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बंगाल रेप केस पर टीएमसी में पहली बार दो फाड़, ममता के करीबी सांसद ने पार्टी लाइन से किया किनारा

कोलकाता में लॉ छात्रा के साथ हुए कथित दुष्कर्म के मामले में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के विवादित बयान और फिर पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से उनकी खुली असहमति ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहराते मतभेदों को उजागर कर दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए टीएमसी की ओर से जारी बयान पर सवाल उठाए और पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप जड़ दिया.

File Photo
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कोलकाता में लॉ छात्रा के साथ हुए कथित दुष्कर्म के मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है. इस मामले में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के विवादित बयान और फिर पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से उनकी खुली असहमति ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहराते मतभेदों को उजागर कर दिया है.

टीएमसी के कई वरिष्ठ नेता जहां पीड़िता के पक्ष में खुलकर सामने आए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं कल्याण बनर्जी पार्टी लाइन से हटते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए टीएमसी की ओर से जारी बयान पर सवाल उठाए और पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप जड़ दिया.

कल्याण बनर्जी का तीखा हमला
कल्याण बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस द्वारा 'एक्स' पर की गई पोस्ट से पूरी तरह असहमत हूं. क्या वे अप्रत्यक्ष रूप से उन नेताओं का समर्थन कर रहे हैं जो इन अपराधियों को बचा रहे हैं? जब तक सीधे तौर पर जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक केवल अकादमिक बयानों से कोई वास्तविक बदलाव नहीं आएगा." उन्होंने लिखा, "इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि 2011 के बाद उभरे कुछ नेता खुद ऐसे अपराधों में सवालों के घेरे में हैं. मैं उन लोगों से भी खुद को स्पष्ट रूप से दूर रखना चाहता हूं, जो इन अपराधियों को प्रोत्साहित या संरक्षण दे रहे हैं. मेरे शब्दों और बयानों के पीछे के इरादे को सही मायने में समझने के लिए, एक निश्चित स्तर की नैतिक और बौद्धिक एकता की आवश्यकता है - जो दुर्भाग्य से गायब लगती है."

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बनर्जी के इस तीखे तेवर से साफ है कि वे न सिर्फ अपनी बात पर कायम हैं, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भी सीधा दबाव बना रहे हैं. यह घटनाक्रम टीएमसी में एक नए तरह के शक्ति-संघर्ष की ओर संकेत कर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में पार्टी की आंतरिक राजनीति और ज्यादा उथल-पुथल का शिकार हो सकती है. पार्टी नेतृत्व की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि कल्याण बनर्जी के इस बागी रुख से टीएमसी को गंभीर आंतरिक संकट का सामना करना पड़ सकता है.

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टीएमसी ने कल्याण बनर्जी और मदन मित्रा के बयानों से झाड़ा पल्ला
इससे पहले, टीएमसी ने बढ़ते विवाद को देखते हुए सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा के बयान से पल्ला झाड़ लिया था. टीएमसी ने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में हुए जघन्य अपराध के बारे में सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा द्वारा की गई टिप्पणी उनकी निजी हैसियत से की गई थी. पार्टी उनके बयानों से खुद को अलग करती है और इसकी कड़ी निंदा करती है. ये विचार किसी भी तरह से पार्टी की स्थिति को नहीं दर्शाते हैं. हमारा रुख दृढ़ है; महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए हमारी कोई सहिष्णुता नहीं है और हम इस जघन्य अपराध में शामिल सभी लोगों के लिए सख्त से सख्त सजा की मांग करते हैं."

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इस बयान के जरिए टीएमसी नेतृत्व ने न सिर्फ राजनीतिक नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की है, बल्कि यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि पार्टी महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी. पार्टी के भीतर मतभेदों की यह खुली तस्वीर न केवल टीएमसी की छवि के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले नेतृत्व की एकता और अनुशासन पर भी सवाल खड़े कर रही है.

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