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यमुनानगर में सरकारी जमीन पर रह रहे लोगों को मिलेगा मालिकाना हक, CM नायब सिंह सैनी का बड़ा ऐलान
Haryana CM: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि अब छछरौली में बसने वाले लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा. इसका मतलब यह है कि जो लोग सालों से इस जमीन पर रह रहे हैं, उन्हें अब कानूनी रूप से उनकी जमीन का अधिकार मिलेगा.
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Haryana CM: यमुनानगर जिले के छछरौली (प्रताप नगर) में सरकारी जमीन पर रहने वाले हजारों लोगों के लिए बड़ा खुशखबरी का ऐलान हुआ है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि अब छछरौली में बसने वाले लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा. इसका मतलब यह है कि जो लोग सालों से इस जमीन पर रह रहे हैं, उन्हें अब कानूनी रूप से उनकी जमीन का अधिकार मिलेगा.
कब्जाधारियों को मिलेगा मालिकाना हक
मुख्यमंत्री ने बताया कि छछरौली की अधिकांश जमीन गैर मुमकिन आबादी के रूप में चिन्हित है और यह जमीन 1887 से सरकार के पास रही है. पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग इस जमीन पर रहते आए हैं. 2020 तक इन संपत्तियों की रजिस्ट्रियां होती थीं, लेकिन बाद में रजिस्ट्रियां बंद हो गईं. इससे लोगों को डर था कि उनकी जमीन पर अब उनका अधिकार खत्म हो जाएगा.
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इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने जनभावनाओं और जरूरत को ध्यान में रखते हुए छछरौली की खबरा नंबर 125, 152 और 134 की जमीन का मालिकाना हक कब्जाधारियों को देने का निर्णय लिया. मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि जमीन पर बसे लोगों के कब्जे का पूरा रेकॉर्ड जांचा जाएगा. प्रशासन की टीम सर्वे करेगी और रेकॉर्ड के सत्यापन के बाद जमीन का मालिकाना हक लोगों के नाम कर दिया जाएगा.
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जमीन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
छछरौली की जमीन की कहानी भी बहुत पुरानी है. देश की आजादी से पहले यह कलसिया रियासत की राजधानी थी. 1760 में सरदार गुरबख्श सिंह ने अपनी रियासत स्थापित की थी, जो लगभग 435 वर्ग किलोमीटर में फैली थी और इसके अधीन 181 गांव थे. उस समय यहां डेराबसी रियासत की तहसील थी. अदालतें, खजाना और म्युनिसिपल दफ्तर किले में ही स्थित थे.
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1908 में छछरौली के सरदारों को राजा का दर्जा मिला. इसके बाद भी यह इलाका सरकार के अधीन रहा, और अब सरकारी जमीन पर रहने वाले लोगों को उनका अधिकार देने का निर्णय लिया गया है.
आम लोगों के लिए महत्व
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इस फैसले से छछरौली में रहने वाले परिवारों को लंबा समय से इंतजार था. अब उन्हें कानूनी रूप से उनका मालिकाना हक मिलेगा. यह कदम न केवल लोगों की सुरक्षा और अधिकार को सुनिश्चित करेगा, बल्कि उनकी जिंदगी को भी स्थिर और भरोसेमंद बनाएगा.सरकार की यह पहल यह दिखाती है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी रह रहे लोगों को असुरक्षित नहीं छोड़ा जाएगा और उनकी जरूरतों और भावनाओं का ख्याल रखा जा रहा है.