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देवभूमि हरिद्वार में बड़ा हादसा... मनसा देवी मंदिर में मची भगदड़, अब तक 6 की मौत, 15 घायल; CM धामी ने जताया दुख

रविवार सुबह उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में भारी भीड़ के चलते भगदड़ मच गई. हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई और कई श्रद्धालु घायल हो गए. शुरुआती जांच में अधिक भीड़ को हादसे की वजह बताया गया है. सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन मौके पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू किया गया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख जताते हुए लगातार हालात की निगरानी की बात कही है.

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देवभूमि हरिद्वार जो आमतौर पर श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है, रविवार की सुबह एक दर्दनाक हादसे का गवाह बना. प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में उस वक्त कोहराम मच गया जब भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई. इस दर्दनाक हादसे में छह लोगों की जान चली गई, जबकि कई श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला और सीढ़ियों पर लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे.

बिजली का करंट लगने की आशंका 

रविवार की सुबह, जैसे ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर की ओर बढ़ने लगी, सीढ़ियों वाले रास्ते पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए सीढ़ियों का एक संकरा मार्ग है, जहां अचानक भगदड़ मचने लगी. शुरूआती रिपोर्ट्स के अनुसार, भगदड़ की असली वजह बिजली का करंट लगना हो सकती है, हालांकि प्रशासन इस बात की अभी जांच कर रहा है. जैसे ही खबर फैली कि करंट लगा है, लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए. मंदिर में रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे. सप्ताहांत होने की वजह से भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा इंतज़ाम कम थे और लोगों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी. इसी लापरवाही के कारण हादसे की स्थिति पैदा हुई.

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मुख्यमंत्री धामी ने जताया शोक

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा, "हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर मार्ग में भगदड़ मचने का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है. स्थानीय पुलिस तथा अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं. इस संबंध में निरंतर स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हूं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. माता रानी से सभी श्रद्धालुओं के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूँ." मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाएगी और हादसे के कारणों की गहन जांच की जाएगी. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, अगर कोई लापरवाही सामने आती है.

राहत कार्य में जुटा प्रशासन 

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जैसे ही घटना की सूचना मिली, स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. घायलों को हरिद्वार के नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि वह स्वयं घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं.

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हादसे के बाद हरिद्वार के स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है. उनका कहना है कि मंदिर क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन की तैयारियां अक्सर कमजोर रहती हैं. लोगों का यह भी आरोप है कि न तो सीढ़ियों पर बैरिकेडिंग थी और न ही कोई बिजली की लाइन पूरी तरह सुरक्षित थी. ऐसे में करंट लगने की अफवाह से भगदड़ मच जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं. हालाँकि इस पूरे मामले की जांच शुरू हो चुकी है. पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि भगदड़ की असली वजह क्या थी और क्या इसमें किसी की लापरवाही जिम्मेदार है. उत्तराखंड सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा जल्द की जा सकती है.

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