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पंजाब को बाढ़ से उबरने के लिए चाहिए 20,000 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद, वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने केंद्र से की अपील

पंजाब की वर्तमान स्थिति गंभीर है और आर्थिक मदद की तत्काल आवश्यकता है. हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से समय पर और पर्याप्त सहायता देने की अपील की है. साथ ही, उन्होंने राजनीतिक संवेदनशीलता दिखाते हुए यह संदेश दिया कि पंजाब की समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा.

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पंजाब में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों को भारी नुकसान पहुँचाया है. खेत, घर, सड़कें और बुनियादी ढाँचा तबाह हो गए हैं, वहीं कई लोगों की जान भी गई है. ऐसे में पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है. वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र पर पंजाब के लोगों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए 20,000 करोड़ रुपए की राहत राशि की मांग की है.

राहत पैकेज को बताया 'ऊंट के मुंह में जीरा'

हरपाल चीमा ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान के बाद केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया बेहद धीमी और अपर्याप्त रही है. उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार को तालिबान नियंत्रित अफगानिस्तान की याद कुछ ही घंटों में आ गई, जबकि पंजाब में बाढ़ से हुए नुकसान की याद 28 से 30 दिनों में आई है.” 

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उन्होंने केंद्र द्वारा दिए गए 1,600 करोड़ रुपए के राहत पैकेज को ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ बताया और कहा कि यह राशि पंजाब के लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. उन्होंने कहा कि पंजाब ने देश की आज़ादी और आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में सबसे अधिक बलिदान दिए हैं, फिर भी राज्य के साथ अनदेखा व्यवहार किया जा रहा है.

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20,000 करोड़ की आर्थिक मदद की मांग

हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए कम से कम 20,000 करोड़ रुपए की जरूरत है. उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि यह राशि जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए ताकि राहत कार्यों को गति मिल सके और लोगों को आवश्यक मदद मिल सके.

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प्रधानमंत्री के दौरे पर सवाल

हरपाल चीमा ने प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने राज्य सरकार को नजरअंदाज कर केवल अपनी पार्टी के नेताओं से मुलाकात की. “अगर सिर्फ पार्टी के लोगों से मिलना था, तो वे दिल्ली में कार्यकारिणी की बैठक बुला सकते थे. वे किसी बाढ़ पीड़ित से नहीं मिले.” उन्होंने इसे राज्य के लोगों के साथ असंवेदनशीलता बताया और कहा कि इससे लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ा है.

तीनों काले कृषि कानून वापस कराने का हवाला

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हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब के लोगों ने देशहित में कई बलिदान दिए हैं. उन्होंने याद दिलाया कि किसानों ने तीनों काले कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर उन्हें वापस करवाया था. उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वे पंजाब के प्रति नफरत छोड़ें और राज्य के लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लें.

‘जिसका खेत उसका रेत’ से किसानों को मिलेगा लाभ

वहीं, हरपाल चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा लागू की गई ‘जिसका खेत उसका रेत’ नीति की सराहना की. उन्होंने कहा कि इससे किसानों को बाढ़ के बाद खेती में मदद मिलेगी और उन्हें नुकसान से उबरने में सहायता मिलेगी.

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खेती, घर और जीवन पर भारी असर

उन्होंने कहा कि बाढ़ ने न केवल खेतों और घरों को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि कई लोगों की जान भी चली गई है. ऐसे समय में उचित सहायता, योजनाबद्ध पुनर्निर्माण और समय पर राहत कार्य आवश्यक हैं ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके.

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पंजाब की वर्तमान स्थिति गंभीर है और आर्थिक मदद की तत्काल आवश्यकता है. हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से समय पर और पर्याप्त सहायता देने की अपील की है. साथ ही, उन्होंने राजनीतिक संवेदनशीलता दिखाते हुए यह संदेश दिया कि पंजाब की समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा. मुख्यमंत्री भगवंत मान की नीतियों की भी उन्होंने प्रशंसा की और कहा कि इससे किसानों को राहत मिलेगी.

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