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'SGPC' चुनाव में शामिल हुए 15 लाख से अधिक लोग, पूर्व अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने बताई पंथ की जीत, सुखबीर बादल ने उठाए थे समिति पर सवाल

"श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित समिति ने पूरे पंजाब में भर्ती प्रक्रिया चलाई, जिसमें लगभग 15 लाख सदस्य शामिल हुए, जो पंथ के लिए खुशी और गर्व का विषय है." लोंगोवाल ने कहा, "डेलीगेट आज हजूरी में बैठकर अपना अध्यक्ष चुनेंगे. इसके अलावा, कार्यकारी अध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों का भी चयन किया जाएगा." उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की सभी प्रक्रियाएं अध्यक्ष के नेतृत्व में होंगी.

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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के पूर्व अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने सोमवार को एसजीपीसी के अध्यक्ष के लिए हो रही चुनाव प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त किया. उन्होंने साफ किया कि अध्यक्ष के साथ अन्य पदों के लिए भी चुनाव होंगे. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के पूर्व अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल सोमवार को आयोजित पांच सदस्यीय भर्ती समिति की बैठक में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने एसजीपीसी के पदाधिकारी भर्ती प्रक्रिया में 15 लाख से अधिक सदस्यों के हिस्सा लेने की तारीफ की और इसे ‘पंथ की जीत’ बताया.

'SGPC' चुनाव में शामिल हुआ लाखों लोगों ने लिया भाग
इस दौरान गोबिंद सिंह लोंगोवाल मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित समिति ने पूरे पंजाब में भर्ती प्रक्रिया चलाई, जिसमें लगभग 15 लाख सदस्य शामिल हुए, जो पंथ के लिए खुशी और गर्व का विषय है." लोंगोवाल ने कहा, "डेलीगेट आज हजूरी में बैठकर अपना अध्यक्ष चुनेंगे. इसके अलावा, कार्यकारी अध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों का भी चयन किया जाएगा." उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की सभी प्रक्रियाएं अध्यक्ष के नेतृत्व में होंगी.

अकाल तख्त के आदेश के तहत ही हुई पूरी कार्यवाही
पूर्व अध्यक्ष ने कहा, "श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के मुताबिक ही सारी कार्यवाही हो रही है और भर्ती समिति पूरी तरह वैध है. यह कदम पंथ की एकजुटता और मजबूती के लिए आवश्यक था."

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सुखबीर बादल और अन्य नेताओं ने उठाए थे सवाल
सुखबीर बादल और अन्य नेताओं द्वारा समिति पर उठाए गए सवालों पर लोंगोवाल ने कहा, "पांच सदस्यीय समिति को श्री अकाल तख्त साहिब और जथेदार का समर्थन प्राप्त है. जो लोग इसे मान्यता नहीं देते, वे पंथ एकता के हित में नहीं सोच रहे."

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उन्होंने बताया, "2 अगस्त को सिंह साहिबानों के आदेश के बाद से ही यह प्रक्रिया शुरू हुई, और उसी के तहत आज का ऐतिहासिक दिन संभव हुआ है. पंथ, पंजाबी भाषा, संस्कृति और जमीन की रक्षा के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा और पंथ विरोधी ताकतों को हराना समय की मांग है."

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