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तेजस्वी के लिए राहत की खबर, कांग्रेस समझौते को तैयार... कन्हैया कुमार बोले– महगठबंधन जीता तो RJD से ही बनेगा CM

चुनावी राज्य बिहार में महागठबंधन खेमे से एक बड़ी खबर सामने आई है. विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर उठते सवालों पर अब विराम लगता नजर आ रहा है. दरअसल, कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने साफ तौर पर घोषणा की है कि अगर महागठबंधन को बहुमत मिला, तो मुख्यमंत्री आरजेडी से ही होगा और तेजस्वी यादव इस पद के प्रबल दावेदार होंगे.

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बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. राज्य की सत्ता पर काबिज एनडीए गठबंधन और विपक्षी इंडिया महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर की संभावना जताई जा रही है. दोनों ही खेमों ने चुनावी रणनीति को धार देने के लिए तैयारियां ज़ोर-शोर से शुरू कर दी हैं. वहीं, चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर भी इस बार अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने के लिए मैदान में मजबूती से उतरते दिख रहे हैं. इस बीच महागठबंधन खेमे से एक बड़ी खबर सामने आई है. 

महागठबंधन में कोई भ्रम नहीं: कन्हैया कुमार

आगामी चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि सीटों के बंटवारे से पहले ही महागठबंधन अपने सीएम चेहरे को लेकर स्थिति साफ करना चाहता है, ताकि मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश दिया जा सके. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर उठते सवालों पर अब विराम लगता नजर आ रहा है. दरअसल, कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने साफ तौर पर घोषणा की है कि अगर महागठबंधन को बहुमत मिला, तो मुख्यमंत्री आरजेडी से ही होगा और तेजस्वी यादव इस पद के प्रबल दावेदार होंगे. एक न्यूज़ एजेंसी से बातचीत में कन्हैया कुमार ने कहा, "महागठबंधन के भीतर सीएम फेस को लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं है. तेजस्वी यादव को लेकर किसी तरह की लड़ाई या मतभेद नहीं है." कन्हैया के इस बयान को महागठबंधन के भीतर चल रही चर्चाओं को विराम देने वाला माना जा रहा है. बता दें कि बीते दिनों कांग्रेस के कुछ नेताओं ने तेजस्वी यादव के नाम पर अंतिम मुहर लगाने से परहेज़ किया था, जिससे अटकलें तेज हो गई थीं कि कहीं कांग्रेस अपना कोई अलग दावेदार तो नहीं तलाश रही.

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बीजेपी धीरे-धीरे क्षेत्रीय दलों को निगल रही है: कन्हैया कुमार
कन्हैया कुमार ने कहा कि बीजेपी अपनी पुरानी और आजमाई हुई रणनीति पर काम कर रही है. पहले क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना और फिर धीरे-धीरे उन्हें खत्म कर देना. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में भी बीजेपी इसी नीति पर चल रही है और नीतीश कुमार सिर्फ अस्थायी तौर पर मुख्यमंत्री बने हुए हैं. कन्हैया कुमार ने यह दावा भी किया कि इस बार बिहार में पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में ‘परिवर्तन की हवा’ कहीं अधिक तेज है. उन्होंने कहा कि लोग बदलाव के मूड में हैं और महागठबंधन को इसका सीधा लाभ मिलेगा. कन्हैया कुमार ने यह भी कहा कि बीजेपी “ऑपरेशन सिंदूर” को चुनावी मुद्दा नहीं बना रही है, क्योंकि उसे पता है कि बिहार की जनता इसे सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि देश के सम्मान से जुड़ा मामला मानती है. उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल इसे मुद्दा बनाकर जनता की भावनाओं से नहीं खेल सकता.

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महागठबंधन साझेदारी का मंच 
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने ‘महागठबंधन’ की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया कि इसमें किसी वरिष्ठ या जूनियर पार्टनर का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने कहा कि हर दल की भूमिका अहम है और गठबंधन में सभी सहयोगियों को बराबरी का महत्व दिया जाता है. गठबंधन की तुलना एक कार से करते हुए कन्हैया ने कहा, “अगर आप एक कार को देखें, तो क्लच उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि ब्रेक और रियर व्यू मिरर.” उन्होंने समझाया कि एक सफल राजनीतिक यात्रा के लिए हर सहयोगी दल की जरूरत होती है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा. कन्हैया कुमार ने यह स्वीकार किया कि आरजेडी महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, उसके पास सबसे अधिक विधायक हैं, और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के पास नेतृत्व की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, “यह स्वाभाविक है कि वे नेतृत्व करें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बाकी दलों की भूमिका कम हो जाती है.” कन्हैया ने विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के नेता मुकेश सहनी का उदाहरण देते हुए कहा कि अब वे भी महागठबंधन का हिस्सा हैं, और उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गठबंधन तभी सफल होता है जब उसमें हर सदस्य को सम्मान और जिम्मेदारी दी जाती है 

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