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गौ-रन जयपुर 2025: जब गौवंश सरंक्षण के लिए दौड़ी गुलाबी नगरी… रचा इतिहास, दर्ज किए दो बड़े रिकॉर्ड

पहली बार किसी शहर ने गाय संरक्षण को स्पोर्ट्स के साथ जोड़कर बड़ा संदेश दिया है. जो सामाजिक जागरूकता और सेवा की मिसाल बन गया.

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गुलाबी नगरी जयपुर ने उस वक्त इतिहास रच दिया जब देसी गौवंश के संरक्षण का संदेश देते हुए ‘गौ-रन जयपुर 2025’ का आयोजन हुआ. ये नजारा किसी भव्य उत्सव से कम नहीं था. ‘गौ-रन जयपुर’ में 25 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी मौजूदगी से न केवल राजस्थान, बल्कि देश का सबसे बड़ा गौ-समर्पित मैराथन बना दिया. 

गौवंशों के संरक्षण में इस तरह की संभवत ये पहली मैराथन होगी. जिसमें देश-विदेश से आए 8 हजार प्रोफेशनल धावक, किसान, गौपालक, छात्र, सामाजिक संस्थान और कई युवा समूहों ने अपने जोश से जयपुर की सड़कों को उत्साह से भरते हुए गौ-रक्षा का संदेश दिया. 

गौ-रन जयपुर 2025 में आध्यात्म का संदेश 

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गौवंश को समर्पित इस मैराथन में साधु-संत भी शामिल हुए. जिन्होंने अपने प्रवचन और भजनों के जरिए गौ-रन कार्यक्रम को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहतरीन आयाम दे दिए. कार्यक्रम में ‘धरती से नाता, देश, खेत और गौमाता’ जैसी स्वर लहरियां गूंजी. 

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गौ-रन कार्यक्रम ने बनाया रिकॉर्ड 

देसी गायों के संरक्षण पर आधारित यह अनूठा आयोजन इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो गया. जिसने जयपुर की पहचान को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चमका दिया. ‘गौ राष्ट्र यात्रा’ और ‘गौ महाकुंभ’ की ओर से आयोजित इस मैराथन को सिर्फ एक स्पोर्ट्स इवेंट नहीं, बल्कि राष्ट्रव्यापी जन-जागरण आंदोलन के रूप में देखा गया. स्वास्थ्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का यह संगम देसी गोवंश की उपयोगिता और संरक्षण संदेश को व्यापक स्तर पर स्थापित करता नजर आया. 

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तीन लेवल पर हुई प्रतियोगिता 

गौ-रन कार्यक्रम को श्रेणियों में बांटा गया. 
पहली श्रेणी- 10 किलोमीटर 
दूसरी श्रेणी- 5 किलोमीटर 
तीसरी श्रेणी- 3 किलोमीटर फन रन

यह दौड़ अल्बर्ट हॉल संग्रहालय के दक्षिण द्वार से शुरू होकर वहीं खत्म हुई. 

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प्रतियोगिता के विनर 

10 किमी ओपन कैटेगरी के पुरुष वर्ग में गौरव कसाना पहले नंबर पर रहे. जिन्होंने 15:05 मिनट में रेस पूरी की. वहीं, दूसरे नंबर पर राजेश मौर्या रहे. जिन्होंने 15:08 मिनट में रेस पूरी की, जबकि तीसरे नंबर पर हेमंत यादव रहे. जिन्होंने 15:21 मिनट में दौड़ पूरी की. 

वहीं, महिला वर्ग की बात करें तो भगवती दिओरा पहले नंबर पर रहीं, जिन्होंने 17:39 मिनट में रेस पूरी की. दूसरे नंबर पर अंकिता रहीं, जिन्होंने 18:11 मिनट में रेस पूरी की. जबकि तीसरे नंबर पर रोजी रहीं, जिन्होंने 18:56 मिनट पर रेस पूरी की. 

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गौ-रन कार्यक्रम के आयोजक भारत सिंह राजपुरोहित ने क्या कहा? 

गौ-सेवा के नाम इस कार्यक्रम की पहल भारत सिंह राजपुरोहित ने की. उनका मकसद देसी गायों के संरक्षण को बढ़ावा देना है. भारत सिंह राजपुरोहित ने कहा, पहली बार किसी शहर ने गाय संरक्षण को स्पोर्ट्स के साथ जोड़कर इतना बड़ा संदेश दिया है. हमारा उद्देश्य है कि देश में देसी गौवंश की महत्ता और उसकी रक्षा को लेकर एक मजबूत राष्ट्रीय चेतना विकसित हो. 

गौ-संरक्षण और फिटनेस का नया मॉडल

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‘गौ-रन जयपुर 2025’ ने यह साबित किया कि जब परंपरा, सामाजिक जागरूकता और फिटनेस एक साथ आते हैं, तो परिणाम सिर्फ आयोजन तक नहीं, बल्कि सकारात्मक परिवर्तन की मिसाल बनते हैं. जयपुर का यह भव्य कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए गौ-संरक्षण, संस्कृति और स्वस्थ जीवनशैली का प्रेरक दस्तावेज बनकर इतिहास में दर्ज हो गया

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