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उत्तराखंड में 'ग्रामोत्थान परियोजना' के तहत 10 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा, “ग्रामोत्थान परियोजना का उद्देश्य सीमित आय वाले ग्रामीण परिवारों को उनके कौशल और स्थानीय संसाधनों से जोड़ते हुए आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है. यह योजना निर्धनतम परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है.”

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उत्तराखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों की आय वृद्धि के लिए ग्रामोत्थान परियोजना (ग्रामीण उद्यम वेगवृद्धि परियोजना) शुरू की है. इससे अब तक 10 हजार से अधिक जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त करने में सफलता प्राप्त हुई है.

‘ग्रामोत्थान परियोजना’ 13 जिलों में  लागू

वर्ष 2023 में शुरू हुई इस योजना को अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास निधि की आर्थिक सहायता और ग्राम्य विकास विभाग के सहयोग से प्रदेश के सभी 13 जिलों के 95 विकास खंडों में लागू किया गया है.

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इस परियोजना उद्देश्य स्वरोजगार और उद्यम के अवसर उपलब्ध कराना

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परियोजना का मुख्य उद्देश्य सीमित आय वाले ग्रामीण परिवारों को स्थानीय संसाधनों और उनके कौशल के अनुसार स्वरोजगार और उद्यम के अवसर उपलब्ध कराना है. कुल 2789.27 करोड़ रुपए की लागत से संचालित इस परियोजना में 5.60 लाख निर्धन परिवारों को शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. अब तक 3.24 लाख से अधिक परिवार इससे जुड़ चुके हैं.

इस योजना के अंतर्गत 10,732 परिवारों को मिला लाभ 

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परियोजना के अंतर्गत चयनित 10 हजार अति निर्धन परिवारों को विशेष पैकेज के तहत दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गीपालन और रिटेल रिपेयर शॉप जैसे रोजगारों से जोड़ा गया है. सराहनीय यह है कि योजना के पहले दो वर्षों में ही 10 हजार की तुलना में 10,732 परिवारों को इस योजना का लाभ मिल चुका है.

इसके अलावा, 7341 परिवारों की वार्षिक आय में 1.5 लाख रुपए से अधिक की वृद्धि हुई है, वहीं 3751 महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपए के पार पहुंच चुकी है.

CM धामी ने किया बड़ा ऐलान 

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा, “ग्रामोत्थान परियोजना का उद्देश्य सीमित आय वाले ग्रामीण परिवारों को उनके कौशल और स्थानीय संसाधनों से जोड़ते हुए आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है. यह योजना निर्धनतम परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है.”

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यह परियोजना न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में ग्रामीणों को सशक्त बना रही है, बल्कि ग्रामीण उद्यमशीलता को भी नए आयाम दे रही है.

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