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जम्मू और कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध खीर भवानी मेले में पहुंचे फारूक अब्दुल्ला, लगाए 'भोलेनाथ जिंदाबाद' के नारे, VIDEO वायरल

जम्मू और कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध खीर भवानी मेले में एक गजब का मामला सामने आया है. यहां मेले में पहुंचे फारूक अब्दुल्ला ने 'भोलेनाथ जिंदाबाद' के नारे लगाए, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है.

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जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में सदियों पुराना सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन हो रहा है. देश भर के लोग, विशेषकर कश्मीरी पंडित या भारी संख्या में पहुंचते हैं. यहां एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब तुलमुला स्थित खीर भवानी मंदिर में आयोजित इस सालाना मेले में J&K के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने हिस्सा लिया. इस दौरान उनका ‘जय भोलेनाथ’ या भोलेनाथ जिंदाबाद का नारा लगाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. उन्होंने खीर भवानी माता की पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी पर खुशी जताते हुए कहा कि यह बहुत बड़ी बात है. माता ने श्रद्धालुओं को यहां, उनके घरों में बुलाया है. अब्दुल्ला ने इस अवसर पर कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी की उम्मीद भी ज़ाहिर की.

'अब्दुल्ला ने की लोगों से डर छोड़ने की अपील'

फारूक अब्दुल्ला ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले सैन्य संघर्ष का ज़िक्र करते हुए लोगों से डर त्यागने और जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि "जम्मू में भी लोग लड़ाई के कारण डरे हुए हैं. वे माता वैष्णो देवी मंदिर नहीं आ रहे हैं. मैं लोगों से कहना चाहता हूं कि वे डर छोड़कर माता के दर्शन के लिए आएं.”

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साथ ही, फारूक अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि उन्हें तीन जुलाई से शुरू हो रही वार्षिक अमरनाथ यात्रा में बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के शामिल होने की उम्मीद है.

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यह मेला जम्मू-कश्मीर के बहुसांस्कृतिक समाज की पहचान बन चुका है, जिसमें हर धर्म और संप्रदाय के लोग मिलजुल कर भाग लेते हैं. इस साल के आयोजन में LG मनोज सिन्हा, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और अन्य गणमान्य लोगों ने भी हिस्सा लिया.

फारूक अब्दुल्ला ने खीर भवानी माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और भोलेनाथ की आराधना करते हुए कहा कि “यह धरती सूफियों और संतों की है, और हमें इसे नफरत से नहीं, प्यार और भाईचारे से बचाना होगा.” उन्होंने कश्मीर के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की.

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पहलगाम हमला और पाक के साथ सैन्य तनाव के बाद हुआ मेला!

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गौरतलब है कि यह आयोजन 22 अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुआ है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के भी कड़े इंतज़ाम किए गए थे. बावजूद इसके, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और नेताओं की उपस्थिति से इलाके में शांति के लौटने की उम्मीद जताई जा रही है. 

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