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Delhi Election Result: कौन हैं Mohan Bisht जिसने Mustafabad में हराया जीत का परचम ?
Delhi Election Result: कौन हैं पांच बार के विधायक मोहन सिंह बिष्ट जिनका बीजेपी ने काटा टिकट लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मुस्लिमों के गढ़ मुस्तफाबाद में जीत का झंडा लहरा दिया
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जिस करावल नगर से मोहन बिष्ट पांच बार विधायक रहे, बीजेपी ने उसी करावल नगर से उनका टिकट काट दिया, और आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए कपिल मिश्रा को टिकट देकर यहां से उतार दिया। जिस पर मोहन सिंह बिष्ट ने नाराजगी भी जाहिर की थी और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था।
बीजेपी ने टिकट काटा तो मोहन सिंह बिष्ट नाराज हो गये, और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। लेकिन एक सच्चे भाजपाई होने की वजह से कांग्रेस में जाने से साफ इंकार कर दिया। ये बात जैसे ही बीजेपी आलाकमान तक पहुंची, तुरंत उन्हें मनाने की कोशिश की गई, और किसी तरह से मनाते हुए बीजेपी ने मोहन सिंह बिष्ट को सबसे टफ फाइट वाली सीट मुस्तफाबाद से टिकट देकर मैदान में उतार दिया। जिसे मुसलमानों का गढ़ कहा जाता है, क्योंकि करीब चालीस फीसदी वोटर होने की वजह से आम आदमी पार्टी ने जहां मुस्लिम उम्मीदवार आदिल अहमद खान उतारा, तो वहीं हैदराबाद से दिल्ली चुनाव लड़ने आए असदुद्दीन ओवैसी ने भी दंगे के आरोपी ताहिर हुसैन को टिकट देकर चुनाव लड़ा दिया, जिससे टक्कर जबरदस्त हो गई थी। लेकिन इसके बावजूद मोहन सिंह बिष्ट ने लड़ाई नहीं छोड़ी और मैदान में डटे रहे। जिसका असर ये हुआ जब चुनावी नतीजे आए तो...
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मुस्तफाबाद सीट के नतीजे
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- BJP उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने 85215 वोट पाकर जीत हासिल की
- AAP उम्मीदवार आदिल अहमद खान 67637 वोट पाकर चुनाव हार गये
- AIMIM उम्मीदवार ताहिर हुसैन भी 33474 वोट पाकर बुरी तरह हार गये
मुस्लिमों के गढ़ मुस्तफाबाद में जीत का भगवा गाड़ कर मोहन सिंह बिष्ट ने जहां इतिहास रच दिया, तो वहीं पार्टी के अंदर ही जिन लोगों ने करावल नगर से टिकट काट कर मुस्तफाबाद जैसी टफ सीट पर उन्हें उतारने की रणनीति बनाई थी, उन्हें भी मोहन सिंह बिष्ट ने करारा जवाब दे दिया कि सीट कोई भी हो, मोहन सिंह बिष्ट का जलवा बरकरार था, है और रहेगा। करावल नगर से पांच बार विधायक रहे मोहन सिंह बिष्ट ने मुस्तफाबाद सीट भी जीत कर बीजेपी की झोली में डाल दी। उन्हें रोकने के लिए हैदराबाद से खास तौर पर सांसद ओवैसी आए थे, ताहिर हुसैन को चुनाव लड़ाया था, लेकिन उनके ताहिर हुसैन को भी हराकर वापस भेज दिया। इसी बात से समझ सकते हैं कि मोहन सिंह बिष्ट को मुस्तफाबाद का शेर क्यों कहा जा रहा है।