाइन गेम का इस्तेमाल किया जाता है और पाकिस्तान के संचालकों ने इस रैकेट में अहम भूमिका निभाई. 
पुलिस ने कहा कि यह रैकेट दिल्ली निवासी अब्दुल रहमान और गोवा की आयशा के नेतृत्व में चलाया जा रहा था. गिरोह द्वारा निशाना बनाए गए उत्तराखंड के देहरादून, उत्तर प्रदेश के बरेली, अलीगढ़ और रायबरेली, और हरियाणा के झज्जर और रोहतक सहित अन्य स्थानों की लड़कियों को बचाया गया है. अब्दुल रहमान ने 1990 में इस्लाम धर्म अपना लिया था. 

हिंदू धर्म के बारे में "ज़हरीली बातें" कहकर होता था ब्रेनवॉश
पुलिस कमिश्नर कुमार ने बताया कि लड़कियों को इस्लामी मान्यताओं वाले लोगों से बात करने के लिए मजबूर किया जाता था और उन्हें हिंदू धर्म के बारे में "ज़हरीली बातें" बताई जाती थीं. पाकिस्तान में बैठे उनके साथियों, जिनमें तनवीर अहमद और साहिल अदीम नाम के दो व्यक्ति शामिल थे, उन्‍होंने इन कोशिशों में उनकी मदद की. फिर लड़कियों को व्हाट्सएप ग्रुपों में जोड़ा गया जहां उनका ब्रेनवॉश किया जाता रहा. अगर लड़कियों के परिवार विरोध करते, तो उनके मन में भी उनके खिलाफ ज़हर भरा जाता. 
दीपक कुमार ने बताया कि ग्रुप के कम से कम तीन सदस्यों को डार्क वेब की जानकारी है और वे इसके ज़रिए बातचीत करते थे. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा रोके जाने से बचने के लिए सिग्नल ऐप का भी इस्तेमाल किया जाता था.

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गेम्स के जरिए में धर्मांतरण करने की बात
धर्मांतरण रैकेट की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि लड़कियों को आकर्षित करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग का इस्तेमाल किया जा रहा था. इन गेम्स में लूडो जैसे लोकप्रिय खेल भी शामिल थे. बताया जा रहा है कि खेल के दौरान बातचीत की शुरुआत होती थी, और फिर धीरे-धीरे इस्लाम धर्म की अच्छाइयों के बारे में बातें करके ब्रेनवॉश किया जाता था. एक बार भरोसा जीत लेने के बाद, उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए आकर्षित किया जाता था. यह गिरोह खासतौर पर असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों, सामाजिक रूप से उपेक्षित वर्गों और मानसिक रूप से परेशान युवाओं को अपना निशाना बना रहा था.

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छांगुर की दुकान में हबीब बैंक के दस्तावेज़
बता दें आपको कि धर्मांतरण का मास्‍टरमाइंड छांगुर बाबा पर पुलिस ने शिकंजा कसा हुआ है. उसके कई ठिकानों पर पुलिस और ईडी की टीम ने छापेमारी की थी. 17 जुलाई को हुई ईडी की छापेमारी के बाद छांगुर की दुकान से कई दस्तावेज बरामद हुए हैं. जिसमें स्विट्जरलैंड के ज़्यूरिख के हबीब बैंक के दस्तावेज़ भी मौजूद थे. दस्तावेज मिलने के बाद ईडी की टीम ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कि धर्मांतरण के तार और किस-किस देश से जुड़े हैं.  

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