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न लाइट, न बैरिकेड, न वॉर्निंग बोर्ड… दिल्ली जनकपुरी हादसे में बड़ी लापरवाही, 3 इंजीनियर्स पर केस दर्ज, एक अरेस्ट

नोएडा के बाद दिल्ली में भी सिस्टम के गड्ढे में एक मासूम की मौत हो गई. जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड के गड्ढे में गिरने से कमल की मौत मामले में विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है.

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Delhi Janakpuri incident: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में गड्ढे में गिरने से शख्स की मौत मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है. FIR में खुलासा हुआ है कि सड़क पर खोदे गए इस गड्ढे के पास कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेड, रिफ्लेक्टर, लाइट या कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं था. इस लापरवाही के कारण 25 वर्षीय कमल की जान चली गई. 

हादसा गुरुवार (5 फरवरी ) रात करीब 11-12 बजे के आसपास हुआ था. जब HDFC बैंक के कॉल सेंटर में काम करने वाले कमल बाइक से अपने घर जा रहे थे. कमल का ऑफिस 
रोहिणी में था और वह कैलाशपुरी की पालम कॉलोनी में अपने घर जा रहे थे. 

आरोपियों पर क्या एक्शन हुआ? 

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FIR में कहा गया कि गड्ढे को बिना किसी सुरक्षा उपाय के खुला छोड़ दिया गया था. वहीं, दिल्ली पुलिस ने इस सिलसिले में कंस्ट्रक्शन साइट के एक सब-कॉन्ट्रैक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है. जांच में सामने आया कि सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति को घंटों पहले ही दुर्घटना के बारे में बता दिया गया था, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की. दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने बताया कि सरकार ने इस मामले में लापरवाही के आरोप में तीन इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है. उन पर लापरवाही बरतने के आरोप में केस दर्ज किया गया है. 

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घर पर केक लेकर जा रहा था कमल

बताया जा रहा है 6 फरवरी को कमल के माता-पिता की सालगिरह थी. तो वह रात 12 बजे घर केक लेकर पहुंचने वाला था. उन्होंने अपने जुड़वां भाई और दोस्त को फोन कर बताया कि वे 10-15 मिनट में घर पहुंच जाएंगे, लेकिन, इसके बाद उनका कोई संपर्क नहीं हुआ. परिवार और दोस्त पूरी रात कमल की तलाश करते रहे. इस दौरान जनकपुरी, सागरपुर, विकासपुरी और रोहिणी में थानों के चक्कर काटते रहे, लेकिन, पुलिस ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करने से इंकार कर दिया. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने कहा कि 24 घंटे पूरे होने के बाद ही FIR दर्ज होती है. मोबाइल लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश हुई, लेकिन पूरी मदद नहीं मिली. 

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यह भी पढ़ें- सिस्टम के ‘गड्ढे’ में एक और जान समाई! दिल्ली जल बोर्ड की खुदाई में 25 साल के कमल की मौत, जांच कमेटी गठित

सुबह करीब 8 बजे जनकपुरी थाने को पीसीआर कॉल मिली कि बी-3बी ब्लॉक, आंध्रा स्कूल के पास सड़क पर एक बड़ा गड्ढा है, जिसमें बाइक सवार शख्स गिरा हुआ है. पुलिस मौके पर पहुंची तो पाया कि दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीवर लाइन के काम के लिए खोदे गए गड्ढे में (करीब 15-20 फीट लंबा, 13-14 फुट चौड़ा और 14-15 फुट गहरा) कमल बाइक के साथ बीचों-बीच पड़ा था. फायर ब्रिगेड की मदद से कमल और उनकी बाइक को बाहर निकाला गया. उन्हें PCR वाहन से दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. 

फिर खुली सिस्टम की पोल!

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कमल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पेट के ऊपरी हिस्से में गंभीर चोटें दर्ज हुईं हैं. पुलिस ने क्राइम टीम और फॉरेंसिक टीम से मौके की जांच कराई. जांच में पाया गया कि दिल्ली जल बोर्ड और ठेकेदार ने गड्ढे को बिना किसी सुरक्षा उपाय के खुला छोड़ दिया था. कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेड, रिफ्लेक्टर या रोशनी नहीं थी. पुलिस ने BNS की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है. दिल्ली सरकार ने तीन इंजीनियरों को सस्पेंड भी किया है. यह मामला सड़क सुरक्षा और सरकारी विभागों की लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है. परिवार न्याय की मांग कर रहा है और लोगों में आक्रोश है कि ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं. 

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इससे पहले नोएडा में पानी से भरे गड्ढे में गिरने से युवराज मेहता की मौत हो गई थी. युवराज कार के साथ गड्ढे में गिर गया था. मौके पर स्थानीय लोग, पुलिस, फायर ब्रिगेड पहुंची लेकिन किसी ने पानी में उतरकर युवराज को निकालने की जहमत नहीं की. गड्ढे को लेकर कई बार शिकायत की गई लेकिन नोएडा प्राधिकरण की टीम सोती रही. नतीजा ये हुआ कि निर्दोष की जान चली गई. अब दिल्ली में सोते सिस्टम की लापरवाही ने 25 साल के कमल का परिवार उजाड़ दिया. सिस्टम तब तक नहीं सुधरता जब तक कोई मासूम लापरवाही की भेंट न चढ़ जाए. 

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