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Ganga Expressway पर फर्राटा भरने को हो जाएं तैयार, मेरठ- प्रयागराज का 12 घंटे का सफर अब सिर्फ 6 घंटे में होगा तय

Meerut to Prayagraj: गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लिए सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि विकास की नई रीढ़ साबित होने वाला है. इसके शुरू होते ही कनेक्टिविटी, व्यापार, उद्योग और यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. आने वाले वर्षों में यह परियोजना प्रदेश की तरक्की की एक मजबूत पहचान बनेगी.

Image Source: Social Media
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Ganga Expressway: नया साल 2026 शुरू हुए दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है और इसी के साथ उत्तर प्रदेश एक ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर तेजी से बढ़ रहा है.  प्रदेश की सबसे बड़ी और सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे अब लगभग पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है. करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे 95 प्रतिशत से ज्यादा पूरा हो चुका है और उम्मीद है कि अगले महीने इसका उद्घाटन कर दिया जाएगा. इसके शुरू होते ही उत्तर प्रदेश में लंबी दूरी की यात्रा न सिर्फ आसान होगी, बल्कि पहले से कहीं ज्यादा तेज और आरामदायक भी हो जाएगी.

मेरठ से प्रयागराज का सफर अब आधे समय में

गंगा एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके चालू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज की दूरी महज 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी, जबकि अभी इस सफर में लगभग 12 घंटे लगते हैं. यानी यात्रियों का समय भी बचेगा और थकान भी कम होगी. यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से सीधे जोड़ने वाला एक मजबूत और भरोसेमंद रास्ता बनेगा.

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यूपी का सबसे लंबा और आधुनिक एक्सप्रेसवे

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यह छह लेन वाला एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि तेज रफ्तार के साथ-साथ सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है. एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक जाएगा. इतने सारे जिलों को जोड़ने की वजह से यह परियोजना पूरे प्रदेश के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.

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निर्माण कार्य अंतिम चरण में

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के मुताबिक, एक्सप्रेसवे की मुख्य सड़क पूरी तरह तैयार हो चुकी है. इसके अलावा पुल, फ्लाईओवर और अन्य जरूरी ढांचों का काम भी लगभग पूरा कर लिया गया है. अब तक करीब 1500 से ज्यादा छोटे-बड़े स्ट्रक्चर बनाए जा चुके हैं. बचे हुए काम को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है ताकि उद्घाटन तय समय पर हो सके.

12 पैकेज में हुआ निर्माण

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गंगा एक्सप्रेसवे को 12 अलग-अलग कंस्ट्रक्शन पैकेज में तैयार किया गया है. देश की जानी-मानी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां इस परियोजना पर काम कर रही हैं. समय पर काम पूरा हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है. सरकार की कोशिश है कि एक्सप्रेसवे तय समय सीमा में जनता के लिए खोल दिया जाए.

तेज रफ्तार और हाईटेक सुविधाएं

इस एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे. टोल वसूली के लिए फास्टैग सिस्टम पूरी तरह तैयार है और इसका सफल ट्रायल भी हो चुका है. पूरे मार्ग पर 23 टोल प्लाजा, कई बड़े फ्लाईओवर, सैकड़ों छोटे पुल और कलवर्ट बनाए गए हैं ताकि ट्रैफिक बिना किसी रुकावट के चलता रहे और यात्रियों को बार-बार ब्रेक न लगाना पड़े.

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आपात स्थिति में काम आएगी एयर स्ट्रिप

गंगा एक्सप्रेसवे की एक खास और अनोखी पहचान है शाहजहांपुर के पास बनी 3.5 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी एयर स्ट्रिप. यहां भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की सफल लैंडिंग और टेकऑफ का परीक्षण किया जा चुका है. किसी भी आपात स्थिति या राष्ट्रीय सुरक्षा के समय यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित होगी.

आर्थिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

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इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से सिर्फ यात्रा ही आसान नहीं होगी, बल्कि आसपास के इलाकों में आर्थिक विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा. मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे जिलों में उद्योग-धंधों को नई गति मिलेगी. एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर, फार्मा पार्क, टेक्सटाइल पार्क और आईटी पार्क विकसित करने की योजना है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार के नए मौके मिलेंगे. सड़क की निगरानी और रखरखाव के लिए आधुनिक तकनीक, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

भविष्य में और बढ़ेगा दायरा

राज्य सरकार ने गंगा एक्सप्रेसवे के दूसरे चरण को भी मंजूरी दे दी है. इसके तहत इस एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक और दूसरी ओर बलिया की दिशा में बढ़ाया जाएगा. इससे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में सड़क संपर्क और भी मजबूत हो जाएगा.

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विकास की नई रीढ़ बनेगा गंगा एक्सप्रेसवे

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गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लिए सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि विकास की नई रीढ़ साबित होने वाला है. इसके शुरू होते ही कनेक्टिविटी, व्यापार, उद्योग और यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. आने वाले वर्षों में यह परियोजना प्रदेश की तरक्की की एक मजबूत पहचान बनेगी.

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