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महाकुंभ मेला क्षेत्र को अग्नि दुर्घटना मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए पहली बार फायरबोट्स के संचालन की तैयारी हुई पूरी
महाकुंभ को अग्नि दुर्घटना रहित क्षेत्र बनाने के लिए विभाग को 66.75 करोड़ का बजट आवंटित हुआ है, जबकि विभागीय बजट 64.73 करोड़ है। इस प्रकार, कुल 131.48 करोड़ रुपए की लागत से वाहन व उपकरणों को महाकुंभ मेला में अग्नि जनित दुर्घटनाओं से सुरक्षा के लिए तैनात किया जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश में महाकुंभ-2025 को लेकर तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। इसी क्रम में, उत्तर प्रदेश अग्निशमन व आपात सेवा विभाग भी मेला क्षेत्र को अग्नि दुर्घटना मुक्त क्षेत्र बनाने के प्रयासों में तेजी से कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में देश और कुंभ के इतिहास में पहली बार महाकुंभ-2025 में 6 फायरबोट्स के संचालन की तैयारी पूरी कर ली गई है।
घाटों के किनारे मुस्तैद रखे जाएंगे ये फायर बोट्स
इन फायर बोट्स को मेला क्षेत्र के घाटों के किनारे मुस्तैद रखा जाएगा। यह फायर फाइटिंग बोट्स न केवल नदियों किनारे घाटों पर होने वाली अग्नि जनित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्विक रिस्पॉन्स प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायक होंगी, बल्कि जोखिम से भरे फायर ऑपरेशंस को अंजाम देने के साथ ही अग्निरक्षकों की सुरक्षा के लिए भी कवच के तौर पर कार्य करेंगी।
महाकुंभ को अग्नि दुर्घटना रहित क्षेत्र बनाने के लिए विभाग को 66.75 करोड़ का बजट आवंटित हुआ है, जबकि विभागीय बजट 64.73 करोड़ है। इस प्रकार, कुल 131.48 करोड़ रुपए की लागत से वाहन व उपकरणों को महाकुंभ मेला में अग्नि जनित दुर्घटनाओं से सुरक्षा के लिए तैनात किया जा रहा है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी और महाकुंभ के नोडल अधिकारी प्रमोद शर्मा ने बताया कि इन छह फायर फाइटिंग बोट्स के लिए विभाग 1.38 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में इनको संगम समेत अन्य तटों पर तैनात कर दिया जाएगा।
फायर फाइटिंग रोबोट्स भी है इसकी खासियत
उन्होंने बताया कि फायर फाइटिंग बोट्स को अपने क्विक रिस्पॉन्स, नदियों में तेजी से नेविगेशन की क्षमता व अग्निशमन की प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने के लिए जाना जाता है। खासतौर पर नदियों किनारे घाटों पर अग्निशमन व रेस्क्यू ऑपरेशंस को तेजी से पूरा करने में फायरबोट काफी कारगर है। इसकी एक खासियत यह भी है कि इसमें फायर फाइटिंग रोबोट्स को भी तैनात किया जाता है, जो बोट की वॉटर कैनन रेंज से दूर घटनास्थल पर रिमोट कंट्रोल्ड एक्सेस के जरिए पहुंचकर फायर फाइटिंग ऑपरेशंस को अंजाम देने में सक्षम हैं।
खासतौर पर ऐसे क्षेत्र जहां अत्याधिक तापमान हो या फिर जहां एक्सप्लोसिव मैटेरियल्स में आग लगी हो, ऐसी स्थिति में वह न केवल रेस्क्यू ऑपरेशंस को अंजाम देकर जानमाल की रक्षा करने में सक्षम हैं, बल्कि अग्निरक्षकों के जीवनरक्षण और उनकी सुरक्षा में कवच का कार्य भी करते हैं।
डिप्टी डायरेक्टर अमन शर्मा ने बताया कि सीएम योगी के विजन अनुसार, इस बार महाकुंभ में अलग-अलग प्रकार के 351 से अधिक अग्निशमन वाहन, 2,000 से अधिक ट्रेंड मैनपावर, 50 से अधिक अग्निशमन केंद्र व 20 फायर पोस्ट बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक अखाड़ों के टेंट्स को फायर फाइटिंग इक्विप्मेंट्स से भी लैस किया जा रहा है।
वहीं, नागपुर में गृह मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय अग्निशमन महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के 30 विद्यार्थियों की मेला क्षेत्र में बतौर फायर वॉलेंटियर्स भी तैनाती की जाएगी। इसमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश के ही हैं और यह सभी विद्यार्थी एडवांस्ड फायर फाइटिंग स्किल्स, अवेयरनेस ड्राइव्स को कंडक्ट कराने में मुख्य भूमिका निभाएंगे।
Input: IANS
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