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राज्यपाल को ठंडी चाय, गंदी बेडशीट… VIP प्रोटोकॉल की अनदेखी करने पर SDM से लेकर तहसीलदार सब नप गए

राज्यपाल मंगूभाई पटेल के इंदौर दौरे में उनकी मेहमाननवाजी में न केवल कमी रही, बल्कि भारी लापरवाही भी बरती गई. जहां खाना बन रहा था उस रसोई में गंदगी का आलम था. जिससे राज्यपाल रूठ गए और खाना खाए बिना लौट गए.

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मध्य प्रदेश के इंदौर में राज्यपाल के प्रवास में किए गए इंतजामों पर सवाल उठने लगे हैं. जहां राज्यपाल मंगुभाई पटेल ठहरे थे उस रेजीडेंसी कोठी में भारी अव्यवस्थाएं सामने आई हैं. कोठी के जिस किचन में खाना बना, वहां सड़े हुए आलू, कॉकरोच और कीड़े मिले. वहीं, राज्यपाल को ठंडी चाय मिली तो स्टाफ को गंदी बेडशीट दी गई. अव्यवस्थाएं देख मंगुभाई पटेल ने खाना भी एयरपोर्ट पर खाया.

राज्यपाल के नाराजगी जताने के बाद मामले पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने एक्शन लिया. उन्होंने कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. वहीं रेसीडेंसी कोठी में व्यवस्था देख रही फर्म रतन एम्पोरियम की सेवाएं तुरंत प्रभाव से खत्म कर दी गई. इतना ही नहीं कंपनी के लंबित भुगतान में से 20 से 30 फीसदी राशि काटने का फैसला भी लिया गया है. 

क्या है पूरा मामला? 

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दरअसल, मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल इंदौर दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंचे थे. 16 फरवरी को उन्होंने रेसीडेंसी कोठी में रात्रि विश्राम किया. प्रवास के दौरान व्यवस्थाओं में कमी की शिकायत सामने आई. बताया जा रहा है राज्यपाल के OSD ने बेडशीट बदलने का अनुरोध किया गया था, लेकिन व्यवस्था संभाल रही फर्म रतन एम्पोरियम के कर्मचारियों ने समय पर बेडशीट तक नहीं बदली. उन्हें दागदार बेडशीट दी गई. 

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वहीं, सुबह निरीक्षण के दौरान भी किचम में स्वच्छता से जुड़ी कई शिकायतें मिली. इनमें किचन में कीड़े-कॉकरोच और खुले डस्टबीन जैसी अव्यवस्था शामिल हैं. जिस पर राज्यपाल के स्टाफ ने नाराजगी जताई. राज्यपाल ने वहां खाना खाने से मना कर दिया और एयरपोर्ट पर खाना खाया. 

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हालांकि प्रशासन ने कहा है कि किचन में सफाई से जुड़ी कोई शिकायत नहीं है, न ही वहां कीड़ा या कॉकरोच था, लेकिन VIP प्रोटोकॉल को गंभीरता से नहीं लिया गया. अपर कलेक्टर रोशन राय का कहना है कि लापरवाही के लिए डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, श्रम निरीक्षक, आपूर्ति अधिकारी, सीएमएचओ और सिविल सर्जन को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. उधर इस मामले में हाउसकीपिंग कर्मचारियों का कहना है कि उनका वेतन जुलाई 2023 से लंबित है. इनमें से अभी तक केवल 4 लाख रुपए ही जारी किए गए हैं.  

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