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विरासत भी विकास भी… अयोध्या में बना कीर्तिमान, 85 हजार करोड़ की परियोजनाएं, युवाओं को मिला बेशुमार रोजगार

विरासत की नींव पर जहां विकास ने अपनी कहानी गढ़ी, वो है अयोध्या नगरी. यह न केवल धार्मिक पर्यटन के रूप में नया कीर्तिमान सेट कर रही है बल्कि अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी रफ्तार भर रही है.

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अयोध्या (Ayodhya) अब केवल एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि गौरवशाली नए भारत के आत्मविश्वास का जीवंत प्रतीक बन चुकी है. श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को दो साल पूरे होने के साथ ही अयोध्या ने यह साबित कर दिया है कि विरासत और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं. 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का कायाकल्प एक ऐसी गाथा बन चुका है, जिसमें आस्था, समृद्ध अर्थव्यवस्था, युवाओं के लिए रोजगार और भविष्य की स्पष्ट दिशा समाहित है.  

आस्था से अर्थव्यवस्था तक स्वर्णिम यात्रा

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श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के स्थायी स्तंभ के रूप में पहचान बनाई. यहां देश-विदेश से श्रद्धालुओं की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई. साल 2025 में जनवरी-जून के बीच लगभग 23 करोड़ से ज्यादा पर्यटक रामनगरी आए और यहां के विकास और समृद्धि के साक्षी बने. 

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लगभग 85 हजार करोड़ की परियोजनाओं से अयोध्या वर्ल्ड क्लास शहर का रूप ले रहा है. इसका श्रेय विकसित अयोध्या के शिल्पकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है. मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि श्रद्धालु सुरक्षित, सुव्यवस्थित और गरिमामय अनुभव के साथ रामनगरी आकर भगवान प्रभु श्रीराम का दर्शन करें. 

अंतर्राष्ट्रीय शहर के रूप में बन रही पहचान

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योगी आदित्यनाथ सरकार ने अयोध्या को इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया. अंतर्राष्ट्रीय स्तर का महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, चौड़ी और सुदृढ़ सड़कों का नेटवर्क, आधुनिक रेलवे स्टेशन, रामपथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ ये सब अयोध्या को एक आधुनिक तीर्थ और पर्यटन नगरी में बदल रहे हैं. यह विकास केवल इमारतों तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और स्थानीय उद्यमिता को नई गति दे रहा है. 

पर्यटन के क्षेत्र में अयोध्या ने बनाया कीर्तिमान

अयोध्या आज उत्तर प्रदेश के पर्यटन का केंद्र है. धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और हेरिटेज टूरिज्म को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा दिया गया. होटल, होम-स्टे, गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को नई पहचान मिली है. योगी आदित्यनाथ सरकार ने आस्था से आय और आय से आत्मनिर्भरता का नया रोडमैप तैयार किया है. अयोध्या मंडल में 19 गांवों को विशेष रूप से होम स्टे विकास के लिए चयनित किया गया है. 

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अयोध्या जिले में अमौनी, शेरवाघाट, अबानपुर सरोहा, गौराघाट, रामपुरवा गांवों में 50 होम स्टे पर काम चल रहा है. इसमें से ज्यादातर होम स्टे ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं. अब तक जिले में 1136 से ज्यादा होम स्टे रजिस्टर्ड हो चुके हैं जो पर्यटकों को ठहरने के लिए उचित रेट पर आवास उपलब्ध करा रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय स्तर के होटल भी विदेशी पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास सुविधा प्रदान कर रहे हैं. 

अयोध्या गढ़ रहा युवाओं का भविष्य 

इस परिवर्तन का सबसे बड़ा लाभार्थी बना है प्रदेश का युवा. टूरिज्म, एविएशन, ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा, इवेंट मैनेजमेंट और सेवा क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर खुले हैं. अयोध्या अब पलायन का कारण नहीं, बल्कि रोजगार का केंद्र बन रही है. यह वही युवा शक्ति है जो विकसित भारत के संकल्प को जमीन पर उतार रही है. होटल, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, हस्तशिल्प, हथकरघा, मल्टीनेशनल कंपनियों में युवाओं को मनमाफिक रोजगार के अवसर मिल रहे हैं. 

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अयोध्या में जो दुकानदार पहले हर दिन 1000 रुपये कमाते थे अब वो 5 से 8 हजार रुपये कमा रहे हैं. प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले स्थानीय युवाओं को औसतन 40 हजार की मासिक सैलरी मिल रही है. दो साल में अयोध्या ने जो यात्रा तय की है, वह साफ संदेश देती है जब नेतृत्व दृढ़ हो, दृष्टि स्पष्ट हो और नीयत राष्ट्रहित की हो, तब विरासत भी चमकती है और विकास भी, योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में अयोध्या आज केवल इतिहास नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भूमिका बन चुका है.

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