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बोनट पर लटका पीड़ित लगाता रहा गुहार, ड्राइवर ने नहीं रोकी कार… तड़पकर तोड़ा दम, लखनऊ में फिर हिट एंड रन

विमल ड्राइवर से कार रोकने की अपील करता रहा, लेकिन ड्राइवर ने कार रोकने की बजया तेज रफ्तार में भगाई, जिससे वह नीचे गिर गया और दम तोड़ दिया.

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जयपुर, कानपुर, दिल्ली और लखनऊ… पिछले कुछ दिनों में ये शहर हिट एंड रन के मामले को लेकर चर्चा में आ गए. अब नया मामला लखनऊ से ही सामने आया है. जहां कृष्णानगर इलाके में कार की टक्कर से एक शख्स की मौत हो गई. टक्कर इतनी तेज थी कि शख्स उछलकर कार के बोनट पर जा गिरा, लेकिन अंसवेदनशील ड्राइवर कार रोकने की बजाय कार को भगाता रहा. 

कार की तेज रफ्तार के कारण पीड़ित बोनट से सड़क पर गिर गया और ड्राइवर कार लेकर फरार हो गया. यह मामला 18 फरवरी का है. मृतक का नाम विमल पाल है जो बदांयू के निजामपुर के रहने वाले थे. वह कृष्णानगर में पराग चौराहे के पास ठेला लगाते थे. विमल का परिवार भी कृष्णानगर में ही रहता था. 

तो बच जाती विमल की जान… 

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परिजनों के मुताबिक, विमल अपना लैया चना का ठेला लेकर घर जा रहा था. घर से कुछ दूर पहले रास्ते में एक तेज रफ्तार वैगनआर कार ने पीछे से टक्कर मार दी. इससे वह उछलकर कार के बोनट पर जा गिरा. इस दौरान विमल ड्राइवर से कार रोकने की अपील करता रहा, लेकिन ड्राइवर ने कार रोकने की बजया तेज रफ्तार में भगाई. जिससे विमल नीचे गिर गया और उसे गंभीर चोट लगी. 

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विमल को गंभीर हालत में हॉस्पिटल पहुंचाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. अगर ड्राइवर ने कार रोक दी होती तो विमल जिंदा होता. इस मामले में अभी तक आरोपी को अरेस्ट नहीं किया गया है. कृष्णानगर इंस्पेक्टर पीके सिंह का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच की जाएगी. 

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इससे पहले लखनऊ से ही हिट एंड रन का मामला सामने आया था. जिसमें 6 साल के बच्चे की मौत हो गई थी. यह हादसा लखनऊ के बंथरा इलाके में 12 फरवरी को हुआ था. जब हनुमान मंदिर के पास कार सवार छात्र स्कूल के फंक्शन से लौट रहा था. तेज रफ्तार कार बेकाबू हो गई और सड़क पर 6 लोगों को रौंदते हुए चली गई. 

कानपुर का लैंबॉर्गिनी केस?

हिट एंड रन के मामले में कानपुर का लैंबॉर्गिनी केस भी काफी चर्चा में रहा था. यहां 8 फरवरी को कानपुर के बड़े तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा ने तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार से कई लोगों को टक्कर मार दी. इस घटना में कारोबारी का आरोपी बेटा 4 दिन बाद अरेस्ट किया गया लेकिन महज 4 घंटे में उसे जमानत भी मिल गई. जिसके बाद पुलिस पर कई सवाल उठे. 

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इससे पहले 3 फरवरी को दिल्ली में स्टंटबाज ने स्कॉर्पियो कार से 23 साल के साहिल को रौंद दिया था. साहिल अपनी बाइक से घर जा रहा था. पुलिस के मुताबिक, इस हादसे के वक्त गाड़ी कोई अनुभवी ड्राइवर नहीं, बल्कि एक नाबालिग चला रहा था. उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं था. टक्कर इतनी जोरदार थी कि साहिल को कुचलने के बाद SUV सड़क किनारे खड़ी एक अन्य कैब से जा भिड़ी, जिससे कैब चालक भी गंभीर रूप से घायल हो गया. जबकि साहिल की जान चली गई. विडंबना ये है कि आरोपी को अरेस्ट तो किया गया लेकिन बोर्ड परीक्षा के नाम पर उसे रिहा कर दिया गया. जिस आरोपी ने एक घर में हमेशा के लिए अंधेरा कर दिया. उसका भविष्य उज्जवल करने के लिए छोड़ दिया गया. हिट एंड रन के ज्यादातर मामलों में आरोपी ऐसे ही आराम से बच निकल जाते हैं. प्रशासन की ये ही नाकामी बिगड़ैल रईसजादों और लापरवाह लोगों के हौसलों को बुलंद करती है. 

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