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नोएडा इंजीनियर मौत मामला: CM योगी का ताबड़तोड़ एक्शन, CEO नपे, आरोपी बिल्डर अरेस्ट

बताया जा रहा है कि इस केस के बाद CM योगी खुद गुस्से में हैं और उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई है. एक पिता के सामने उनके बेटा डूबता रहा जबकि सिस्टम के जिम्मेदार वही मौजूद थे.

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Noida Engineer Death Case: UP के नोएडा के सेक्टर 150 में बेसमेंट के पानी में डूबकर हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में अब ताबड़तोड़ एक्शन लिए जा रहे हैं. पहले नोएडा प्राधिकरण के CEO एम लोकेश को हटाया गया. अब नामजद बिल्डर अभय कुमार को अरेस्ट कर लिया गया है, लेकिन अफसोस की बात ये है कि ये कार्रवाई तब हुई जब एक 27 साल का नौजवान मारा गया. आखिरकार सिस्टम एक जान लेकर ही जागा. 

इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया. फिर एक के बाद एक एक्शन हुए और अब दोषी बिल्डर भी नप गए. नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने दो बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन और लोटस ग्रीन के खिलाफ मामला दर्ज किया था. बिल्‍डर अभय सिंह एमजेड विश्टाउन के मालिक हैं. 

मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? 

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CM योगी के निर्देश पर नोएडा प्राधिकरण के CEO डॉ. एम लोकेश को हटाया गया
मामले की हाईलेवल जांच के लिए मेरठ जोन के ADG भानू भास्कर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय SIT गठित की गई
SIT टीम 5 दिन में जांच पूरी कर मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेगी 

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सिस्टम की नाकामी, निकम्मेपन को उजागर करती इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए. आगे ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए CM योगी ने एक्शन लेते हुए पूरे राज्य में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर तुंरत सही करने के निर्देश दिए. इस घटना में नोएडा ऑथोरिटी से लेकर  फायर ब्रिगेड और पुलिस प्रशासन की कलई खोल दी. बताया जा रहा है कि इस केस के बाद CM योगी खुद गुस्से में थे और उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई. एक पिता के सामने उनके बेटा डूबता रहा जबकि सिस्टम के जिम्मेदार वही मौजूद थे, लेकिन कोई बेटे को बचाने नहीं आया. इसी से आहत CM योगी ने फटकार लगाते हुए SIT टीम गठित की. 

जानें क्या हुआ था, पूरा घटनाक्रम 

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16 जनवरी की देर रात युवराज गुरुग्राम से ग्रेटर नोएडा घर लौट रहे थे. घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के कारण सेक्टर-150 के टी-प्वाइंट पर कार अनियंत्रित हुई. कार नाले की दीवार तोड़कर निर्माणाधीन मॉल के पानी भरे बेसमेंट में गिरी. कार गिरते ही युवराज ने बाहर निकलने की कोशिश की. फिर 12.20 बजे के आस-पास पिता को कॉल किया. फोन उठाते ही उसने पिता को बोला पापा, मैं नाले में गिर गया हूं, मैं मरना नहीं चाहता हूं. मुझे बचा लीजिए. नाला सोसाइटी से महज 200 मीटर ही दूर था. पिता दौड़े-दौडे पहुंचे, करीब आधे घंटे तक बेटे को ढूंढा. पिता की आवाज सुनकर बेटा भी चिल्लाया. कार पानी में थी और बेटा उसकी छत पर लेटा हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे डूब रहा था. वो लगातार मोबाइल की लाइट को जला और बुझा रहा था, ताकि किनारे पर खड़े पिता जान सकें कि वो जिंदा है. 

इसके बाद डायल-112 पर फोन किया गया. वहां कई लोग थे लेकिन किसी ने युवराज को बाहर निकालने में मदद नहीं की. इस दौरान लोग वीडियो बनाते रहे. जबकि पिता बेटे को बचाने की गुहार लगाता रहा. वहीं, पुलिस और दमकल की गाड़ी भी पहुंच चुकी थी. रस्सी फेंककर बचाने की कोशिश की गई, लेकिन रस्सी युवराज तक पहुंची ही नहीं. किसी ने भी पानी में उतरने की जहमत नहीं की. पिता के मुताबिक, पुलिस अधिकारी कह रहे थे कि पानी बहुत ठंडा है, कैसे जाएं. कोई कह रहा था कि साइट में नीचे सरिया हो सकती हैं. जहां पूरा प्रशाशनिक अमला खड़ा था वहां एक डिलीवरी बॉय ने हिम्मत दिखाई और उस गड्डे में कूद गया क्योंकि इसके अंदर की मानवता शायद जिंदा थी. हालांकि युवराज की जान बच ना सका. बाद में क्रेन मंगवाई गई वो भी युवराज तक नहीं पहुंच सकी. करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद युवराज को बाहर निकाला गया, लेकिन जिंदा नहीं मुर्दा. 

कई बार शिकायत, सोता रहा प्राधिकरण 

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पिता राजकुमार मेहता ने बेटे युवराज की मौत के लिए नोएडा ऑथोरिटी को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने बताया, सोसायटी के लोग पहले भी कई बार शिकायत दे चुके थे, यहां न तो लाइट है, न रिफ्लेक्टर है, न बैरिकेडिंग, न ही साइन बोर्ड. टूटी हुई ड्रेन तक सही नहीं करवाई गई. इसका नतीजा ये हुआ कि युवराज की जान चली गई और बेबस पिता आंखों के सामने बेटे को मरता देखता रहा. 

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