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CM Yogi ने वाराणसी में किया 51 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा का अनावरण

जय हनुमान श्री पीठ ट्रस्ट द्वारा स्थापित इस भव्य प्रतिमा को राजस्थान के कारीगरों ने दो साल में तैयार किया है। सीएम योगी ने काशीवासियों के लिए आस्था के इस प्रतीक को समर्पित किया।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक दिवसीय वाराणसी दौरे के क्रम में रविवार को एयरपोर्ट रोड स्थित हरहुआ के काजीसराय क्षेत्र में 51 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके उपरांत उन्होंने परिक्रमा करते हुए विधि-विधान से बजरंगबली की पूजा-अर्चना की। 

जय हनुमान श्री पीठ ट्रस्ट द्वारा स्थापित इस भव्य प्रतिमा को राजस्थान के कारीगरों ने दो साल में तैयार किया है। सीएम योगी ने काशीवासियों के लिए आस्था के इस प्रतीक को समर्पित किया।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी ने रविवार को एक दिवसीय वाराणसी दौरे में काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें अंग वस्त्र और मोमेंटो भेंट किया।

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मुख्यमंत्री ने पूजा के पश्चात बाबा विश्वनाथ से प्रदेश की खुशहाली और विकास के लिए आशीर्वाद मांगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने काल भैरव मंदिर के बाहर बच्चों को चाकलेट भी दी।

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सीएम योगी ने प्रदेश के संस्कृत विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना का किया शुभारंभ

वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से प्रदेश के संस्कृत विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के 69,195 संस्कृत विद्यार्थियों को 586 लाख रुपये की छात्रवृत्ति संवितरण की शुरुआत की। सीएम योगी ने प्रदेशभर में गुरुकुल पद्धति के आवासीय संस्कृत विद्यालयों को पुनर्स्थापित करने का भी संकल्प लिया।

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उन्होंने संस्कृत भाषा को विज्ञान और तकनीकी शिक्षा की भाषा के रूप में उभरने की संभावना पर जोर दिया और छात्रों से इसे गंभीरता से अपनाने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि जो मानवता का पक्षधर है, वह संस्कृत का भी हिमायती है।

सीएम योगी ने कहा कि संस्कृत न केवल देववाणी है, बल्कि यह विज्ञान की भाषा भी है, जो कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों में उपयोगी है। संस्कृत की विशेषताएं इसे तकनीकी दृष्टिकोण से सरल और सहज बनाती हैं। इसलिए, हम संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए नए प्रयासों की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

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Input: IANS

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