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सीएम उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस पर कसा तंज, कहा- जब हार जाते हैं तो EVM का बहाना बनाने लगते हैं
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा है कि 'चुनाव प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस से जो भी बात आप सुनते हैं. वह कांग्रेस का खुद का मत है. मैं इन बातों को साझा नहीं करता. इसका कारण बहुत स्पष्ट है. अगर मैं किसी चीज में सफल नहीं हो रहा हूं, तो इसको लेकर बहाना नहीं बनाता हूं. अगर मुझे चुनाव परिणामों से किसी भी तरह की समस्या है, तो मुझे जीत के समय में भी यह समस्या होनी चाहिए.'
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस पर जमकर मजे लिए हैं. उन्होंने कांग्रेस की खिंचाई करते हुए कहा है कि जब चुनाव जीत नहीं पा रहे हैं, तो बहाने बनाते हैं. ईवीएम पर उंगली उठाते हैं. गौरतलब है कि ज्यादातर चुनाव में जब भी कांग्रेस पार्टी की हार होती है, तो वह ईवीएम और चुनाव आयोग पर हार का ठीकरा फोड़ने लगती है. बता दें कि साल 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने अपनी हार पर ईवीएम पर निशाना साधते हुए चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता और पारदर्शिता का आरोप लगाया था. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने इंडिया गठबंधन को भी निशाने पर लिया.
'जब आप हार जाते हैं, तब ईवीएम का बहाना बनाते हैं'
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि 'चुनाव प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस से जो भी बात आप सुनते हैं. वह कांग्रेस का खुद का मत है. मैं इन बातों को साझा नहीं करता. इसका कारण बहुत स्पष्ट है. अगर मैं किसी चीज में सफल नहीं हो रहा हूं, तो इसको लेकर बहाना नहीं बनाता हूं. अगर मुझे चुनाव परिणामों से किसी भी तरह की समस्या है, तो मुझे जीत के समय में भी यह समस्या होनी चाहिए. पिछले विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया था. हमें इसकी जरा सी भी उम्मीद नहीं थी कि इतनी सारी सीटें मिल जाएंगी.' अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि इंडिया गठबंधन के नेताओं ने 2024 लोकसभा के चुनावी नतीजे के बाद एक बैठक तक नहीं की है.
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कांग्रेस ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की उठाई थी मांग
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ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि जब-जब चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिली है. तब- तब पार्टी प्रमुख से लेकर उनके नेताओं ने ईवीएम और चुनाव आयोग पर कई बड़े गंभीर आरोप लगाए हैं. पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार के बाद कांग्रेस नेताओं ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी, पार्टी का मकसद वोटरों का विश्वास जीतना था.