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उत्तराखंड में UCC के तहत झूठी शिकायत पर लगेगा भारी जुर्माना, सख़्त हुए नियम

समान नागरिक संहिता के तहत अब पंजीकरण को लेकर झूठी शिकायत करने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया जाएगा. यह जुर्माना राशि 45 दिनों के भीतर ऑनलाइन जमा करनी होगी.5000 से लेकर 10000 तक का जुर्माना झूठी शिकायत करने पर लगाया जाएगा जिससे क़ानून में पारदर्शिता लाई जा सके

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उत्तराखंड में जबसे UCC यानी समान नागरिक संहिता क़ानून लागू किया गया है, तबसे चंद मौलाना काफ़ी परेशान है, बार बार मैदान में आते हैं, यूसीसी के ख़िलाफ़ मुसलमानों को भड़काते हैं, इसी का नतीजा है कि कुछ मुसलमान उत्तराखंड कोर्ट की चौखट तक पहुंच गए, लेकिन इसी बीच धामी सरकार ने UCC को लेकर एक और एक्शन बड़ा एक्शन ले लिया, UCC के नाम पर झूठ की दुकान चलाने वालों पर नकेल कस डाली, जिसके तहत

  • UCC के पंजीकरण को लेकर झूठी शिकायत करने वालों पर सख़्त जुर्माना लगाया जाएगा
  • झूठी शिकायतों के कारण उत्पन्न अनावश्यक विवादों और परेशानियों को रोकने के लिए नियमावली के अध्याय 6, नियम 20 में यह प्रावधान किया गया है
  • इसके तहत पहली बार झूठी शिकायत करने पर चेतावनी दी जाएगी
  • दूसरी बार झूठी शिकायत करने पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा
  • तीसरी बार फिर झूठी शिकायत की तो 10,000 रूपये का जुर्माना लगाया जाएगा
  • जुर्माने की राशि 45 दिनों के अंदर ऑनलाइन माध्यम से जमा करनी होगी
  • यदि कोई तय समय में इस जुर्माने का भुगतान नहीं करता है तो उसकी वसूली भी राजस्व की तर्ज़ पर तहसील के माध्यम से की जाएगी

तो अब UCC के ज़रिए झूठ फैलाने, और झूठी शिकायत कर प्रशासन को गुमराह करने वालों का तेज़ी से हिसाब किताब होगा, वहीं ख़ुद गृह विभाग का मानना है कि ये प्रावधान झूठी शिकायतों को बढ़ावा नहीं देगा, और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विवाद रहित बनाएगा, सबसे बड़ी बात तो ये है कि समान नागरिक संहिता के अंतर्गत विभिन्न सेवाओं का पंजीकरण कराने के दौरान दी गईं जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा, यानी की किसी भी तीसरे व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, केवल रजिस्ट्रेशन की संख्या सार्वजनिक की जाएगी, वहीं अपर सचिव गृह, निवेदिता कुकरेती का कहना है कि

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सरकार पंजीकरण को विवाद रहित बनाने और लोगों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, इस नए नियम से झूठी शिकायतों से बचाव के साथ ही निजता की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी, उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू की गई समान नागरिक संहिता (UCC) में विवाह, तलाक, विरासत और अन्य कानूनी मामलों से संबंधित कई नए प्रावधान किए गए हैं, पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से सशक्त बनाने के लिए यह नए नियम जोड़े गए हैं

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तो UCC में नए नियम क़ानून जोड़कर इसे और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे हिमाक़त करने वाले झूठी शिकायत कर खिलवाड़ ना कर पाए, और जो ऐसे कदम उठाएगा, उनसे सख़्ती से निपटा जाएगा, चलिए ये भी बताते हैं कि

आख़िर क्या है UCC

UCC यानी समान नागरिक संहिता क़ानून

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  • देश में रहने वाले सभी नागरिकों (हर धर्म, जाति, लिंग के लोगों) के लिए एक ही कानून होना
  • विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बँटवारे जैसे तमाम विषयों में हर नागरिक के लिए एक से क़ानून होंगे
  • शादी का अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा, ग्राम सभा स्तर पर भी रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी
  • बहुविवाह पर रोक लगेगी, लड़कियों की शादी की उम्र चाहे वह किसी भी जाति धर्म की हो, एक समान 18 साल होगी
  • सभी धर्मों में बच्चों को गोद लेने का अधिकार मिलेगा, लेकिन दूसरे धर्म के बच्चे को गोद नहीं लिया जा सकेगा
  • हलाला और इद्दत की प्रथाएं बंद होंगी, उत्तराधिकार में लड़कियों को लड़कों के बराबर का हिस्सा मिलेगा
  • लिव इन रिलेशन से पैदा होने वाले बच्चे को भी शादीशुदा जोड़े के बच्चे की तरह अधिकार मिलेगा

खैर उत्तराखंड इस क़ानून को लागू करने वाला पहला राज्य है जल्द ही पूरे देश में UCC को लागू किया जाएगा

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