Advertisement

Loading Ad...

बिहार कांग्रेस में बदलाव ने क्या सच में बढ़ा दी तेजस्वी की टेंशन, जेडीयू की प्रतिक्रिया

चुनाव की तैयारी में जुटे राजनीतिक दलों ने कई बड़े बदलाव के साथ चुनावी रण में अपने प्रतिद्वंद्वी को कड़ी चुनौती देने के लिए रणनीति बना रहे है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने बड़ा गांव खेलते हुए अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह आप दलित समुदाय से आने वाले राजेश कुमार को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

Google
Loading Ad...
बिहार में इस साल विधानसभा के चुनाव होने है। इसको लेकर सियासी हलचल काफी तेज है। चुनाव की तैयारी में जुटे राजनीतिक दलों ने कई बड़े बदलाव के साथ चुनावी रण में अपने प्रतिद्वंद्वी को कड़ी चुनौती देने के लिए रणनीति बना रहे है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने बड़ा गांव खेलते हुए अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह आप दलित समुदाय से आने वाले राजेश कुमार को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। राजेश कुमार मौजूदा समय में बिहार की कुटुंबा विधानसभा सीट से विधायक है। बिहार में कांग्रेस को कमान राजेश कुमार के हाथों में आने के बाद सियासी प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने कांग्रेस के इस फैसले को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर तंज कसा है। 

कांग्रेस ने बढ़ा दी तेजस्वी की टेंशन


विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में हुए इस महत्वपूर्ण बदलाव पर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के प्रवक्ता अरविंद निषाद ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह पर जुबानी हमला किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक पर अरविंद निषाद ने अपने एक पोस्ट में तेजस्वी यादव को टैग करते हुए लिखा "माननीय तेजस्वी यादव जी को टेंशन देने वाला समाचार आ गया है। महागठबंधन में शामिल दलों के लिए खुशखबरी...बधाई हो।"

अखिलेश सिंह पर दी प्रतिक्रिया


अरविंद निषाद ने अपने एक अन्य पोस्ट में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को टाइप करते हुए लिखा "माननीय अखिलेश प्रसाद सिंह जी अपने दो-ढाई साल के कार्यकाल में कमेटी बनाने में भी सफल नहीं हो पाए। कांग्रेस की कार्य संस्कृति इस बात का सबूत देता है कि आपको काम करने की आजादी नहीं है। वर्क कल्चर विहीन दल बिहार और देश को अब और ठग नहीं सकता।"
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश में इस बदलाव को करके सियासी संदेश देने की कोशिश की है। दरअसल बिहार में दलितों की आबादी 19.5 प्रतिशत है। इसलिए किसी भी पार्टी के लिए दलित वोट बैंक बिहार में काफी महत्व
रखता है। यही वजह है कि शायद भूमिहार जाति से आने वाले अखिलेश प्रसाद सिंह को हटाकर कांग्रेस पार्टी ने दलित समुदाय के राजेश कुमार को पार्टी की कमान सौंप है ताकि चुनाव में इसका फायदा मिल सके। इसके साथ ही कांग्रेस का ये फैसला महागठबंधन में शामिल दलों को भी थोड़ा मुश्किल में डालेगा जब चुनाव के लिए सीट शेयरिंग पर चर्चा होगी।
Loading Ad...

यह भी पढ़ें

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...