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राजस्थान में भजनलाल सरकार का अवैध खनन पर सख्त एक्शन, BJP बोली-गहलोत राज में मिला माफियाओं को संरक्षण, अब टूट रही कमर

राजस्थान में अरावली पहाड़ियों पर बवाल मचा हुआ है. विपक्षी कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक्टिव हो गए हैं. उन्होंने जैसे ही इस मुद्दे पर सियासत शुरू की, बीजेपी ने गहलोत राज में खनन माफियाओं की कांग्रेसी नेताओं के साथ सांठगांठ और सियासी संरक्षण की पोल खोल दी. बीजेपी ने यह भी बता दिया कि कैसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार खनन माफियाओं की कमर तोड़ रही है.

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राजस्थान में जब से भजनलाल शर्मा की सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ एक्शन लेना शुरू किया है, यह मुद्दा एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है. पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर जिस तरह खनन माफियाओं को प्रश्रय देने और संरक्षण देने के आरोप लगे थे, उसके उलट अब भाजपा सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. हालिया आंकड़े और प्रशासनिक कदम इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि भजनलाल सरकार ने एक तरह से खनन माफिया की कमर ही तोड़ दी है.

बीजेपी लगातार आरोप लगाती आई है कि राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के दौरान खनन माफियाओं के हौसले बुलंद थे. अवैध खनन अपने चरम पर था और यह माफिया बड़े-बड़े राजनीतिक आकाओं के संरक्षण में फल-फूल रहे थे, लेकिन गहलोत सरकार आंख मूंदे बैठी थी.

कांग्रेस शासन में चरम पर था अवैध खनन: बीजेपी

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सरकार और प्रशासनिक लापरवाही इतनी चरम पर थी कि कांग्रेसी विधायकों की ही अपनी सरकार के खिलाफ चीखें निकलनी शुरू हो गई थीं. ज्ञात हो कि कांग्रेस सरकार के दौरान अवैध खनन को लेकर सबसे तीखी आवाज़ पार्टी के भीतर से ही उठी थी. 

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जब अवैध खनन को लेकर अपनी ही सरकार पर बरसे थे कांग्रेस विधायक भरत सिंह!

कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया को “भू-माफिया” बताते हुए उनकी बर्खास्तगी की मांग की थी. भरत सिंह ने खुले तौर पर आरोप लगाया था कि अवैध रेत खनन और पहाड़ों की कटाई राजनीतिक संरक्षण में हो रही है. इतना ही नहीं, तत्कालीन विधायक भरत सिंह ने यह भी कहा था कि राजस्थान में कई पहाड़ पूरी तरह गायब हो चुके हैं और कुछ इलाकों में मैदानों पर कचरा डालकर कृत्रिम पहाड़ खड़े किए जा रहे हैं, जो पर्यावरणीय असंवेदनशीलता का प्रतीक है.

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कांग्रेस राज में राजस्थान में भी जोशीमठ जैसे हालात की सताने लगी थी चिंता!

2023 में कांग्रेस सरकार के दौरान मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता महेंद्र कच्छावा ने चेतावनी दी थी कि अवैध खनन और राजस्थान एक-दूसरे के पर्याय बनते जा रहे हैं. उनके अनुसार, खनन माफियाओं ने जंगलों तक में दखल दे दिया है और रणथंभौर, जवाई अभयारण्य तथा सांभर झील जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियां हुई हैं.

कच्छावा ने कहा था कि जंगलों में 30 फीट तक गहरे गड्ढे खोदे गए हैं, यहां तक कि बाघिनों के प्रजनन क्षेत्र भी सुरक्षित नहीं रहे. उनका कहना था कि यदि यही हाल रहा, तो राजस्थान भी भविष्य में जोशीमठ जैसी आपदा का सामना कर सकता है. सीएजी और सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्टों में भी यह सामने आया था कि अरावली क्षेत्र में 31 पहाड़ या पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं और खनन नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ है.

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खनन माफियाओं की कमर तोड़ रही भजनलाल सरकार!

महेंद्र कच्छावा की चेतावनियों और गहलोत सरकार पर लगे माफियाओं को संरक्षण देने के आरोपों के विपरीत, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान की बीजेपी सरकार ने पेड़-पहाड़, जल और जंगल को बचाने की मुहिम छेड़ दी है. सीएम शर्मा के सत्ता संभालने के बाद से अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि कार्रवाई के स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.

अवैध खनन के खिलाफ एक्शन-आंकड़े दे रहे गवाही!

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वर्ष 2023 में कांग्रेस शासन के दौरान अवैध रेत खनन के 1,846 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2024 में भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह संख्या बढ़कर 2,514 हो गई. इसी तरह, 2023 में 2,360 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, जबकि 2024 में 3,583 लोगों को गिरफ्तार किया गया. अवैध रेत की जब्ती भी कई गुना बढ़ी है. 2023 में 24,456 टन रेत जब्त की गई थी, जबकि 2024 में 94,952 टन अवैध रेत जब्त की गई.

ऐसे हो रही कार्रवाई?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अरावली क्षेत्र, वन क्षेत्रों और नदी-घाटियों में निगरानी बढ़ाई गई है. ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट मैपिंग और विशेष टास्क फोर्स के माध्यम से अवैध खनन की पहचान की जा रही है. कई जिलों में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने में जुटी हैं.

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2023 में पर्यावरणविदों ने राजस्थान में जिस जोशीमठ जैसी आपदा की चेतावनी दी थी, उस पर सरकार अब ठोस कार्रवाई कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा कार्रवाई निरंतर और निष्पक्ष रही, तो राजस्थान को भविष्य में बड़ी पर्यावरणीय तबाही से बचाया जा सकता है. अपने रेगिस्तानों के लिए मशहूर राजस्थान में अवैध खनन अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि पर्यावरण, वन्यजीव और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बन चुका है. ऐसे में भजनलाल सरकार की कार्रवाई आने वाले दिनों में निर्णायक साबित हो सकती है.

पेपर चोर, अब अरावली के नाम पर कर रहे राजनीति: बीजेपी

बीजेपी का कहना है कि भजनलाल शर्मा की सरकार पहाड़, पेड़ और पानी की पूजा करने वाली सरकार है. उसके राज में खनन माफिया रोज जेल जा रहे हैं. बीजेपी का आरोप है कि अब कांग्रेस अपनी काली कमाई से दूरी बनाने के लिए अरावली के नाम पर राजनीति कर रही है, जबकि उनके कार्यकाल में यही माफिया राजस्थान को लूट रहे थे. बीजेपी ने कांग्रेस को “पेपर चोर” और “राजस्थान को बेचने वाला” बताते हुए कहा कि ये माफिया कांग्रेस के संरक्षण में थे और अवैध खनन का पैसा कांग्रेस नेताओं की जेब में जा रहा था.

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क्या है हालिया अरवाली पहाड़ी विवाद?

गौरतलब है कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को #SaveAravalli कैंपेन को समर्थन देते हुए एकजुटता दिखाने के लिए अपनी सोशल मीडिया डिस्प्ले पिक्चर (DP) बदल दी. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ फोटो बदलने का प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि उस नई परिभाषा के खिलाफ विरोध है, जिसके तहत 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ियों को अब अरावली रेंज का हिस्सा नहीं माना जाएगा. इस पर बीजेपी ने गहलोत सरकार के दौरान हुई कथित लूट, अरावली क्षेत्र में खनन माफियाओं की कमाई और कांग्रेसी नेताओं के साथ उनकी सांठगांठ की पोल खोल दी है.

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यहां यह भी गौरतलब है कि खनन के लिए 100 मीटर की छूट गहलोत के ही शासनकाल में दी गई थी और उसी निर्णय से अरावली में आज की 'नई 100 मीटर परिभाषा' की नींव पड़ी. अब जब गहलोत अरावली बचाओ आंदोलन का हिस्सा बनने की बात कर रहे हैं, तो उस दौर की तमाम संबंधित फाइलें सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि जनता समझ सके कि सत्ता के सुर बदलते ही नीतियों का पैमाना कितनी आसानी से ऊपर-नीचे हो जाता है.

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